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योगी आदित्यनाथ का सख़्त संदेश

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उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में विधानसभा के शीतकालीन सत्र के चौथे और अंतिम दिन मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सख़्त बयान देते हुए प्रदेश की कानून-व्यवस्था, विकास और सामाजिक अनुशासन को लेकर तीखी टिप्पणियाँ कीं। उन्होंने कहा कि अब उत्तर प्रदेश “बेमारू राज्य” की सूची से बाहर निकल चुका है और अपराधियों तथा अवैध गतिविधियों में लिप्त लोगों को चेतावनी दी कि अगर वे सुधरते नहीं हैं तो “यमराज के दरवाज़े” किसी समय उनके लिए भी खुले हैं — यानि क़ानून अपना काम करेगा और उन तक सजा पहुँचेगी।

सीएम योगी ने सत्र में विपक्षी दलों द्वारा उठाये गए सवालों का जवाब देते हुए कहा कि प्रदेश में व्यापारियों पर किसी प्रकार का गुंडा टैक्स नहीं लिया जाता है और यदि कोई गुंडा सड़क पर किसी बेटी को छेड़ेगा तो उसे जल्द ही कड़ी कार्रवाई का सामना करना पड़ेगा। उन्होंने यह भी कहा कि पूर्व में जो लोग सरकारी योजनाओं की धनराशि की “लूट” करते थे, वह आज नहीं हो रही है और अवैध कब्ज़ों पर बुलडोज़र चलाकर मामला सुलझाया जा रहा है।

मुख्यमंत्री योगी ने सपा-जनता के पूर्व शासन का नाम बदलते हुए उसकी आलोचना करते हुए कहा कि बड़े बजट के प्रोजेक्ट या तो अधूरे रहे या अनावश्यक खर्च में डूब गए, जबकि उनकी सरकार ने पूर्वांचल एक्सप्रेसवे जैसे विशाल इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट को कम लागत और समय में पूरा किया। उन्होंने यह भी जोर देकर कहा कि उत्तर प्रदेश में न तो दंगे हैं और न कर्फ्यू लगने जैसा माहौल — सब कुछ नियंत्रण में है।

योगी आदित्यनाथ ने खासकर उन लोगों को चेताया जो माफिया, गुंडों और अवैध गतिविधियों से जुड़े हैं। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि अगर कोई “अनैतिक, अवैध गतिविधियों” में लिप्त व्यक्ति जनता की जमीन या सरकारी ज़मीन पर कब्ज़ा कर उस पर मॉल, अड्डा या किसी भी तरह की अवैध संरचना बनाता है, तो प्रशासन उसी प्रकार बुलडोज़र से कार्रवाई करेगा — और इसका कोई विरोध नहीं कर सकता।

इसके साथ ही सीएम ने विपक्ष पर कटाक्ष करते हुए कहा कि पिछले दौर में सत्ता के सामने झुकना और न्याय की मांग करने वाले लोगों को न्याय न दिला पाना विपक्ष की कमजोरी थी। उन्होंने दावा किया कि उनकी सरकार में चाहे वह किसी भी वर्ग की बेटी हो, हर नागरिक को न्याय मिलेगा — चाहे वह विपक्षी दल से जुड़ी हो या उनके अपने पक्ष की।

सत्र में योगी आदित्यनाथ ने राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर भी टिप्पणी की। उन्होंने बांग्लादेश में एक दलित हिंदू की हत्या का ज़िक्र करते हुए कहा कि ग़ाज़ा पट्टी के मुद्दे पर आंसू बहाने वाले लोग उन गंभीर घटनाओं पर चुप हैं, जो स्थानीय स्तर पर उत्पीड़न के रूप में सामने आती हैं। उनकी यह टिप्पणी राजनीतिक और सामाजिक बहस का विषय बनी हुई है।

इस प्रकार मुख्यमंत्री का यह बयान कानून-व्यवस्था की स्थिति, अपराध नियंत्रण, विपक्षी आलोचना और विकास कार्यों की तुलना को लेकर महत्वपूर्ण राजनीतिक संदेश भी माना जा रहा है। यूपी विधान पार्षद सत्र में दिए गए इस कठोर संकेत का असर आगामी राजनीति, सामाजिक संवाद और कानून-व्यवस्था के विषयों पर व्यापक रूप से परखने को मिलेगा।

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