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छींक के साथ नाक से निकले जिंदा कीड़े!

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दुनिया में मेडिकल साइंस को हैरान कर देने वाला एक बेहद दुर्लभ मामला सामने आया है, जहां ग्रीस की एक महिला के साथ ऐसी घटना हुई, जिसे सुनकर कोई भी चौंक जाए। एक साधारण सर्दी-जुकाम जैसे लक्षणों के बीच अचानक महिला की छींक के साथ नाक से करीब 1 इंच लंबे जिंदा कीड़े निकलने लगे। इस अजीब घटना ने डॉक्टरों को भी हैरान कर दिया और तुरंत जांच शुरू की गई।

जानकारी के अनुसार, यह मामला 58 वर्षीय महिला का है, जो खुले मैदान में काम करती थीं और जहां आसपास भेड़ें चर रही थीं। इसी दौरान उनके चेहरे के आसपास बड़ी संख्या में मक्खियां मंडराती रहीं, लेकिन उन्होंने इसे सामान्य समझकर नजरअंदाज कर दिया। कुछ दिनों बाद उन्हें साइनस में दर्द और लगातार खांसी जैसी समस्याएं होने लगीं, लेकिन कोई गंभीर संकेत नहीं दिखा।

घटना ने तब चौंकाया जब अचानक एक दिन छींक के साथ उनके नाक से कीड़ा बाहर निकल आया। इसके बाद महिला तुरंत डॉक्टर के पास पहुंचीं। जांच में सामने आया कि उनकी नाक के अंदर कई लार्वा (कीड़ों के बच्चे) मौजूद थे। डॉक्टरों ने सर्जरी कर महिला के साइनस से करीब 10 लार्वा और एक “प्यूपा” (कीड़े का विकसित चरण) बाहर निकाला।

विशेषज्ञों के अनुसार, ये कीड़े “शीप बॉट फ्लाई” (Oestrus ovis) नामक परजीवी के लार्वा थे, जो आमतौर पर भेड़ और बकरियों की नाक में पाए जाते हैं। इंसानों में इस तरह का संक्रमण बेहद दुर्लभ होता है। आम तौर पर मानव शरीर का वातावरण इन लार्वा के लिए अनुकूल नहीं होता, इसलिए ये ज्यादा समय तक जीवित नहीं रह पाते।

हालांकि इस मामले में महिला की नाक की संरचना (deviated septum) ने इन लार्वा को जीवित रहने और बढ़ने के लिए अनुकूल वातावरण प्रदान कर दिया। यही कारण है कि ये कीड़े न केवल जिंदा रहे बल्कि विकसित अवस्था तक पहुंच गए, जिसे मेडिकल साइंस में “biologically implausible” यानी बेहद असंभव माना जाता था।

डॉक्टरों ने समय रहते सर्जरी और दवाइयों के जरिए महिला का सफल इलाज किया और अब वह पूरी तरह स्वस्थ हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि यह मामला बेहद दुर्लभ जरूर है, लेकिन इससे यह सीख मिलती है कि पशुओं के संपर्क में रहने वाले लोगों को अपनी सेहत को लेकर सतर्क रहना चाहिए और असामान्य लक्षण दिखने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।

यह घटना मेडिकल जगत के लिए भी एक चेतावनी है, क्योंकि यह दर्शाती है कि कुछ परजीवी अब इंसानों के शरीर में भी अपेक्षा से अधिक समय तक जीवित रह सकते हैं। ऐसे मामलों पर आगे और शोध की जरूरत बताई जा रही है, ताकि भविष्य में इस तरह के संक्रमण से बेहतर तरीके से निपटा जा सके।

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