
ईरान में विरोध प्रदर्शन तेज़, इंटरनेट ब्लैकआउट के बीच रजा पहलवी की अपील
ईरान में विरोध प्रदर्शनों का दौर लगातार गहरा होता जा रहा है, जो अब देश भर में सैकड़ों शहरों और प्रांतों तक फैल चुका है। शुरुआत आर्थिक संकट, महंगाई और गिरती मुद्रा के खिलाफ हुई थी, लेकिन अब यह आंदोलन व्यापक राजनीतिक असंतोष और शासन के खिलाफ खुली चुनौती में बदल गया है। देश की जनता “खामेनेई को सत्ता से हटाओ” जैसे नारे लगा रही है, जबकि सरकारी सुरक्षा बलों ने संचार उपकरणों और इंटरनेट सेवाओं को लगभग पूरी तरह बंद कर दिया है—जिससे देश में डिजिटल ब्लैकआउट जैसी स्थिति बन गई है।
प्रदर्शन की उभार में निर्वासित ईरानी क्राउन प्रिंस रेजा पहलवी का बयान महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। उन्होंने देश में तेजी से फैल रहे विरोध के बीच जनता से सड़कों पर निकलने की अपील की है और कहा है कि “समय करीब आ चुका है” जब ईरानी लोगों को अपनी आज़ादी और भविष्य के लिए आवाज़ उठानी चाहिए। पहलवी ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय—विशेषकर अमेरिका और यूरोपीय नेताओं—से सरकार को जवाबदेह ठहराने और संचार बहाल करने में मदद करने का आग्रह भी किया है।
ईरानी अधिकारियों ने हालिया हिंसा और आगजनी की घटनाओं के लिए अमेरिका और इजरायल को “आतंकवादी एजेंट” बताकर दोषी ठहराया है, जबकि प्रदर्शनकारी सड़कों पर निजी और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुँचाते दिख रहे हैं। कई शहरों में विरोध स्वरूप बाजार बंद हैं, यूनिवर्सिटी कैंपस कब्जे में हैं, और नागरिकों के बीच भारी असंतोष है।
आर्थिक संकट के कारण जनता का गुस्सा दिनोंदिन बढ़ा है। गिरती मुद्रा और बढ़ती महंगाई ने रोज़मर्रा की जिंदगी को कठिन बना दिया है, जिससे पहले केवल आर्थिक मुद्दों पर केंद्रित प्रदर्शन अब राजनीतिक बदलाव और शासन प्रणाली के अंत तक पहुंचने की मांग में बदल गए हैं। इन प्रदर्शनों के दौरान अब तक दर्जनों लोगों की मौत और हजारों की गिरफ्तारी की सूचनाएँ सामने आ चुकी हैं।
वैश्विक राजनीति में भी इस ईरानी आंदोलन का असर दिख रहा है। पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान की सरकार को चेतावनी दी है कि यदि वह हिंसा के माध्यम से प्रदर्शनकारियों को कुचलता है तो उसके «गंभीर परिणाम» होंगे, जिससे ईरान-यूएस दोनों के बीच मौजूदा राजनीतिक तनाव और बढ़ गया है। ट्रंप ने संघर्ष के बीच में कहा कि वह ईरानियों के “बहादुर लोगों” के समर्थन में खड़े हैं और सरकार को अत्याधिक कार्रवाई न करने को कहा है।
प्रदर्शनों का यह सिलसिला पिछले दिसंबर अंत में तेहरान के ग्रांड बाजार से शुरू हुआ था और अब यह आंदोलन देश की लगभग सभी 31 प्रांतों में फैल चुका है, जहाँ लाखों लोग सड़कों पर उभरकर अपनी नाराजगी और मांगें रख रहे हैं। खामनेई के खिलाफ नारे पहले केवल “मुल्लाओं मुर्दाबाद” तक सीमित थे, लेकिन अब वे सीधे शासन के सर्वोच्च नेता को निशाना बना रहे हैं।
हालात की गंभीरता को देखते हुए ईरानी प्रशासन और सुरक्षा बल प्रदर्शनकारियों को नियंत्रित करने के लिए कड़े कदम उठा रहे हैं और कई शहरों में अब तक संचार माध्यम ठप हैं। वहीं, प्रदर्शनकारी लगातार व्यापक समर्थन की अपील कर रहे हैं और कई लोग शाह पहलवी के समर्थन में नारे लगा रहे हैं, यह संकेत देते हुए कि वे प्रणालीगत बदलाव चाहते हैं—चाहे वह मौजूदा शासन का पुनर्गठन हो या सत्ता का पूर्ण परिवर्तन।



