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टीएमसी सांसद यूसुफ पठान ने की बीजेपी की तारीफ, बंगाल चुनाव के बीच विपक्षी राजनीति में मची हलचल

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पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के बीच तृणमूल कांग्रेस (TMC) के सांसद और पूर्व क्रिकेटर यूसुफ पठान का एक बयान सियासी गलियारों में चर्चा का बड़ा विषय बन गया है। गुजरात में स्थानीय निकाय चुनाव के दौरान मतदान करने पहुंचे पठान ने भारतीय जनता पार्टी (BJP) की खुलकर तारीफ करते हुए कहा कि गुजरात में बीजेपी की पकड़ इतनी मजबूत है कि आने वाले 40 से 50 वर्षों तक उसे सत्ता से हटाना मुश्किल होगा।

पठान का यह बयान ऐसे समय में आया है जब पश्चिम बंगाल में टीएमसी और बीजेपी के बीच सीधी टक्कर मानी जा रही है। एक तरफ जहां टीएमसी भाजपा पर लगातार हमलावर है, वहीं उसी पार्टी के सांसद का विपक्षी दल की प्रशंसा करना राजनीतिक रूप से असहज स्थिति पैदा कर रहा है। इस बयान को बीजेपी ने भी तुरंत लपक लिया और इसे टीएमसी के लिए “हिट विकेट” जैसा बताया, जिससे चुनावी माहौल और गरमा गया।

यूसुफ पठान ने अपने बयान में यह भी कहा कि किसी भी राज्य में वही पार्टी लंबे समय तक टिकती है जो जनता के बीच काम करती है और विकास के आधार पर भरोसा जीतती है। उन्होंने गुजरात में बीजेपी की लोकप्रियता का कारण विकास और जनसमर्थन बताया। साथ ही उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि पश्चिम बंगाल में टीएमसी को जनता का समर्थन मिलता है, इसलिए वहां उनकी पार्टी मजबूत स्थिति में है।

राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक, पठान का यह बयान केवल एक व्यक्तिगत राय नहीं बल्कि एक बड़ा संकेत भी माना जा रहा है कि विपक्षी दलों के भीतर भी बीजेपी की मजबूत पकड़ को लेकर एक तरह की स्वीकार्यता बन रही है। दिलचस्प बात यह है कि इससे पहले भी कई विपक्षी नेताओं जैसे नीतीश कुमार और चंद्रबाबू नायडू द्वारा अलग-अलग मौकों पर बीजेपी या उसके नेतृत्व की तारीफ की जा चुकी है, लेकिन चुनावी माहौल के बीच इस तरह का बयान ज्यादा असर डालता है।

इस बयान ने टीएमसी के अंदर भी असहजता पैदा कर दी है, क्योंकि पार्टी की रणनीति पूरी तरह बीजेपी के खिलाफ आक्रामक रुख पर आधारित है। ऐसे में अपने ही सांसद का विरोधी दल के पक्ष में बयान देना विपक्ष की एकजुटता पर सवाल खड़े करता है।

कुल मिलाकर, यूसुफ पठान की टिप्पणी ने बंगाल चुनाव के बीच राजनीतिक बहस को नया मोड़ दे दिया है। यह बयान आने वाले दिनों में चुनावी रणनीति, प्रचार और मतदाताओं की धारणा पर असर डाल सकता है, क्योंकि यह केवल एक नेता की राय नहीं बल्कि व्यापक राजनीतिक संकेत के रूप में देखा जा रहा है।

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