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पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु चुनाव 2026: पहले चरण की वोटिंग शुरू, शुरुआती घंटों में उत्साह लेकिन हिंसा और तकनीकी दिक्कतें भी सामने

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पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु विधानसभा चुनाव 2026 के तहत आज लोकतंत्र का बड़ा दिन देखा जा रहा है, जहां दोनों राज्यों में मतदान की प्रक्रिया सुबह 7 बजे से कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच शुरू हुई। पश्चिम बंगाल में पहले चरण के तहत 152 सीटों पर वोट डाले जा रहे हैं, जबकि तमिलनाडु में सभी 234 सीटों पर एक ही चरण में मतदान हो रहा है। शुरुआती आंकड़ों के अनुसार सुबह 9 बजे तक पश्चिम बंगाल में लगभग 18.7 से 18.8 प्रतिशत और तमिलनाडु में करीब 17.6 से 17.7 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया, जो मतदाताओं के उत्साह को दर्शाता है।

इस चुनाव को बेहद अहम माना जा रहा है क्योंकि पश्चिम बंगाल में सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस और भाजपा के बीच सीधा मुकाबला है, जबकि तमिलनाडु में डीएमके, एआईएडीएमके और अभिनेता विजय की पार्टी के बीच त्रिकोणीय संघर्ष देखने को मिल रहा है। बंगाल में करीब 3.6 करोड़ मतदाता पहले चरण में अपने मताधिकार का प्रयोग कर रहे हैं, जो राज्य की राजनीति की दिशा तय करेंगे।

हालांकि मतदान के दौरान कुछ जगहों पर बाधाएं भी सामने आई हैं। पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद जिले में बम हमले की घटना में कई लोग घायल हो गए, जिससे सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठे हैं। इसके अलावा कुछ मतदान केंद्रों पर ईवीएम में तकनीकी खराबी की शिकायतें भी मिलीं, जिससे मतदान प्रक्रिया प्रभावित हुई। इसके बावजूद प्रशासन का दावा है कि स्थिति नियंत्रण में है और मतदान शांतिपूर्ण तरीके से आगे बढ़ रहा है।

तमिलनाडु में भी मतदान को लेकर काफी उत्साह देखा गया, जहां मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन समेत कई बड़े नेताओं और फिल्मी हस्तियों ने वोट डालकर लोगों से लोकतांत्रिक प्रक्रिया में भाग लेने की अपील की। राज्य में 5.7 करोड़ से अधिक मतदाता इस बार चुनावी मैदान में हैं, जिनमें बड़ी संख्या में पहली बार वोट देने वाले युवा भी शामिल हैं।

इन चुनावों को दोनों राज्यों के लिए सत्ता की बड़ी परीक्षा माना जा रहा है। पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी अपनी पकड़ बनाए रखने की कोशिश में हैं, जबकि विपक्ष उन्हें कड़ी चुनौती दे रहा है। वहीं तमिलनाडु में स्टालिन के नेतृत्व वाली सरकार के सामने सत्ता बचाने की चुनौती है और विपक्षी दल सत्ता में वापसी की कोशिश कर रहे हैं।

कुल मिलाकर, शुरुआती मतदान प्रतिशत और जनता की भागीदारी से यह साफ संकेत मिल रहा है कि दोनों राज्यों में मुकाबला कड़ा है और आने वाले नतीजे भारतीय राजनीति की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएंगे।

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