
सुप्रीम कोर्ट ने एयरलाइनों के महँगे हवाई किरायों पर जताई चिंता
नई दिल्ली: देश के सर्वोच्च न्यायालय ने एयरलाइनों द्वारा त्योहारों और खास अवसरों के दौरान हवाई किरायों में अत्यधिक वृद्धि और अस्थिरता पर चिंता जताई है और इस मुद्दे को गंभीर मानते हुए केंद्र व DGCA (नागरिक उड्डयन महानिदेशालय) को जवाब दाखिल करने का आदेश दिया है। अदालत ने कहा है कि बिना किसी नियंत्रण या सीमा के अत्यधिक किराया वृद्धि यात्रियों का शोषण कर सकती है, खासकर जब सामान्य यात्री त्योहारों के दौरान घर जाने के लिए टिकट बुक करते हैं।
सुप्रीम कोर्ट की बेंच, जिसमें न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और न्यायमूर्ति संदीप मेहता शामिल हैं, ने टिप्पणी की कि त्योहारों, जैसे कुम्भ मेले, के दौरान हवाई किरायों का बेहद अधिक हो जाना यात्रियों के साथ अपराधिक जैसा शोषण है। अदालत ने कहा कि वर्तमान में कोई भी अधिकार ऐसा नहीं है जो हवाई किरायों को समीक्षा या सीमा में रख सके, जिससे एयरलाइनों को छिपे हुए शुल्क, मांग-आधारित मूल्य निर्धारण (dynamic pricing) और अचानक किराया वृद्धि के लिए खुला अधिकार मिला हुआ है।
याचिकाकर्ता की ओर से दायर पीआईएल (जनहित याचिका) में यह भी उल्लेख किया गया कि अनियंत्रित, अस्पष्ट एवं उपभोक्ताओं के खिलाफ शोषक रवैये के चलते त्योहारों और मौसम के बिगड़ने पर टिकटों में अप्रत्याशित वृद्धि हो जाती है, जिससे गरीब और अंतिम-पल यात्री को भारी नुकसान उठाना पड़ता है। याचिका का तर्क है कि टिकट महँगा होने के कारण कुछ यात्रियों को अपनी यात्रा तय करना कठिन हो जाता है, जबकि अमीर यात्री पहले से बुकिंग कर किराया बढ़ने से बच सकते हैं।
पीआईएल में यह भी कहा गया कि किराया बढ़ाने और अन्य अन्य शुल्कों (ancillary charges) को बिना किसी नियामक दिशा-निर्देश के लागू किया जाना संविधान के तहत जीवन के साथ गरिमा (Right to Dignity) और स्वतंत्रता of movement (अंग 21) के अधिकारों के उल्लंघन के सामान है। अदालत ने इस मुद्दे को गंभीरता से लेते हुए कहा कि वह निश्चित रूप से हस्तक्षेप करेगी और उत्तर दर्ज कराने को कहा है।
वास्तव में, भारतीय घरेलू हवाई किराए त्योहारी सीज़न जैसे दिवाली–छठ, ओणम आदि के दौरान अक्सर बढ़ जाते हैं, जिसकी वजह यात्रियों की भारी मांग और सीमित उड़ान क्षमता होती है। कुछ रूट्स पर किराया 25% से 90% तक बढ़ जाता है, जिससे सामान्य यात्री खासकर आखिरी-लम्हे की बुकिंग के समय बेहद महँगा किराया चुकाते हैं।
नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) पहले भी त्योहारों के दौरान बढ़ते किरायों पर नज़र रखने और अतिरिक्त उड़ानें लगाने जैसे उपायों की सलाह दे चुका है ताकि मांग-आधारित उछाल को नियंत्रित किया जा सके। कुछ एयरलाइनों ने इस दिशा में हजारों अतिरिक्त उड़ानों की घोषणा भी की थी, लेकिन इसके बावजूद किरायों में अप्रत्याशित वृद्धि यात्रियों को राहत नहीं दे पाई।
अब सुप्रीम कोर्ट की इस सुनवाई से यह स्पष्ट संकेत मिल रहा है कि भारत में हवाई यात्रा को महँगी-मनमानी कीमतों से बचाने के लिए नियामक संरचना में बदलाव या नई बाध्यकारी दिशा-निर्देश की आवश्यकता है। इस मामले की आगे की सुनवाई में तय होगा कि क्या सरकार या DGCA को किरायों पर किसी प्रकार की सीमा/नियंत्रण नीति लागू करने की ज़रूरत है या नहीं।



