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यूपी में 2,901 करोड़ रुपये का बड़ा औद्योगिक निवेश, 8 शहरों में लगेंगी नई फैक्ट्रियां; जानिए कहां क्या बनेगा

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उत्तर प्रदेश में औद्योगिक विकास को रफ्तार देने के लिए योगी सरकार ने 8 मेगा औद्योगिक इकाइयों को आगे बढ़ाने की मंजूरी दी है। इन परियोजनाओं के जरिए प्रदेश के अलग-अलग जिलों में कुल करीब 2,901 करोड़ रुपये के निवेश का प्रस्ताव है। गौतम बुद्ध नगर, हमीरपुर, हाथरस, बाराबंकी, लखीमपुर खीरी, मथुरा और उन्नाव में प्रस्तावित इन इकाइयों में खाद्य पदार्थों, पेय पदार्थों, पैकेजिंग सामग्री, मशीन पार्ट्स, कृषि रसायन, एथेनॉल और बीयर जैसे अलग-अलग क्षेत्रों में उत्पादन किया जाएगा। सरकार ने संबंधित कंपनियों को लेटर ऑफ कम्फर्ट जारी करने को मंजूरी दी है, जिससे इन परियोजनाओं के जमीन पर उतरने का रास्ता आगे बढ़ा है।

इस पूरे निवेश की खास बात यह है कि इसका असर केवल बड़े औद्योगिक शहरों तक सीमित नहीं रहेगा। गौतम बुद्ध नगर जैसे पहले से विकसित औद्योगिक क्षेत्र के साथ हमीरपुर, हाथरस, बाराबंकी, लखीमपुर खीरी, मथुरा और उन्नाव जैसे जिलों को भी नए निवेश का लाभ मिलने की उम्मीद है। सरकार का मानना है कि नई औद्योगिक इकाइयों के स्थापित होने से स्थानीय स्तर पर प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर बढ़ेंगे। इसके अलावा इन फैक्ट्रियों के आसपास परिवहन, लॉजिस्टिक्स, पैकेजिंग, कच्चे माल की आपूर्ति और दूसरी सहायक सेवाओं से जुड़े कारोबार को भी बढ़ावा मिल सकता है।

गौतम बुद्ध नगर में सबसे बड़ा प्रस्तावित निवेश सूर्या ग्लोबल सुपर फ्लैक्सीफिल्म्स प्राइवेट लिमिटेड की ओर से है। कंपनी यहां करीब 605.37 करोड़ रुपये का निवेश करने की योजना लेकर आई है। यह इकाई फ्लेक्सिबल पैकेजिंग के लिए इस्तेमाल होने वाली BOPP, BOPET और BOPE जैसी फिल्मों के उत्पादन से जुड़ी होगी। इन सामग्रियों का इस्तेमाल बिस्कुट, स्नैक्स, खाद्य पदार्थों, दवाइयों और विभिन्न औद्योगिक उत्पादों की पैकेजिंग में किया जाता है। ऐसे में इस परियोजना से केवल उत्पादन क्षमता ही नहीं बढ़ेगी, बल्कि पैकेजिंग से जुड़े उद्योगों की सप्लाई चेन को भी मजबूती मिलने की संभावना है।

हमीरपुर में शाल्विस स्पेशियलिटीज लिमिटेड करीब 297.30 करोड़ रुपये का निवेश प्रस्तावित कर रही है। कंपनी कृषि क्षेत्र में इस्तेमाल होने वाले कीटनाशक, फफूंदनाशक, खरपतवारनाशक और विशेष रसायनों से जुड़ी है। हमीरपुर में ऐसी औद्योगिक इकाई लगने से बुंदेलखंड क्षेत्र में कृषि-रसायन उत्पादन का आधार मजबूत हो सकता है। स्थानीय स्तर पर औद्योगिक गतिविधियां बढ़ने के साथ रोजगार और संबंधित व्यवसायों के लिए भी नए अवसर बनने की उम्मीद है।

