संयुक्त राज्य अमेरिका ने अपने दुनिया के सबसे बड़े और अत्याधुनिक विमानवाहक पोत यूएसएस जेराल्ड आर. फोर्ड को मध्य पूर्व की ओर रवाना कर दिया है, जहाँ पहले से ही यूएसएस अब्राहम लिंकन सहित कई अमेरिकी नौसैनिक बल तैनात हैं। यह कदम क्षेत्र में बढ़ते तनाव, विशेषकर ईरान के साथ चल रही तनावपूर्ण स्थिति के बीच लिया गया है और यह अमेरिका की सैन्य मौजूदगी को और मजबूत करेगा।
यूएसएस जेराल्ड आर. फोर्ड, जिसे विश्व का सबसे बड़ा विमानवाहक पोत माना जाता है, पहले कैरिबियन सागर में अमेरिकी नौसेना के साथ विभिन्न ऑपरेशनों का हिस्सा था और वहाँ से इसे मध्य पूर्व की ओर पुनः तैनात करने का आदेश मिला। अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, इस तैनाती का मुख्य उद्देश्य ईरान पर बढ़ते दबाव को और तेज़ करना और संयुक्त राज्य की सैन्य क्षमताओं को पर्सियन खाड़ी में बढ़ाना है, जहाँ पहले से ही अन्य युद्धपोत और लड़ाकू विमान तैनात हैं।
यह विमानवाहक पोत न केवल विशाल आकार (लगभग 100,000 टन विस्थापन) का है, बल्कि यह परमाणु शक्ति से संचालित है और इसमें लगभग 75 विमान और हेलीकॉप्टर सहित अत्याधुनिक युद्धक क्षमता है। इसके साथ उसके यूएस नेवी के एस्कॉर्ट जहाजों और विध्वंसक साथियों की फौज भी जाएगी, जिससे अमेरिकी नौसेना को क्षेत्र में पूरी तरह से तैयार लड़ाकू स्थिति प्राप्त होगी।
यह निर्णय ऐसे समय में आया है जब अमेरिका और ईरान के बीच परमाणु समझौते को लेकर बातचीत जारी है और दोनों पक्षों ने अप्रत्यक्ष वार्ता की कोशिशें की हैं। अमेरिकी प्रशासन — विशेषकर राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप — ने साफ़ संकेत दिए हैं कि यदि ईरान किसी समझौते पर नहीं आता, तो उसके लिए “कड़ी कीमत” चुकानी पड़ सकती है, और इसी रणनीतिक दबाव को मजबूत करने के लिए जेराल्ड आर. फोर्ड की तैनाती की जा रही है।
विश्लेषकों का मानना है कि इस तरह का बड़ा विमानवाहक पोत मध्य पूर्व में भेजने का निर्णय न केवल सामरिक स्थिति को प्रभावित करेगा, बल्कि यह अमेरिका की क्षेत्रीय नीतियों और ईरान के साथ तनाव को और अधिक बढ़ा सकता है। इसके परिणामस्वरूप क्षेत्रीय देशों की नीतियाँ भी प्रभावित हो सकती हैं, और संभावित संघर्ष की आशंका को देखते हुए वैश्विक स्तर पर राजनीतिक एवं आर्थिक कंपनियों में भी हलचल बनी हुई है।
