
केंद्रीय राजनीति में इस हफ्ते कांग्रेस पार्टी के अंदर एक बड़ा विवाद उभरा है, जब वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह ने एक सोशल मीडिया पोस्ट के माध्यम से राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) और भारत के सत्ताधारी दल बीजेपी की संगठनात्मक ताकत की बात कही। यह पोस्ट पार्टी के 140वीं स्थापना दिवस के ठीक सामने सामने आया और उसने कांग्रेस के भीतर गहरी बहस को जन्म दिया।
दिग्विजय सिंह ने एक पुरानी तस्वीर साझा की, जिसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एक युवा कार्यकर्ता के रूप में दिखाई दे रहे हैं, और उन्होंने बीजेपी-RSS के संगठन की शक्ति का उदाहरण देते हुए कहा कि कैसे एक कम पदस्थ कार्यकर्ता भी बड़ी भूमिका तक पहुंच सकता है। इस बयान ने कांग्रेस के अंदर आलोचनाओं और समर्थन दोनों की तुकबंदी को जन्म दिया, और बीजेपी ने इसका राजनीतिक लाभ उठाते हुए इसके खिलाफ निशाना साधा।
इस बीच, कांग्रेस के वरिष्ठ सांसद शशि थरूर ने दिग्विजय सिंह के इस बयान के प्रति संयत और परिपक्व प्रतिक्रिया दी है। थरूर ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि वे अपने साथी दिग्विजय सिंह के समर्थन में हैं क्योंकि कांग्रेस संगठन को मजबूत और अनुशासित करना आवश्यक है, चाहे यह किसी भी वक्तव्य के कारण क्यों न हो। उन्होंने कहा कि दोनों नेता मित्र हैं और बातचीत स्वाभाविक है, लेकिन पार्टी की मजबूती और अनुशासन कोई विवाद नहीं है—यह कांग्रेस के हित में है।
थरूर ने यह भी स्पष्ट किया कि संगठन की मजबूती और अनुशासन से कोई इनकार नहीं कर सकता और पार्टी को इन तत्वों पर अधिक ध्यान देना चाहिए, खासकर ऐसे समय में जब देश की राजनीति और विपक्षी रणनीतियाँ बदल रही हैं। हालांकि उन्होंने सीधे तौर पर RSS-BJP के संगठनात्मक मॉडल की प्रशंसा नहीं की, लेकिन यह संकेत दिया कि हर राजनीतिक संस्था को अपने-अपने स्तर पर सीखने और मजबूती की चुनौतियों का सामना करना चाहिए।
कांग्रेस के अंदर इस मुद्दे पर मतभेद भी दिखाई दिए हैं। पार्टी के कुछ अन्य नेताओं ने दिग्विजय सिंह के बयान को खारिज करते हुए कहा कि RSS-BJP की संगठनात्मक संरचना से सीखने की बात बिल्कुल गलत है, और कांग्रेस हमेशा अपने मूल मूल्यों पर टिके रहने पर जोर देती है। इसके अलावा कुछ वरिष्ठ नेताओं ने RSS को गांधीवादी विचारों के खिलाफ बताया और जोर देकर कहा कि कांग्रेस को अपनी रणनीति तथा पहचान के अनुरूप ही राह चुननी चाहिए।
बीजेपी के प्रतिनिधियों ने इस विवाद का राजनीतिक लाभ उठाते हुए राहुल गांधी सहित कांग्रेस नेतृत्व पर हमला किया और पूछा कि क्या पार्टी नेतृत्व में इतने बड़े मतभेद मौजूद हैं कि वरिष्ठ नेता खुले तौर पर संगठन की मजबूती और अनुशासन पर सवाल उठा रहे हैं। इस ताज़ा विवाद ने कांग्रेस के भीतरी समीकरणों और नेतृत्व स्थिरता पर नए सवाल खड़े किए हैं।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस तरह के बयान और समर्थन पार्टी में गहराई से चली आ रही गठबंधन, नेतृत्व और संगठनात्मक मजबूती की समस्याओं को उजागर करते हैं। यह साफ संकेत है कि कांग्रेस को आगे के चुनाव और नीति निर्माण के लिए स्थिर नेतृत्व तथा बेहतर संगठन रणनीति पर ध्यान देना होगा, ताकि पार्टी की एकता और प्रभावशाली सार्वजनिक छवि बनी रहे।
इस बीच दिग्विजय सिंह ने अपने बयान पर स्पष्टीकरण भी दिया है कि उनका मूल उद्देश्य संगठन की मजबूती पर चर्चा करना था, न कि किसी अन्य पार्टी की विचारधारा को अपनाना। इस स्पष्टिकरण के बाद भी कांग्रेस के अंदर यह मुद्दा हल्का नहीं हुआ है और इसकी गूंज राजनीति के अगले चरण तक सुनाई दे सकती है।