हाथरस को भी इस औद्योगिक विस्तार में महत्वपूर्ण हिस्सा मिला है। यहां साउंड कास्टिंग्स प्राइवेट लिमिटेड करीब 225 करोड़ रुपये का निवेश करने जा रही है। कंपनी सटीक मशीनयुक्त फेरस कास्टिंग तैयार करती है, जिनका इस्तेमाल इंजन, गियरबॉक्स, ट्रांसमिशन, एक्सल, चेसिस, ब्रेक, पंप और हाइड्रोलिक सिस्टम जैसे क्षेत्रों में होता है। इसके अलावा हाथरस में पसवारा पेपर्स लिमिटेड की ओर से करीब 315 करोड़ रुपये के निवेश का प्रस्ताव है। यह कंपनी पैकेजिंग बॉक्स, कार्टन और पेपर बैग के लिए जरूरी क्राफ्ट पेपर, टेस्ट लाइनर, फ्लूटिंग पेपर और क्राफ्ट बोर्ड जैसे उत्पादों से जुड़ी है। यानी हाथरस में एक तरफ इंजीनियरिंग से जुड़ी मैन्युफैक्चरिंग बढ़ेगी, तो दूसरी ओर पेपर और पैकेजिंग उद्योग को भी विस्तार मिलेगा।

बाराबंकी में वृंदावन बॉटलर्स प्राइवेट लिमिटेड करीब 436.12 करोड़ रुपये का निवेश प्रस्ताव लेकर आई है। कंपनी कार्बोनेटेड पेय और जूस की बॉटलिंग तथा वितरण के क्षेत्र में काम करती है और पैकेज्ड ड्रिंकिंग वॉटर की को-पैकिंग से भी जुड़ी है। इस इकाई के आने से बाराबंकी में पेय पदार्थों की बॉटलिंग और पैकेजिंग से संबंधित औद्योगिक गतिविधियां बढ़ सकती हैं। साथ ही कच्चे माल की सप्लाई, परिवहन, वेयरहाउसिंग और वितरण नेटवर्क से जुड़े स्थानीय कारोबार को भी इसका फायदा मिलने की संभावना है।

लखीमपुर खीरी में जुआरी एनविएन बायोएनर्जी प्राइवेट लिमिटेड करीब 294.72 करोड़ रुपये का निवेश करेगी। यहां अनाज आधारित एथेनॉल परियोजना विकसित करने की योजना है। प्रस्तावित परियोजना में 180 KLPD क्षमता का एथेनॉल संयंत्र, DDGS और कार्बन डाइऑक्साइड उत्पादन शामिल है। एथेनॉल क्षेत्र में निवेश बढ़ने का संबंध देश की ऊर्जा जरूरतों और पेट्रोल में एथेनॉल मिश्रण की नीति से भी जुड़ता है। अनाज आधारित एथेनॉल संयंत्र स्थापित होने से कृषि उत्पादों की औद्योगिक मांग बढ़ने और स्थानीय स्तर पर एक नई वैल्यू चेन विकसित होने की संभावना है।

मथुरा में सीआरडी फूड्स एंड बेवरेजेज लिमिटेड करीब 363.94 करोड़ रुपये का निवेश करने जा रही है। कंपनी जूस, स्नैक्स, रेडी-टू-ईट उत्पाद, कार्बोनेटेड ड्रिंक्स और अन्य खाद्य पदार्थों से जुड़ी है। प्रस्तावित इकाई में गैर-अल्कोहलिक पेय, पानी और कार्बोनेटेड ड्रिंक्स की बॉटलिंग भी शामिल है। मथुरा जैसे धार्मिक और पर्यटन की दृष्टि से महत्वपूर्ण क्षेत्र में खाद्य एवं पेय उद्योग के विस्तार से स्थानीय बाजार के साथ-साथ आसपास के जिलों में भी सप्लाई और वितरण गतिविधियों को बढ़ावा मिल सकता है।

