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परिसीमन से दक्षिण भारत का नुकसान नहीं, महिला आरक्षण से बढ़ेगी भागीदारी

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लोकसभा में विशेष सत्र के दौरान केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने परिसीमन (Delimitation) और महिला आरक्षण को लेकर उठ रहे विवादों पर विस्तार से जवाब दिया। उन्होंने साफ कहा कि परिसीमन प्रक्रिया से दक्षिण भारत के राज्यों का नुकसान नहीं होगा, बल्कि उनकी सीटों में भी बढ़ोतरी होगी। शाह के मुताबिक, लोकसभा सीटों की कुल संख्या बढ़ने वाली है और इसका फायदा सभी राज्यों को मिलेगा।

अमित शाह ने उदाहरण देते हुए बताया कि परिसीमन के बाद तमिलनाडु, केरल, तेलंगाना और आंध्र प्रदेश जैसे राज्यों की सीटें बढ़ सकती हैं। उन्होंने कहा कि यह धारणा गलत है कि दक्षिण भारत की हिस्सेदारी घटेगी। सरकार का लक्ष्य जनसंख्या के हिसाब से प्रतिनिधित्व को संतुलित करना है, न कि किसी क्षेत्र के साथ भेदभाव करना।

इस दौरान महिला आरक्षण विधेयक भी चर्चा के केंद्र में रहा। सरकार का प्रस्ताव है कि लोकसभा और विधानसभा में महिलाओं को 33% आरक्षण दिया जाए, जिसे लागू करने के लिए परिसीमन और जनगणना को आधार बनाया गया है। यह कदम देश की राजनीति में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने के लिए अहम माना जा रहा है।

हालांकि विपक्ष ने इस मुद्दे पर सरकार को घेरा। कई दलों का आरोप है कि महिला आरक्षण को परिसीमन से जोड़कर सरकार राजनीतिक फायदा उठाना चाहती है। विपक्षी नेताओं का कहना है कि महिला आरक्षण तुरंत लागू किया जाना चाहिए, बिना परिसीमन का इंतजार किए।

लोकसभा में इस मुद्दे पर जोरदार बहस और हंगामा देखने को मिला। दक्षिण भारत के कई नेताओं ने आशंका जताई कि जनसंख्या आधारित परिसीमन से उत्तर भारत को ज्यादा फायदा हो सकता है, जिससे संघीय संतुलन प्रभावित होगा।

सरकार ने स्पष्ट किया है कि परिसीमन के बाद लोकसभा की कुल सीटें बढ़ सकती हैं और किसी भी राज्य की सीटें कम नहीं होंगी। साथ ही महिला आरक्षण लागू होने से संसद में महिलाओं की भागीदारी ऐतिहासिक रूप से बढ़ेगी, जिससे लोकतंत्र और मजबूत होगा।

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