
सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा के खिलाफ एक जनहित याचिका (PIL) दायर की गई है, जिसमें उन पर मुस्लिम समुदाय को निशाना बनाने वाले बयानों और एक विवादित शूटिंग वीडियो के माध्यम से नफरत भड़काने का गंभीर आरोप लगाया गया है। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि वरिष्ठ नेताओं के इस तरह के बयान संवैधानिक जिम्मेदारियों का उल्लंघन करते हैं और समुदायों के बीच विभाजन पैदा कर सकते हैं।
इस जनहित याचिका में कुल 12 लोग शामिल हैं, जिनमें पूर्व उपराज्यपाल नजीब जंग, सामाजिक कार्यकर्ता रूप रेखा वर्मा और जॉन दयाल जैसे नाम शामिल हैं। याचिकाकर्ताओं ने सुप्रीम कोर्ट से मामला दर्ज करके न्यायालय से हस्तक्षेप और स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी करने की मांग की है ताकि भविष्य में ऐसे बयानों से सामाजिक सौहार्द और शांति को नुकसान न पहुँचे।
इस विवाद के बीच, हैदराबाद से सांसद और AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने भी हिमंता बिस्वा सरमा के खिलाफ FIR दर्ज कराई है और आरोप लगाया है कि सरमा का कथित वीडियो और उनके बयानों ने “नरसंहार जैसी नफरत भरी भाषा” को सामान्य कर दिया है, जिससे कानून के तहत सख्त कार्रवाई की आवश्यकता है।
पूर्व में असम में सरमा के कुछ बयान जैसे कि मुस्लिम समुदाय से जुड़े मतदाताओं को मतदाता सूची से हटाए जाने पर टिप्पणी करना और विवादित ‘गन वाला’ वीडियो सोशल मीडिया पर साझा होना, विवाद का केंद्र रहे हैं। कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों ने इस मुद्दे को संवैधानिक मूल्यों और अल्पसंख्यकों की सुरक्षा से जुड़े संवेदनशील मसले के रूप में उठाया है।
अब इस मामले में सुप्रीम कोर्ट में आगे की सुनवाई और कानूनी प्रक्रिया पर सियासत और सार्वजनिक ध्यान दोनों बनाये रखा गया है, और देश भर में इसकी टिप्पणियाँ और प्रतिक्रियाएँ जारी हैं।



