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दिल्ली-एनसीआर में कड़ाके की ठंड और कोहरे का प्रकोप

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उत्तर भारत में ठंड की कड़ाके की लहर और घने कोहरे ने जनजीवन को प्रभावित कर रखा है, खासकर राजधानी दिल्ली-एनसीआर में जहां लोगों को 3 साल की सबसे सर्द सुबह का सामना करना पड़ा है। राजधानी के कई इलाकों में न्यूनतम तापमान में भारी गिरावट दर्ज की गई है और विजिबिलिटी बेहद कम होने की वजह से यातायात और रोजमर्रा की गतिविधियों पर प्रभाव पड़ा है। मौसम विभाग ने कई राज्यों के लिए शीतलहर और कोहरे को लेकर अलर्ट जारी किया है, जिससे आम नागरिकों को सतर्क रहने की सलाह दी गई है।

मौसम की इन प्रतिकूल परिस्थितियों के बावजूद आज मकर संक्रांति और माघ मेला जैसे धार्मिक कार्यक्रमों की महत्ता के चलते देश भर से श्रद्धालु बड़ी संख्या में पवित्र नदियों के तटों पर आस्था की डुबकी लगाने पहुंचे हैं। पश्चिम बंगाल के गंगासागर में हजारों भक्तों ने ठंडे मौसम के बीच गंगा में स्नान किया, वहीं उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में चल रहे माघ मेले में भी श्रद्धालुओं का भारी सैलाब दिखाई दे रहा है। प्रशासन ने सुरक्षा और भीड़ प्रबंधन को लेकर विशेष इंतजाम किए हैं।

प्रयागराज माघ मेले की तैयारियों को देखते हुए प्रशासन ने यातायात को सुचारु बनाए रखने के लिए 18 जनवरी तक ट्रैफिक डायवर्जन लागू कर दिया है, जिससे मकर संक्रांति स्नान के दौरान भीड़ और वाहनों के संचालन को नियंत्रण में रखा जा सके। श्रद्धालु संगम घाट पर आस्था की डुबकी लगाने के लिए निर्धारित मार्गों का पालन कर रहे हैं और पुलिस प्रशासन ने सुरक्षा के व्यापक उपाय किए हैं।

इसी मेले क्षेत्र में मकर संक्रांति से एक दिन पहले सेक्टर-5 के नारायण शुक्ला धाम शिविर में भीषण आग लगने से अफरा-तफरी मची। आग ने 15 से ज्यादा तंबू और कई दुकानों को राख कर दिया, लेकिन दमकल और पुलिस कर्मियों की शीघ्र कार्रवाई के कारण किसी व्यक्ति के हताहत होने की सूचना नहीं मिली। घटनास्थल से श्रद्धालु सुरक्षित रूप से बाहर निकाले गए।

माघ मेला के दौरान प्रशासन ने भीड़ प्रबंधन, स्वच्छता, पार्किंग और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर कई कदम उठाए हैं ताकि मेले के मुख्य स्नान दिनों पर किसी भी अप्रिय घटना से निपटा जा सके। विशेषज्ञों का कहना है कि मकर संक्रांति के अवसर पर विशाल संख्या में श्रद्धालु हिस्सा लेते हैं और ऐसी धार्मिक परंपराएं समाज में सांस्कृतिक एकता और समर्पण की भावना को मजबूती देती हैं।

इस प्रकार, मौसम की कठिन परिस्थितियों के बावजूद देश भर के श्रद्धालु धार्मिक उत्सवों और सामाजिक आयोजनाओं में भाग लेते नजर आ रहे हैं, जबकि प्रशासन सुरक्षा और जन सुविधा को सुनिश्चित करने के लिए हर संभव प्रयास कर रहा है।

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