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टीवीके प्रमुख विजय की करुर रैली में भगदड़ — अस्पताल में भर्ती और मौत की आशंका

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तमिलनाडु के करुर जिले में हुई एक राजनीतिक रैली मंगलवार को भयावह तबाही में बदल गई, जब टीवीके (TVK) पार्टी के प्रमुख अभिनेता विजय की सभा के दौरान भारी भीड़ में भगदड़ मच गई। इस घटना में कई लोग बेहोश हो गए और कई अस्पतालों में भर्ती हैं, वहीं लगभग 20 लोगों की मौत की भी आशंका जताई जा रही है।

रैली के समय का दृश्य अराजकता और अफरा-तफरी का था। अभिनेता विजय अपने भाषण के बीच में ही रुक गए और थकावट या घुटन महसूस करने वालों को पानी की बोतलें बांटी। उन्होंने भीड़ से विनती की कि वे एम्बुलेंस के लिए मार्ग साफ रखें। भीड़ बढ़ने और नियंत्रण खोने की स्थिति को देखते हुए पुलिस को लाठीचार्ज करना पड़ा।

भाज्ञता यह कि इस भगदड़ में 9 वर्ष की एक बच्ची भी लापता हो गई, जिसे खोजने के लिए विजय ने स्वयं और कार्यकर्ताओं को मदद के लिए कहा। घटना की गंभीरता पर मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन ने तुरंत संज्ञान लिया और स्वास्थ्य विभाग, जिला प्रशासन एवं पुलिस को घटना स्थल पर कड़ी कार्रवाई करने, घायलों को तुरंत चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराने और संपूर्ण जांच सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि पड़ोसी तिरुचिरापल्ली जिले के मंत्री अंबिल महेश को भी संसाधन उपलब्ध कराने का आदेश दिया गया है।

रैली के दौरान, विजय ने DMK सरकार की भी आलोचना की और आरोप लगाया कि पूर्व में करुर में हवाई अड्डा बनाने का वादा किया गया था, लेकिन वह अमल में नहीं आया। इसके अतिरिक्त, उन्होंने यह दावा किया कि आने वाले छह महीनों में तमिलनाडु की सत्ता बदल सकती है और इस रैली को विधानसभा चुनाव 2026 की तैयारियों का हिस्सा बताया गया।

अदालत और राजनीतिक हलकों में इस घटना ने तुरंत हलचल मचा दी है। राज्य सरकार और प्रशासन पर सवाल उठे हैं कि इतनी बड़ी रैली में सुरक्षा बंदोबस्त क्यों पर्याप्त नहीं थे। विपक्षी दलों और नागरिक समाज ने आयोजकों और राज्य सरकार की जवाबदेही तलब की है।

इस घटना की जांच की जाएगी कि भीड़ नियंत्रित नहीं हो पाने के कारण कौन-से चूक हुईं — स्थल का चयन, मार्ग नियोजन, चिकित्सा तत्त्‍वों की उपलब्धता, एवं पुलिस की तैयारी। मौत की पुष्टि एवं मृतकों की संख्या, घायल व्यक्तियों की पहचान और उनके इलाज की स्थिति सार्वजनिक रूप से सामने आने की प्रतीक्षा है।

सम्भावित आगे का परिदृश्य: यदि जांच में कोई लापरवाही पाई जाती है, तो राजनीतिज्ञों, आयोजकों और प्रशासन पर दमनात्मक कार्रवाई हो सकती है। इसके साथ ही तमिलनाडु की राजनीति में सुरक्षा और जनसभाओं के ढाँचे पर बहस भी तेज हो सकती है। जनता और मीडिया दोनों यह पूछेंगे — ऐसी बड़ी रैलियों में जीव रक्षा कैसे सुनिश्चित हो सकती है?

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