
कोलकाता/नई दिल्ली: आगामी पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 से पहले भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने अपनी चुनावी रणनीति को लेकर खंडित लेकिन निर्णायक रूप से नया प्लान तैयार किया है, जिससे मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और उनकी तृणमूल कांग्रेस (TMC) सरकार को चुनौती देने की कोशिश की जा रही है। पार्टी सूत्रों के अनुसार, इस बार बीजेपी ने टिकट वितरण और प्रचार मोर्चे पर कई परिवर्तनात्मक निर्णय लिए हैं, जो पिछले चुनावों से अलग हैं।
सबसे अहम बदलाव यह है कि बीजेपी इस बार सत्ता प्रतिद्वंद्विता को टॉलीवुड (बंगाली फ़िल्म और टीवी स्टार्स) के भरोसे नहीं चलाना चाहती। पार्टी ने फिल्मी और टीवी सितारों को टिकट देने की परंपरा को कम प्राथमिकता दी है, क्योंकि पार्टी नेतृत्व का मानना है कि इससे चुनाव में असल वोटबैंक प्रभाव नहीं पड़ रहा है। इसके बजाय पार्टी ने स्थानीय संगठन और जनसंपर्क को मज़बूत करने पर अधिक ध्यान दिया है।
बीजेपी का मानना है कि राज्य में बूथ-स्तर पर संगठित होना चुनावी जीत की बुनियाद है। इसके लिए पार्टी ने पश्चिम बंगाल के लगभग 71,000 बूथों पर कार्यकर्ता तैयार किए हैं और आगामी मतदाता सूची पुनरीक्षण (SIR) के बाद यह संख्या और बढ़ने की उम्मीद है। इस मजबूत संगठन के ज़रिये पार्टी चाहते हैं कि ग्रामीण और शहरी इलाकों में अपने वोटबैंक को प्रभावित किया जाए।
प्रधानमंत्री के नाम पर चुनावी मुहिम
बीजेपी ने निर्णय लिया है कि चुनाव प्रचार में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नाम और उनके विकास कार्यों को प्रमुख रूप से उठाया जाएगा। पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के अनुसार, पीएम मोदी की लोकप्रियता बंगाल में भी पार्टी की जनता से सीधी जुड़ाव को सशक्त कर सकती है। सूत्रों का कहना है कि मोदी जनवरी और फरवरी में मालदा और हावड़ा जैसे राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण जिलों में बड़ी रैलियाँ कर सकते हैं, जिससे जन समर्थन को और मजबूती मिले।
हिंसा पीड़ित कार्यकर्ताओं से संवाद
पार्टी ने यह भी निर्णय लिया है कि वे ऐसे कार्यकर्ताओं और उनके परिवारों से संपर्क स्थापित करेंगे, जो राजनीतिक हिंसा के कारण पिछले वर्षों में प्रभावित हुए हैं। केंद्रीय नेतृत्व का मानना है कि इन प्रभावित परिवारों का साथ पार्टी को लाभदायक सामाजिक समर्थन दे सकता है।
फुटबॉल क्लबों और युवाओं पर फोकस
बीजेपी ने पश्चिम बंगाल में फुटबॉल की लोकप्रियता को ध्यान में रखते हुए फ़ुटबॉल क्लब योजनाओं के माध्यम से युवाओं और खेल प्रेमियों को जोड़ने की रणनीति अपनाई है। पार्टी फुटबॉल टूर्नामेंटों में अपनी पैठ बनाने की कोशिश कर रही है ताकि युवाओं के बीच सकारात्मक संपर्क स्थापित किया जा सके।
मुस्लिम मतदाता हिस्सों में वैचारिक रणनीति
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार बीजेपी की रणनीति यह भी शामिल करती है कि जहां मुस्लिम मतदाता संख्या अधिक है, वहां पार्टी प्रत्यक्ष-प्रचार में भारी संसाधन नहीं लगाएगी बल्कि वह अन्य समुदायों और प्रवासी समूहों जैसे पूर्वांचली, बिहारी, मारवाड़ी समुदायों के संपर्कों पर कार्य करेगी ताकि एक व्यापक वोटबैंक तैयार किया जा सके।
चुनावी माहौल और प्रतिक्रिया
बीजेपी की यह रणनीति ऐसे समय में सामने आई है जब पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची पर विशेष गहन समीक्षा (SIR) चल रही है और तृणमूल कांग्रेस उसके खिलाफ विरोध कर रही है। ममता बनर्जी ने SIR को लेकर भाजपा और केंद्र सरकार पर आलोचना भी की है।
राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि इस बार बीजेपी की ब्लॉक-स्तरीय संगठनात्मक रणनीति, पीएम रैलियाँ और स्थानीय जनसंपर्क अभियान बंगाल की चुनावी राजनीति को और अधिक प्रतिस्पर्धी बना सकते हैं। वहीं टीएमसी अपनी स्थानीय परियोजनाओं और वोटर जुड़ाव अभियानों के ज़रिये विपक्षी प्रचारों का मुकाबला कर रही है। चुनावी मैदान में यह प्रतिध्वनि राजनीतिक गतिशीलता और मतदाता प्राथमिकताओं के लिहाज़ से निर्णायक भूमिका निभा सकती है।



