
“जो उर्दू बोलना चाहते हैं, वहां चले जाएं”: Yogi Adityanath का बंगाल में बड़ा बयान
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के बीच राजनीतिक बयानबाजी तेज होती जा रही है। इसी कड़ी में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री Yogi Adityanath ने बंगाल की एक चुनावी रैली में ऐसा बयान दिया, जिसने सियासी माहौल को और गर्म कर दिया है। नंदकुमार विधानसभा क्षेत्र में प्रचार के दौरान उन्होंने सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस (TMC) पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि “जो लोग कहते हैं कि बंगाल में उर्दू बोली जाएगी, उनसे कह दो कि वे वहां चले जाएं जहां उर्दू बोली जाती है, क्योंकि बंगाल में सिर्फ बांग्ला ही बोली जाएगी।”
अपने भाषण में Yogi Adityanath ने आरोप लगाया कि TMC बंगाल की भाषा और पहचान को कमजोर करने की साजिश कर रही है। उन्होंने कहा कि यह केवल भाषा का मुद्दा नहीं, बल्कि बंगाल की संस्कृति और अस्मिता से जुड़ा सवाल है। उनके मुताबिक, बांग्ला भाषा बंगाल की पहचान है और इसे खत्म करने की किसी भी कोशिश को सफल नहीं होने दिया जाएगा।
यह बयान ऐसे समय में आया है जब राज्य में चुनावी मुकाबला अपने चरम पर है। पश्चिम बंगाल में 23 और 29 अप्रैल को मतदान होना है, और सभी प्रमुख पार्टियां पूरे दमखम के साथ चुनाव प्रचार में जुटी हुई हैं। बीजेपी की ओर से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह और अब योगी आदित्यनाथ जैसे बड़े नेता लगातार रैलियां कर रहे हैं, जिससे चुनावी लड़ाई और भी दिलचस्प होती जा रही है।
रैली के दौरान बड़ी संख्या में लोगों की मौजूदगी देखने को मिली, खासकर हिंदी भाषी मतदाताओं में योगी आदित्यनाथ की लोकप्रियता नजर आई। उन्होंने अपने संबोधन में राज्य सरकार पर तुष्टिकरण की राजनीति करने का आरोप भी लगाया और कहा कि यह नीति राज्य के विकास में बाधा बन रही है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस तरह के बयान चुनावी रणनीति का हिस्सा होते हैं, जहां भाषा, पहचान और सांस्कृतिक मुद्दों को केंद्र में लाकर मतदाताओं को प्रभावित करने की कोशिश की जाती है। वहीं, विपक्षी दल इस बयान को विवादित बताते हुए बीजेपी पर समाज को बांटने की राजनीति करने का आरोप लगा सकते हैं।
कुल मिलाकर, Yogi Adityanath का यह बयान पश्चिम बंगाल चुनाव में एक नया विवाद खड़ा कर चुका है। आने वाले दिनों में यह मुद्दा और ज्यादा तूल पकड़ सकता है, जिससे चुनावी मुकाबला और तीखा होने की संभावना है।

