
बीएमसी चुनाव के बाद मुंबई में एकनाथ शिंदे और राज ठाकरे की पहली मुलाकात
मुंबई में बुधवार को महाराष्ट्र की राजनीति में एक महत्वपूर्ण और चर्चित मुलाकात देखने को मिली, जब एकनाथ शिंदे, जो वर्तमान में महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री और शिंदे-गुट शिवसेना के प्रमुख हैं, ने अपनी पार्टी के निकाय चुनावों में मिली बड़ी सफलता के बाद राज ठाकरे, महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) के नेता, से उनके नंदनवन, ठाणे स्थित आवास पर मुलाकात की। यह बैठक 2026 के बृहन्मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) चुनावों के बाद दोनों नेताओं के बीच पहली आमने-सामने बातचीत थी, और राजनीतिक गलियारों में अटकलों को हवा दे गई है।
बीएमसी चुनाओं में उपमुख्यमंत्री शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना-भाजपा गठबंधन को स्पष्ट बहुमत मिला था, लेकिन मान्यताओं के अनुसार मनसे के कुछ पार्षदों ने कल्याण-डोंबिवली नगर निगम और अन्य निकायों में शिंदे-गुट को समर्थन दे कर स्थिति को और रोचक बना दिया था। इन परिस्थितियों के बीच राज ठाकरे की शिंदे से मुलाकात को राजनीतिक रणनीति और भविष्य के समीकरणों के संदर्भ में देखा जा रहा है।
पारंपरिक रूप से शिवसेना (उद्धव गुट) और मनसे के बीच विचारों में मतभेद रहे हैं, मगर हाल के चुनावों में मनसे ने शिंदे-गुट की शिवसेना को विभिन्न निकायों में समर्थन दिया था, जिससे राजनीतिक समीकरण में बदलाव की चर्चा जोर पकड़ने लगी थी। राज ठाकरे और शिंदे के बीच यह पहली मुलाकात बीएमसी चुनावों के बाद हुई है, जिससे यह संकेत मिल सकता है कि मनसे राजनीतिक रूप से अधिक लचीली भूमिका अपनाने पर विचार कर रहा है या आने वाले समय में बड़े गठबंधन की दिशा में कदम बढ़ सकता है।
इस मुलाकात के दौरान दोनों नेताओं को शाल और पुष्पगुच्छ के साथ स्वागत करते हुए देखा गया, और दोनों ने एकांत वातावरण में काफी समय तक बातचीत की, जिससे राजनीतिक विश्लेषकों और मीडिया में चर्चा बढ़ी है कि महाराष्ट्र में आगामी विधानसभा चुनावों, नगर निगमों के नेतृत्व और अन्य सत्ता केंद्रों पर गठबंधन की संभावनाएँ क्या होंगी। हालांकि दोनों नेताओं और उनके कार्यालयों की ओर से बातचीत की विशिष्ट राजनीतिक एजेंडा पर कोई आधिकारिक जानकारी साझा नहीं की गई है।
राज्य की राजनीति में यह मुलाकात ऐसे समय में हुई है, जब बीएमसी चुनावों के परिणाम ने स्थानीय सत्ता समीकरण को बदल दिया है, और शिवसेना-भाजपा गठबंधन को मजबूती मिली है। मनसे का शिंदे-गुट के साथ समर्थन देना पारंपरिक विरोध से हटकर नए राजनीतिक संतुलन की ओर इशारा करता है, जिससे राज्य के राजनीतिक दलों के बीच आगे चल कर बड़े बदलावों की उम्मीद जताई जा रही है।
विश्लेषकों का मानना है कि इस बैठक से ट्विटर, राजनीतिक चर्चाओं और मीडिया में अटकलों की लहर चली है कि क्या राज ठाकरे का मनसे अब अलग राजनीतिक दिशा अपनाएगी या शिंदे-गुट के साथ किसी तरह का सहयोग या गठबंधन आगे की राजनीति का हिस्सा बनेगा। दोनों नेताओं की बातचीत का महाराष्ट्र की राजनीति पर क्या प्रभाव पड़ेगा, यह आगामी समय में स्पष्ट होगा, खासकर जब राज्य की बड़ी संस्थाओं और आगामी चुनावों की रणनीति पर चर्चा बढ़ेगी।
मुलाकात के बाद उद्धव ठाकरे के शिवसेना (UBT) गुट की ओर से भी प्रतिक्रिया आयी है, जिसमें उन्होंने इस बैठक को अत्यधिक राजनीतिक महत्व देने की आलोचना की है, लेकिन साथ ही कहा है कि विपक्ष को इस तरह के कदमों को राजनीतिक दृष्टिकोण से निष्पक्ष रूप से देखा जाना चाहिए। इस प्रतिक्रिया ने और भी राजनीतिक बातचीत को गति दी है।
इस प्रकार, महाराष्ट्र की राजनीति में शिंदे और ठाकरे के बीच हुई यह मुलाकात राजनीतिक हलचल, संभावनाओं और भविष्य की रणनीतियों का एक नया अध्याय खोल सकती है, जो राज्य में सत्ता संतुलन और सहयोगी दलों के बीच नए समीकरणों को जन्म दे सकती है।



