
अमेरिकी रक्षा विभाग यानी पेंटागन की ताज़ा रिपोर्ट में एक बड़े अंतरराष्ट्रीय राजनैतिक और सुरक्षा संबंधी खुलासे ने दक्षिण एशिया में असंतुलन पैदा कर दिया है। रिपोर्ट के मुताबिक 2025 में भारत-पाकिस्तान के बीच चले ऑपरेशन सिंदूर नामक सैन्य संघर्ष के दौरान केवल पाकिस्तान ही नहीं, बल्कि चीन ने भी पाकिस्तान को असाधारण समर्थन दिया। यह समर्थन न तो सीधे युद्ध के रूप में था और न ही चीन की फौज मैदान पर थी, बल्कि खुफिया (intelligence), साइबर गतिविधियों और कूटनीति (diplomacy) के जरिए पीछे से मदद प्रदान की गई।
पेंटागन रिपोर्ट में बताया गया है कि चीन ने पाकिस्तान को भारत की सैन्य गतिविधियों और रणनीतिक स्थिति पर लाइव डेटा और इलेक्ट्रॉनिक निगरानी जानकारी उपलब्ध कराई। इस प्रकार का समर्थन पाकिस्तान को वास्तविक समय में भारत-संबंधी कई महत्वपूर्ण वैक्टर्स की झलक देता रहा, जिससे उसकी सेना अपनी कार्रवाई बेहतर तरीके से संचालित कर सकी। इस तरह का सहयोग सीधे संघर्ष में लड़ते बिना पीछे से युद्ध की प्रकृति को बदलने वाला रहा — इसे ‘ग्रे-ज़ोन रणनीति’ कहा गया है।
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि चीन ने सूचना युद्ध (information warfare) के तहत सोशल मीडिया और अन्य डिजिटल प्लेटफॉर्मों में प्रचार-प्रसार की ऐसी गतिविधियाँ संचालित कीं, जिनसे भारत के दावों को धुंधला करने और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पाकिस्तान की स्थिति को मजबूत दिखाने की कोशिश की गयी। इसके अलावा साइबर हमलों और कूटनीतिक चालों के ज़रिये विवाद को नियंत्रित करते हुए भारत पर राजनीतिक दबाव बनाने की कोशिश की गई।
यह पूरा घटनाक्रम इस बात का संकेत देता है कि चीन ने सीधे युद्ध में भाग नहीं लिया, लेकिन पाकिस्तान को अप्रत्यक्ष सहारा देकर भारत पर दबाव बनाने की रणनीति अपनाई। पेंटागन के मुताबिक चीन ने पाकिस्तान को ‘प्रेशर वॉल्व’ की तरह इस्तेमाल करते हुए यह सुनिश्चित किया कि भारत को अनेक मोर्चों पर कमजोर दिखाया जा सके, खासकर अमेरिकी रक्षा सहयोग की संभावनाओं पर असर डालने के लिये।
ऑपरेशन सिंदूर 7 से 10 मई 2025 तक चलने वाला चार दिवसीय सैन्य अभियान था, जिसे भारत ने जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकवादी हमले का प्रतिशोध मानते हुए लॉन्च किया था। इस ऑपरेशन में भारतीय वायुसेना और सेना ने पाकिस्तान के आतंकी ढांचों और रक्षा ढाँचों पर निशानेबाज़ी की थी और कई ठिकानों को तबाह किया था। संघर्ष के दौरान दोनों तरफ हवाई और मिसाइल हमले भी देखे गए।
भारत के आतंरिक सुरक्षा और रक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि पेंटागन की यह रिपोर्ट क्षेत्रीय सुरक्षा स्थिति को गंभीर रूप से प्रभावित कर सकती है। यह न केवल भारत-पाकिस्तान तनाव का मुद्दा है, बल्कि बड़े वैश्विक शक्ति समीकरणों और चीन-पाकिस्तान के संयुक्त रणनीतिक गठजोड़ को भी उजागर करता है। ऐसे में भारत सहित अन्य प्रमुख अंतरराष्ट्रीय शक्तियों को डायनामिक और बहुस्तरीय सुरक्षा योजना तैयार रखने की आवश्यकता है ताकि हाइब्रिड, तकनीकी और परोक्ष युद्ध के नए ढाँचों का सामना किया जा सके।
इस रिपोर्ट के बाद यह स्पष्ट होता है कि आधुनिक युद्ध सिर्फ भौतिक सीमा पर नहीं होते, बल्कि खुफिया, साइबर और कूटनीतिक स्तरों पर भी जारी रहते हैं, जहां पर प्रतिद्वंदी देशों का असर न केवल सामरिक बल्कि अंतरराष्ट्रीय राजनैतिक मंचों पर भी देखने को मिलता है।



