अमेरिका और ईरान के बीच संभावित अहम वार्ता से ठीक पहले पाकिस्तान का हवाई क्षेत्र अचानक रणनीतिक गतिविधियों का केंद्र बन गया है। इस्लामाबाद में होने वाली इस हाई-प्रोफाइल बैठक से पहले अमेरिकी सैन्य विमानों की आवाजाही ने पूरी दुनिया का ध्यान खींच लिया है। ताजा जानकारी के मुताबिक, पिछले 24 घंटों के दौरान पाकिस्तान के एयरस्पेस में कई अमेरिकी एयरक्राफ्ट देखे गए, जिनमें भारी-भरकम C-17 ग्लोबमास्टर और C-40 क्लिपर जैसे विमान शामिल हैं। ये विमान रावलपिंडी स्थित नूर खान एयरबेस पर उतरे, जो पाकिस्तान के लिए एक महत्वपूर्ण सैन्य हब माना जाता है।
सूत्रों के अनुसार, ये गतिविधियां अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस के प्रस्तावित दौरे और इस्लामाबाद में होने वाली अहम बातचीत की तैयारियों का हिस्सा हैं। वेंस के साथ स्टीव विटकॉफ और जेरेड कुशनर जैसे वरिष्ठ अधिकारी भी इस डेलिगेशन में शामिल बताए जा रहे हैं। इस पूरी कवायद से साफ संकेत मिलते हैं कि अमेरिका इस वार्ता को लेकर बेहद गंभीर है और किसी भी तरह की सुरक्षा या लॉजिस्टिक कमी नहीं छोड़ना चाहता।
विशेषज्ञों का मानना है कि C-17 जैसे विमान केवल परिवहन के लिए नहीं, बल्कि अत्याधुनिक सैन्य उपकरण, बख्तरबंद गाड़ियां और सुरक्षा संसाधन ले जाने में सक्षम होते हैं। ऐसे में इन विमानों की मौजूदगी यह दर्शाती है कि यह दौरा केवल कूटनीतिक नहीं, बल्कि सुरक्षा के लिहाज से भी बेहद संवेदनशील है। इसके अलावा एक ISR (इंटेलिजेंस, सर्विलांस और रिकोनिसेंस) विमान भी इस्लामाबाद-रावलपिंडी क्षेत्र के ऊपर मंडराता देखा गया, जो रियल-टाइम निगरानी और सुरक्षा इनपुट देने का काम करता है।
दूसरी ओर, ईरान ने अभी तक वार्ता में पूरी तरह शामिल होने को लेकर स्पष्ट सहमति नहीं दी है। उसने कहा है कि बातचीत तभी संभव है जब इजरायल लेबनान में अपने सैन्य अभियान को रोके। इससे साफ है कि यह वार्ता केवल अमेरिका और ईरान के बीच नहीं, बल्कि पूरे मध्य-पूर्व के जटिल भू-राजनीतिक समीकरणों से जुड़ी हुई है।
गौरतलब है कि नूर खान एयरबेस वही स्थान है जिसे पिछले साल भारत के ऑपरेशन के दौरान निशाना बनाया गया था और लंबे समय तक यह निष्क्रिय रहा था। अब उसी एयरबेस पर अमेरिकी विमानों की लैंडिंग इस बात का संकेत है कि पाकिस्तान ने इसे फिर से रणनीतिक रूप से सक्रिय कर लिया है और इस वार्ता के लिए पूरी तैयारी कर ली गई है।
कुल मिलाकर, इस्लामाबाद में होने वाली यह संभावित वार्ता केवल एक कूटनीतिक बैठक नहीं, बल्कि वैश्विक राजनीति के लिहाज से एक बड़ा मोड़ साबित हो सकती है। अमेरिकी सैन्य विमानों की बढ़ती मौजूदगी और सुरक्षा इंतजाम यह दिखाते हैं कि आने वाले दिनों में इस क्षेत्र की घटनाएं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बड़ा असर डाल सकती हैं।
