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यूनुस सरकार अपनी नाकामी छिपाने के लिए ‘एंटी-इंडिया’ नैरेटिव अपना रही है

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बांग्लादेश की मुख्यमंत्री से हटकर interim सरकार के प्रमुख सलाहकार मोहम्मद यूनुस पर देश में बिगड़ी कानून-व्यवस्था, अल्पसंख्यकों के खिलाफ बढ़ते हमलों और राजनीतिक अस्थिरता के लिए आलोचना तेज हो गई है, और इसके बीच सरकार एंटी-इंडिया (भारत विरोधी) रुख को ढाल के रूप में इस्तेमाल कर रही है, जिससे दोनों देशों के बीच तनाव और बढ़ गया है।

राष्ट्रीय विपक्षी दल बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) ने यूनुस सरकार को जिम्मेदार ठहराते हुए कहा है कि सरकार अपनी विफलता को छिपाने के लिए भारत को दोषी साबित करने की कोशिश कर रही है। बीएनपी के महासचिव मिर्जा फखरुल इस्लाम आलमगीर ने कहा कि सत्ता संभालने के बाद से यूनुस शासन कानून-व्यवस्था को संभाल नहीं पा रहा है और चुनाव के लिए अनुकूल माहौल भी नहीं बना पा रहा है, इसलिए वह भारत की ओर रुख करके घरेलू राजनीति में अपना आधार मजबूत करने की कोशिश कर रहा है।

विश्लेषकों के अनुसार, भारत-बांग्लादेश के पारंपरिक मजबूत रिश्तों में यूनुस के शासनकाल में गिरावट आई है। यूनुस ने विदेश नीति में बदलाव करते हुए भारत के साथ ऐतिहासिक संबंधों की कीमत चुकाई है और पाकिस्तान के साथ नजदीकी बढ़ाई है, जिससे दोनों पड़ोसी देशों के बीच न केवल तना⁇व की स्थिति है, बल्कि रणनीतिक मोर्चे पर पहले से जटिल स्थिति उत्पन्न हो गई है।

एक और विवाद यह है कि यूनुस सरकार एंटी-इंडिया आतंकियों को रिहा करने और कुछ घटनाओं में भारत को दोषी ठहराने का आरोप लगा रही है, जबकि असल में कई मामलों में कोई ठोस सबूत सामने नहीं आए हैं। इसके अलावा, यूनुस की भारत-के-पूर्वोत्तर के बारे में की गई टिप्पणियों पर भारत ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है, क्योंकि ऐसा माना जाता है कि इससे भारत की क्षेत्रीय अखंडता पर प्रश्न उठते हैं।

इस बीच, ढाका-नई दिल्ली के बीच अधिकारियों के समन और विरोध प्रदर्शन दोनों बढ़ रहे हैं, और बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों के खिलाफ बढ़ते हिंसा और कानून-व्यवस्था संकट से तानाबाना और जटिल हो गया है, जिससे क्षेत्रीय डिप्लोमेसी और राजनीति पर भी असर पड़ा है।


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