देवभूमि उत्तराखंड में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व वाली राज्य सरकार ने अवैध कब्जों और सरकारी भूमि पर चल रहे अतिक्रमणों के खिलाफ सख्त बुलडोजर एक्शन जारी रखा है, जिससे लगभग 570 से अधिक अवैध ढांचों को ध्वस्त किया गया और 10,000 एकड़ से अधिक भूमि को अतिक्रमण मुक्त कराया गया है। यह अभियान इस बात का संकेत है कि प्रदेश सरकार भूमि संरक्षण और विधिक नियमों के लागूकरण में कोई ढिलाई नहीं बरत रही है।
सरकार का कहना है कि यह कार्रवाई किसी विशेष समुदाय या वर्ग के खिलाफ नहीं है, बल्कि सरकारी भूमि और सार्वजनिक संपत्ति की रक्षा के उद्देश्य से की जा रही है। मुख्यमंत्री धामी ने स्पष्ट किया है कि अवैध रूप से कब्जा की गई भूमि को वापस जनता और विकास के लिए उपलब्ध कराना सरकार का प्रमुख लक्ष्य है। सरकार के अनुसार, यह अभियान सिर्फ संरचनाएँ गिराने तक सीमित नहीं है, बल्कि भूमि को पर्यटन, आधारभूत ढांचे और रोजगार सृजन जैसे सार्वजनिक हित के कार्यों के लिए मुक्त करने पर केंद्रित है।
उधम सिंह नगर जिले के गदरपुर क्षेत्र में सरकारी बाग भूमि पर अवैध संरचनाओं को सुबह के समय प्रशासन के बुलडोजर से तोड़ा गया, जहां पहले नोटिस देने के बाद भी वैध कागजात नहीं प्रस्तुत किए गए। प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि कानूनी प्रक्रिया का पालन करते हुए कार्रवाई की गई। इसी तरह, देहरादून के हरिद्वार रोड क्षेत्र में भी अवैध संरचनाओं को हटाया गया।
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, इस अभियान के तहत अब तक प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों में 570 से अधिक संरचनाएँ हटाई जा चुकी हैं, जिनमें अवैध मकान, धार्मिक स्थल और अन्य अतिक्रमित ढांचे शामिल रहे हैं। सोमवार को भी कई अवैध मजारों और अन्य निर्माणों को जमींदोज किया गया, जिससे स्पष्ट संदेश गया है कि भू-माफिया और अवैध कब्जों को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
राज्य सरकार का दावा है कि अतिक्रमण मुक्त की गई भूमि का उपयोग भविष्य में पर्यटन विकास, सार्वजनिक सुविधाएं और युवाओं के लिए रोजगार सृजन परियोजनाओं के लिए किया जाएगा, जिससे आर्थिक और सामाजिक दोनों क्षेत्रों में लाभ होगा। सरकार की यह पहल प्राकृतिक सुंदरता और भूमि की पवित्रता को संरक्षित करने की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।
मुख्यमंत्री धामी ने बार-बार इस बात पर जोर दिया है कि धर्म, संस्कृति और देवभूमि की पहचान की रक्षा सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है और कानून के समक्ष सभी बराबर हैं। इस अभियान को जारी रखते हुए, प्रशासन भविष्य में भी अवैध कब्जों के खिलाफ कार्रवाई तेज करेगा और यह सुनिश्चित करेगा कि सरकार की भूमि किसी भी अन्याय या अवैध कब्जे से मुक्त रहे।
इस व्यापक अभियान के चलते कुछ स्थानों पर स्थानीय विरोध और विवाद भी देखने को मिले हैं, लेकिन सरकार का दावा है कि यह सब विधिक प्रक्रिया, नोटिस और न्यायिक अनुमोदन के तहत किया जा रहा है, ताकि कानून का शासन प्रभावी रूप से बरकरार रहे।
