अमेरिकी नौसेना का प्रमुख विमानवाहक पोत USS अब्राहम लिंकन स्ट्राइक ग्रुप अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) क्षेत्र में ईरान के काफी करीब पहुंच गया है, जिससे मध्य पूर्व में तनाव और तेज़ हो गया है। इस तैनाती को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एहतियाती कदम बताया है, लेकिन इसे लेकर वैश्विक स्तर पर राजनीतिक और सैन्य अटकलें तेज हो गई हैं, खासकर ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्लाह अली खामेनेई की स्थिति और उनके संभावित उत्तराधिकारी को लेकर।
सूत्रों के अनुसार, यह स्ट्राइक ग्रुप अब्राहम लिंकन के नेतृत्व में सेंट्रल कमांड के क्षेत्र में तैनात होकर क्षेत्र में अमेरिकी सैन्य दबदबा बढ़ा रहा है, जिसमें इसके साथ मौजूद विध्वंसक जहाज़ और अन्य युद्धपोत भी शामिल हैं। इस विस्तारित सैन्य मौजूदगी को देखते हुए अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव का संकेत मिल रहा है, क्योंकि दोनों देशों के बीच मतभेद पिछले कुछ महीनों से और गहरे होते जा रहे हैं।
इसी बीच, ईरान के अटकलों और विवादास्पद रिपोर्टों में यह भी कहा जा रहा है कि 86 वर्षीय खामेनेई कथित तौर पर किसी बंकर में छिपे हुए हैं और अपनी सुरक्षा के लिए संभावित उत्तराधिकारी का नाम भी तय कर चुके हैं। हालांकि यह जानकारी आधिकारिक नहीं है और सोशल मीडिया व alguns विश्लेषकों के दावों पर आधारित है, जिनके अनुसार खामेनेई के बंकर में आसरा लेने और संभावित उत्तराधिकारी के संकेतों को लेकर चर्चा चल रही है।
विशेषज्ञों का कहना है कि ईरान के भीतर व्यापक विरोध प्रदर्शनों और खामेनेई शासन के खिलाफ बढ़ते आंतरिक दबाव के बीच, अमेरिका की इस सैन्य तैनाती ने राजनीतिक अस्थिरता की आशंकाओं को और बढ़ा दिया है। OPEN-SOURCE इंटेलिजेंस प्लेटफॉर्म सहित कुछ विश्लेषण रिपोर्टों में यह दावा किया गया है कि ईरानी शासन अपनी सबसे कमजोर स्थिति में है, और इस कारण से शीर्ष नेतृत्व की सुरक्षा को लेकर रणनीतिक बदलाव हो रहे हैं।
ईरान में पिछले महीनों से जारी विरोध प्रदर्शनों के जवाब में सख्त कारवाई के चलते हजारों लोगों की मौतें और बरीक़ी की स्थिति ने राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंच पर चिंता का विषय बन चुकी हैं। इस तथ्य ने अमेरिका समेत अन्य वैश्विक शक्तियों द्वारा ईरान पर सैन्य दबाव की संभावनाओं पर और बहस छेड़ दी है।
दूसरी ओर, ईरानी अधिकारियों ने किसी भी सैन्य हमले को पूर्ण युद्ध के रूप में मानने की चेतावनी दी है। खाड़ी सहयोगी देश भी खुलकर किसी भी सैन्य कार्रवाई का समर्थन नहीं कर रहे हैं और क्षेत्रीय स्थिरता के लिए कूटनीतिक रास्तों की वकालत कर रहे हैं। ऐसे में सुरक्षा परिषदों और वैश्विक नेताओं के बीच ईरान-अमेरिका गतिरोध को लेकर बातचीत और तनाव प्रबुद्ध हैं।
अमेरिकी नौसेना की यह नज़दीकी तैनाती और खामेनेई को लेकर उड़ी अटकलें यह संकेत देती हैं कि दोनों ही देशों के बीच कूटनीति और सैन्य रणनीति के दायरे और व्यापक हो गए हैं। आने वाले दिनों में राजनीतिक बयानबाज़ी, सैन्य हलचल और अंतरराष्ट्रीय दबाव की भूमिका इस क्षेत्र में और निर्णायक साबित हो सकती है।