उन्नाव में माउंट एवरेस्ट ब्रुअरीज लिमिटेड करीब 363.52 करोड़ रुपये का निवेश प्रस्तावित कर रही है। कंपनी बीयर उत्पादन के क्षेत्र में काम करती है और उसके पोर्टफोलियो में कई ब्रांड शामिल हैं। इस परियोजना से उन्नाव में पेय उद्योग से जुड़ी उत्पादन क्षमता बढ़ने की उम्मीद है। चूंकि यह क्षेत्र खाद्य एवं पेय उद्योग की बड़ी श्रेणी का हिस्सा है, इसलिए इसके साथ पैकेजिंग, बोतल, परिवहन, वेयरहाउसिंग और वितरण जैसी सहायक गतिविधियों में भी आर्थिक अवसर पैदा हो सकते हैं।

सरकार ने इन परियोजनाओं को उत्तर प्रदेश औद्योगिक निवेश एवं रोजगार प्रोत्साहन नीति के तहत आगे बढ़ाने का फैसला किया है। पात्रता के आधार पर निवेशकों को नेट स्टेट GST और पूंजीगत सब्सिडी जैसे नीति आधारित प्रोत्साहन दिए जा सकते हैं। इसका उद्देश्य बड़े निवेशकों को प्रदेश में उत्पादन इकाइयां लगाने के लिए आकर्षित करना और राज्य में कारोबारी माहौल को अधिक प्रतिस्पर्धी बनाना है।

इन परियोजनाओं का महत्व केवल 2,901 करोड़ रुपये के निवेश तक सीमित नहीं है। यदि प्रस्तावित इकाइयां निर्धारित समय के अनुसार जमीन पर उतरती हैं और उत्पादन शुरू करती हैं, तो इनसे संबंधित जिलों में औद्योगिक इकोसिस्टम विकसित होने की संभावना है। बड़ी फैक्ट्री के साथ स्थानीय स्तर पर छोटी और मध्यम इकाइयों के लिए भी काम के अवसर पैदा होते हैं। कच्चे माल की आपूर्ति, मशीनरी की मरम्मत, परिवहन, पैकेजिंग, श्रमिक सेवाएं, सुरक्षा, लॉजिस्टिक्स और अन्य सहायक क्षेत्रों में मांग बढ़ सकती है। इससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को व्यापक स्तर पर फायदा पहुंच सकता है।

उत्तर प्रदेश के लिए यह निवेश इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि राज्य में औद्योगिक विकास को कुछ चुनिंदा क्षेत्रों से आगे ले जाने की कोशिश लगातार की जा रही है। नोएडा और गौतम बुद्ध नगर पहले से ही बड़े औद्योगिक एवं कॉरपोरेट केंद्र हैं, लेकिन नए निवेश को दूसरे जिलों तक पहुंचाने से क्षेत्रीय आर्थिक असमानता कम करने में मदद मिल सकती है। विशेष रूप से बुंदेलखंड और तराई क्षेत्र के जिलों में नई औद्योगिक परियोजनाएं स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के नए रास्ते खोल सकती हैं।

कुल मिलाकर, उत्तर प्रदेश में मंजूर की गई ये 8 मेगा औद्योगिक परियोजनाएं राज्य के अलग-अलग हिस्सों में निवेश का दायरा बढ़ाने वाली हैं। करीब 2,901 करोड़ रुपये के प्रस्तावित निवेश में पैकेजिंग फिल्म से लेकर मशीन पार्ट्स, कृषि रसायन, पेय पदार्थ, पेपर, एथेनॉल, खाद्य उत्पाद और बीयर तक कई तरह के उद्योग शामिल हैं। सरकार को उम्मीद है कि इन इकाइयों से औद्योगिक उत्पादन बढ़ेगा और हजारों लोगों के लिए प्रत्यक्ष तथा अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर बनेंगे। अब असली चुनौती इन प्रस्तावों को समयबद्ध तरीके से जमीन पर उतारने, आवश्यक मंजूरियां पूरी करने और उत्पादन शुरू कराने की होगी।

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