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इंडिया-AI समिट में चेतावनी: एआई का गलत उपयोग गंभीर खतरों को बढ़ाता है

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राजधानी के भारत मंडपम में चल रहे India-AI Impact Summit 2026 के दौरान केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) के समर्थन में उत्साह व्यक्त करते हुए एक स्पष्ट चेतावनी दी है कि एआई के गलत इस्तेमाल से समाज और मीडिया उद्योग सहित अनेक क्षेत्रों में गंभीर खतरे पैदा हो सकते हैं। उन्होंने कहा कि सिर्फ नियम लागू करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि टेक्नो-लीगल (तकनीकी और कानूनी) उपायों का समन्वित ढांचा विकसित करना भी बहुत जरूरी है ताकि एआई-जनित बाधाओं जैसे डीपफेक्स, भ्रान्तिकरण सूचना (misinformation) और गलत जानकारियाँ (disinformation) से निपटा जा सके।

समिट में संबोधन देते हुए मंत्री वैष्णव ने स्पष्ट किया कि दुनिया भर में एआई तकनीक का विकास तेजी से हो रहा है और इसके सकारात्मक उपयोग से कई सामाजिक और आर्थिक फ़ायदे मिल सकते हैं, लेकिन गलत या दुरुपयोगी तरीके से इसका उपयोग लोकतांत्रिक संस्थाओं, मीडिया विश्वसनीयता और नागरिक विश्वास पर गंभीर असर डाल सकता है। उन्होंने कहा कि एआई-जनित सामग्री को स्पष्ट रूप से पहचानने योग्य बनाना तथा watermarking और labeling जैसे तकनीकी उपायों को अनिवार्य करना आवश्यक होगा ताकि जनता को यह पता चल सके कि कोई कंटेंट वास्तविक इंसानी सृजन है या मशीन द्वारा निर्मित।

आगे उन्होंने यह भी बताया कि भारत इस समस्या के समाधान के लिए 30 से अधिक देशों के मंत्रियों के साथ बातचीत कर रहा है ताकि विश्‍व स्तर पर एक साझा रणनीति विकसित की जा सके, जो एआई तकनीक के दुरुपयोग की रोकथाम, वैश्विक मानकों, और नियमों पर आधारित framework तैयार करने में मदद करे। इसके तहत मीडिया कंपनियों, सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म्स, तकनीकी निर्माताओं और नीति-निर्माताओं के बीच सहयोग बढ़ाने का प्रयास चल रहा है।

वैष्णव ने कहा कि “Innovation without trust is a liability” यानी विश्वास के बिना नवाचार एक liability (भारी बोझ) बन सकता है और अगर तकनीक लोगों के भरोसे को नुकसान पहुंचाती है तो उसका कोई स्थायी लाभ नहीं रह जाएगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि डीपफेक जैसे खतरों के मुकाबले में तकनीकी और कानूनी ‘guardrails’ यानी सुरक्षा प्रणालियाँ विकसित करना आवश्यक है, ताकि न केवल मीडिया उद्योग बल्कि समाज के सभी हिस्सों में विश्वास व सुरक्षा बनी रहे।

इस प्रतिनिधिमंडलीय कार्यक्रम में यह भी चर्चा की गई कि एआई आसानी से वास्तविकता की नकल कर सकता है और मीडिया में इसकी भूमिका विशिष्ट रूप से संवेदनशील है क्योंकि गलत-तथ्य सामग्री जनता को भ्रमित कर सकती है तथा सामाजिक ढांचे पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकती है। ऐसे में सरकार डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म्स को स्पष्ट ‌नियमों के अनुपालन और तकनीकी समाधानों पर काम करने के लिए प्रेरित कर रही है, ताकि भविष्य में एआई-जनित सामग्री के प्रभावों का सकारात्मक रूप से नियंत्रण किया जा सके।

यह समिट न केवल तकनीकी नवाचारों पर ध्यान केन्द्रित कर रहा है, बल्कि यह वैश्विक स्तर पर AI के सामाजिक, नैतिक और कानूनी प्रभावों का संतुलित विश्लेषण भी प्रस्तुत कर रहा है। इसके साथ ही सरकार, उद्योग और नीति-निर्माताओं के बीच सहयोग को मजबूती प्रदान करने के प्रयास तेज़ हो रहे हैं, ताकि भारत एआई-प्रौद्योगिकी के फायदे तो उठाए, लेकिन उसके संभावित खतरों से भी समय रहते निपटा जा सके।

इस प्रकार India-AI Impact Summit 2026 वैश्विक मंच पर भारत के नेतृत्व को उभारते हुए एआई के सही इस्तेमाल तथा दुरुपयोग रोकने के समाधान दोनों पर चर्चा का एक महत्वपूर्ण केंद्र बन रहा है, जहां तकनीकी नवाचार और सामाजिक सुरक्षा का संतुलन स्थापित करने की कोशिश जारी है।

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