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यूसुफ पठान ने गुजरात हाईकोर्ट से वापस ली अपील, वडोदरा की 978 वर्गमीटर जमीन का क्या है पूरा विवाद?

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पूर्व भारतीय क्रिकेटर और सांसद यूसुफ पठान ने वडोदरा की जमीन से जुड़े मामले में गुजरात हाईकोर्ट में दाखिल अपनी अपील वापस ले ली है। यह अपील सिंगल जज के उस आदेश के खिलाफ थी, जिसमें वडोदरा नगर निगम की जमीन पर उनके कब्जे को अतिक्रमण माना गया था। 31 अगस्त को सुनवाई के दौरान पठान की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता शालिन मेहता ने डिवीजन बेंच को बताया कि उनके मुवक्किल अब मामले को अदालत के बाहर संबंधित सरकारी और नगर निगम स्तर पर आगे बढ़ाना चाहते हैं। इसके बाद मुख्य न्यायाधीश सुनीता अग्रवाल और जस्टिस डीएन रे की बेंच ने याचिका को वापस लिया हुआ मानते हुए खारिज कर दिया। 

पूरा विवाद वडोदरा के तांदलजा इलाके में स्थित 978 वर्गमीटर के एक प्लॉट से जुड़ा है। यह जमीन वडोदरा नगर निगम की है और यूसुफ पठान के परिवार के घर के पास स्थित है। पठान ने वर्ष 2012 में इस जमीन को 99 साल की लीज पर बिना सार्वजनिक नीलामी के आवंटित करने का अनुरोध किया था। इसके पीछे उन्होंने अपने और अपने भाई एवं पूर्व क्रिकेटर इरफान पठान के सार्वजनिक प्रोफाइल के कारण सुरक्षा संबंधी चिंताओं का हवाला दिया था।

शुरुआत में वडोदरा नगर निगम की स्टैंडिंग कमेटी और जनरल बोर्ड ने जमीन आवंटित करने के प्रस्ताव को मंजूरी दी थी। जमीन की कीमत करीब ₹57,270 प्रति वर्गमीटर तय की गई थी, जिसके हिसाब से पूरे प्लॉट का प्रीमियम लगभग ₹5.6 करोड़ बैठता था। हालांकि, बिना सार्वजनिक नीलामी के जमीन देने के प्रस्ताव के लिए गुजरात सरकार के शहरी विकास विभाग की मंजूरी जरूरी थी। राज्य सरकार ने बाद में इस प्रस्ताव को मंजूरी नहीं दी।

इसके बाद मामला और गंभीर हो गया। वडोदरा नगर निगम का आरोप था कि आवंटन की प्रक्रिया पूरी नहीं होने के बावजूद प्लॉट पर बाउंड्री वॉल बनाकर कब्जा कर लिया गया। नगर निगम ने जून 2024 में जमीन खाली करने को लेकर नोटिस भी जारी किया। पठान ने इस कार्रवाई को गुजरात हाईकोर्ट में चुनौती दी थी।

गुजरात हाईकोर्ट के सिंगल जज ने अगस्त 2025 में राज्य सरकार के जमीन आवंटन से इनकार के फैसले को बरकरार रखा था। अदालत ने कहा था कि जब जमीन का औपचारिक आवंटन ही नहीं हुआ था और उसके लिए कोई वैध आवंटन आदेश या दस्तावेज मौजूद नहीं था, तो लंबे समय तक कब्जे में रहने से जमीन पर कानूनी अधिकार पैदा नहीं हो जाता। अदालत ने इसी आधार पर कब्जे को अतिक्रमण माना था।

यूसुफ पठान ने इस आदेश को डिवीजन बेंच में चुनौती दी थी। उनका पक्ष था कि राज्य सरकार की ऐसी नीति या सर्कुलर मौजूद है, जिसके तहत अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश का प्रतिनिधित्व करने वाले क्रिकेटरों को जमीन आवंटित की जा सकती है। उनके वकील ने अदालत को बताया कि पठान इसी नीति के तहत अपना दावा आगे बढ़ा रहे हैं।

31 अगस्त की सुनवाई में पठान के वकील ने कहा कि उन्होंने वडोदरा नगर निगम से जवाब का इंतजार किया, लेकिन कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली। इसके बाद उन्होंने अपने मुवक्किल के निर्देश पर हाईकोर्ट की अपील वापस लेने का फैसला किया। अदालत ने इस अनुरोध को स्वीकार करते हुए मामले को ‘dismissed as withdrawn’ यानी याचिका वापस लिए जाने के आधार पर खारिज कर दिया।

याचिका वापस लेने का मतलब यह नहीं है कि जमीन अब यूसुफ पठान के नाम हो गई है। बल्कि अब इस विवाद का समाधान अदालत में इस अपील के जरिए नहीं, बल्कि प्रशासनिक या नगर निगम स्तर पर तलाशने की कोशिश की जा सकती है। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, पठान के सामने अब जमीन से जुड़े अपने दावे को संबंधित नीति के तहत आगे बढ़ाने या विवादित कब्जे को लेकर प्रशासनिक प्रक्रिया का सामना करने का रास्ता है।

इस पूरे मामले में एक अहम बात यह भी है कि विवादित जमीन का आवंटन कभी अंतिम रूप से पूरा नहीं हुआ था। नगर निगम का पक्ष रहा है कि पठान ने जमीन के लिए कोई भुगतान नहीं किया और आवंटन का वैध आदेश जारी होने से पहले ही कब्जा कर लिया गया। वहीं पठान का पक्ष इस जमीन को अंतरराष्ट्रीय क्रिकेटरों के लिए मौजूद सरकारी नीति के तहत पाने के दावे पर आधारित रहा है।

फिलहाल गुजरात हाईकोर्ट में यूसुफ पठान की अपील वापस हो चुकी है। अब नजर इस बात पर रहेगी कि वडोदरा नगर निगम और राज्य सरकार उनके जमीन आवंटन के दावे पर क्या फैसला लेते हैं। यानी अदालत की मौजूदा लड़ाई खत्म जरूर हुई है, लेकिन 978 वर्गमीटर जमीन का विवाद अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है।

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