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अमेरिकी रिपोर्ट में पाकिस्तान की खुली पोल, आतंक का अड्डा बताया; ट्रंप के करीबी बनने की कोशिश पर लगा झटका

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अमेरिका और पाकिस्तान के बीच हाल के समय में बढ़ती नजदीकियों के बीच एक बड़ी रिपोर्ट ने इस रिश्ते पर सवाल खड़े कर दिए हैं। अमेरिकी कांग्रेस द्वारा जारी ताज़ा रिपोर्ट में पाकिस्तान को आतंकवाद का बड़ा केंद्र बताते हुए गंभीर आरोप लगाए गए हैं, जिससे वहां की सरकार और सेना की भूमिका पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बहस तेज हो गई है। रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तान की जमीन पर इस समय कम से कम 14 बड़े आतंकी संगठन सक्रिय हैं, जिनमें हिजबुल मुजाहिदीन, जैश-ए-मोहम्मद, लश्कर-ए-तैयबा जैसे भारत विरोधी संगठनों के अलावा अल-कायदा और इस्लामिक स्टेट खुरासान (ISKP) जैसे वैश्विक आतंकी नेटवर्क भी शामिल हैं। यही नहीं, रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया है कि अकेले ISKP के करीब 4000 से 6000 आतंकवादी पाकिस्तान और अफगानिस्तान क्षेत्र में मौजूद हैं, जो वैश्विक सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा माने जा रहे हैं।

यह रिपोर्ट ऐसे समय आई है जब पाकिस्तान के प्रधानमंत्री Shehbaz Sharif और सेना प्रमुख Asim Munir, अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump के साथ अपने रिश्ते मजबूत करने की कोशिश में लगे हुए हैं। हाल के दिनों में पाकिस्तान ने अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे तनाव में मध्यस्थ की भूमिका निभाने की भी कोशिश की है, जिससे वह वैश्विक मंच पर अपनी छवि सुधारना चाहता है। लेकिन अमेरिकी कांग्रेस की इस रिपोर्ट ने इन कोशिशों को बड़ा झटका दिया है और यह संकेत दिया है कि वॉशिंगटन अब भी पाकिस्तान की नीतियों को लेकर पूरी तरह आश्वस्त नहीं है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह रिपोर्ट सिर्फ एक दस्तावेज नहीं बल्कि एक स्पष्ट संदेश है कि अमेरिका आतंकवाद के मुद्दे पर पाकिस्तान को लेकर सख्त रुख बनाए हुए है। हालांकि पाकिस्तान लंबे समय से इन आरोपों को नकारता रहा है और खुद को आतंकवाद का पीड़ित बताता है, लेकिन अंतरराष्ट्रीय रिपोर्ट्स और घटनाएं बार-बार इसके विपरीत संकेत देती रही हैं। इतिहास भी इस बात का गवाह रहा है कि कई आतंकी संगठनों ने पाकिस्तान की जमीन का इस्तेमाल सुरक्षित ठिकाने के रूप में किया है, जिससे उसकी वैश्विक छवि प्रभावित हुई है।

इस बीच, मौजूदा भू-राजनीतिक हालात—खासकर ईरान-इजरायल और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव—में पाकिस्तान की भूमिका और भी अहम हो गई है। एक तरफ वह मध्यस्थ बनकर अपनी साख बढ़ाने की कोशिश कर रहा है, तो दूसरी तरफ ऐसी रिपोर्ट्स उसकी विश्वसनीयता पर सवाल खड़े कर रही हैं। ऐसे में आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या पाकिस्तान अपनी छवि सुधार पाता है या फिर इस तरह के खुलासे उसके लिए कूटनीतिक मुश्किलें और बढ़ा देंगे।

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