
लोकसभा स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ विपक्षी दलों द्वारा अविश्वास प्रस्ताव का नोटिस लोकसभा महासचिव को सौंपा गया, जिसमें लगभग 119 सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। लेकिन इस सूची पर कांग्रेस के प्रमुख नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी का नाम नहीं था, जिससे राजनीतिक हलचल बढ़ गई।
कांग्रेस ने बताया है कि राहुल गांधी ने संकेत दिया था कि अगर सदन में उन्हें बोलने की अनुमति नहीं दी जाती, खासकर राष्ट्रपति के अभिभाषण के बाद धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान, तो वे इस विरोध के हिस्से के रूप में इसे प्रक्रिया के साथ आगे बढ़ाएंगे। विपक्ष आरोप लगा रहा है कि स्पीकर ने राहुल गांधी और अन्य विपक्षी नेताओं को समय देने में पक्षपात किया है।
इस कारण से, सूची पर राहुल गांधी के हस्ताक्षर शामिल नहीं किए गए — कांग्रेस ने इसको रणनीतिक कदम बताया है और कहा है कि विपक्ष की एकजुटता और प्रक्रिया के सही पालन के लिए यह निर्णय लिया गया।
विपक्ष का कहना है कि यह कदम संसद में आलोचना और बोलने की स्वतंत्रता के अधिकार से जुड़ा है, और अगर उन्हें सदन में बोलने का मौका नहीं मिला तो अविश्वास प्रस्ताव लाना ही एक लोकतांत्रिक रास्ता है।



