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कर्नाटक में सत्ता परिवर्तन तय, डीके शिवकुमार बने कांग्रेस विधायक दल के नेता

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कांग्रेस पार्टी के भीतर पिछले कई दिनों से नेतृत्व परिवर्तन को लेकर गहन मंथन चल रहा था। दिल्ली में कांग्रेस हाईकमान के साथ कई दौर की बैठकों के बाद यह फैसला अंतिम रूप तक पहुंचा। मुख्यमंत्री सिद्धारमैया के इस्तीफे के बाद कांग्रेस विधायक दल की बैठक बुलाई गई थी, जिसमें नए नेता का चुनाव होना था। बैठक में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के करीबी नेताओं, संगठन महासचिव के.सी. वेणुगोपाल और कर्नाटक प्रभारी रणदीप सिंह सुरजेवाला ने भी अहम भूमिका निभाई।

बैठक के दौरान पार्टी नेताओं ने सिद्धारमैया के कार्यकाल की सराहना की और कहा कि उनकी सरकार ने पिछले वर्षों में कई जनकल्याणकारी योजनाओं को सफलतापूर्वक लागू किया। वहीं अब डीके शिवकुमार को संगठन और सरकार दोनों के अनुभव का लाभ मिलने वाला है। कांग्रेस नेताओं का मानना है कि शिवकुमार के नेतृत्व में पार्टी 2028 के विधानसभा चुनावों में भी मजबूत स्थिति बनाए रख सकेगी। पार्टी महासचिव के.सी. वेणुगोपाल ने भी विश्वास जताया कि सिद्धारमैया के सहयोग और शिवकुमार के नेतृत्व में कांग्रेस भविष्य में और मजबूत होगी।

राजनीतिक रूप से यह बदलाव बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि 2023 में कांग्रेस की सरकार बनने के बाद से ही यह चर्चा होती रही थी कि सत्ता में ढाई-ढाई साल के फार्मूले के तहत नेतृत्व परिवर्तन हो सकता है। हालांकि पार्टी ने कभी आधिकारिक तौर पर इसकी पुष्टि नहीं की थी, लेकिन समय-समय पर सामने आने वाले संकेतों ने इन चर्चाओं को हवा दी। अब विधायक दल की बैठक में हुए फैसले ने लगभग सभी अटकलों को खत्म कर दिया है।

सूत्रों के मुताबिक, डीके शिवकुमार जल्द ही राज्यपाल से मुलाकात कर सरकार बनाने का दावा पेश करेंगे। इसके बाद शपथ ग्रहण समारोह आयोजित किया जाएगा। कई रिपोर्टों में दावा किया गया है कि शपथ ग्रहण 3 जून को हो सकता है, जबकि नई कैबिनेट के गठन और मंत्रियों के चयन को लेकर भी मंथन जारी है। बताया जा रहा है कि मंत्रिमंडल में क्षेत्रीय और जातीय संतुलन बनाए रखने की कोशिश की जाएगी ताकि पार्टी के भीतर किसी तरह की असंतुष्टि न रहे।

नेतृत्व परिवर्तन के साथ ही कांग्रेस के सामने नई चुनौतियां भी खड़ी हो गई हैं। मुख्यमंत्री पद का विवाद सुलझने के बाद अब उपमुख्यमंत्री पद, कैबिनेट में प्रतिनिधित्व और कर्नाटक प्रदेश कांग्रेस कमेटी (KPCC) के नए अध्यक्ष को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। पार्टी नेतृत्व इन सभी मुद्दों पर संतुलन बनाने की कोशिश कर रहा है ताकि सत्ता परिवर्तन का संदेश एकजुटता के साथ जनता तक पहुंचे।

कर्नाटक की राजनीति में इस बदलाव को कांग्रेस के लिए एक बड़े रणनीतिक कदम के रूप में देखा जा रहा है। डीके शिवकुमार लंबे समय से राज्य कांग्रेस के सबसे प्रभावशाली नेताओं में गिने जाते हैं और संगठन को मजबूत करने में उनकी अहम भूमिका रही है। ऐसे में अब उनकी ताजपोशी के साथ राज्य की राजनीति एक नए दौर में प्रवेश करती दिखाई दे रही है।

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