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होर्मुज पार कर गुजरात पहुंचा LNGC दिशा

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पश्चिम एशिया में लंबे समय तक जारी तनाव और होर्मुज जलडमरूमध्य में बाधित समुद्री गतिविधियों के बीच भारत के लिए एक बड़ी राहत भरी खबर सामने आई है। एलएनजी कैरियर ‘दिशा’ (LNGC Disha) सफलतापूर्वक होर्मुज जलडमरूमध्य को पार करते हुए गुजरात के भरूच जिले स्थित दहेज एलएनजी टर्मिनल पहुंच गया है। इस जहाज के सुरक्षित आगमन को भारत की ऊर्जा सुरक्षा के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि हाल के महीनों में मध्य पूर्व के तनाव के कारण एलएनजी और तेल आपूर्ति को लेकर गंभीर चिंताएं पैदा हो गई थीं।

जानकारी के अनुसार माल्टा-ध्वज वाले इस एलएनजी जहाज में लगभग 62,370 मीट्रिक टन तरलीकृत प्राकृतिक गैस (LNG) लदी हुई थी। यह जहाज शिपिंग कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया के नेतृत्व वाले एक कंसोर्टियम द्वारा प्रबंधित किया जा रहा है और इसे पेट्रोनेट एलएनजी के लिए चार्टर किया गया था। विशेष बात यह है कि यह उन शुरुआती व्यावसायिक जहाजों में शामिल रहा जिसने अमेरिका-ईरान शांति समझौते की घोषणा के बाद होर्मुज मार्ग से सुरक्षित आवाजाही की।

विशेषज्ञों का कहना है कि दहेज टर्मिनल पर इस खेप के पहुंचने से देश में प्राकृतिक गैस की उपलब्धता को मजबूती मिलेगी। भारत अपनी गैस जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयातित एलएनजी से पूरा करता है और उसमें भी खाड़ी देशों, विशेषकर कतर, की महत्वपूर्ण भूमिका है। होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा मार्गों में गिना जाता है और यहां किसी भी तरह की बाधा का सीधा असर भारत सहित कई देशों की ऊर्जा आपूर्ति पर पड़ता है।

पिछले कुछ महीनों में पश्चिम एशिया में संघर्ष बढ़ने के कारण कई जहाज इस क्षेत्र में फंस गए थे। हालांकि हालिया कूटनीतिक प्रगति और अमेरिका-ईरान समझौते के बाद समुद्री यातायात धीरे-धीरे सामान्य होने लगा है। ‘दिशा’ का सुरक्षित पारगमन इसी बदलाव का संकेत माना जा रहा है। अधिकारियों के अनुसार इस सफलता से उन दर्जनों अन्य जहाजों के लिए भी उम्मीद बढ़ी है जो इस मार्ग से भारत और अन्य देशों की ओर आने वाले हैं।

ऊर्जा क्षेत्र के जानकारों का मानना है कि यदि होर्मुज मार्ग पूरी तरह सामान्य बना रहता है तो भारत में गैस आपूर्ति को लेकर बनी अनिश्चितता काफी हद तक समाप्त हो सकती है। इससे उर्वरक उद्योग, बिजली उत्पादन इकाइयों और शहरों में पाइप्ड नेचुरल गैस सेवाओं को भी फायदा मिलेगा। साथ ही एलएनजी की उपलब्धता बढ़ने से ऊर्जा बाजार में स्थिरता आने की उम्मीद है।

केंद्र सरकार और शिपिंग से जुड़े अधिकारियों ने भी इस घटनाक्रम को सकारात्मक संकेत बताया है। उनका कहना है कि भारतीय एजेंसियां लगातार समुद्री मार्गों की स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं और विदेश मंत्रालय के साथ समन्वय कर रही हैं ताकि भारतीय हितों और ऊर्जा आपूर्ति को किसी प्रकार की बाधा का सामना न करना पड़े।

दहेज बंदरगाह पर LNGC दिशा का पहुंचना केवल एक जहाज के आगमन की खबर नहीं है, बल्कि यह उस भरोसे की वापसी का प्रतीक भी माना जा रहा है जिसकी वैश्विक ऊर्जा बाजार को लंबे समय से प्रतीक्षा थी। यदि आने वाले दिनों में इसी तरह जहाजों की आवाजाही सामान्य रहती है तो भारत की ऊर्जा सुरक्षा और आपूर्ति श्रृंखला को बड़ी मजबूती मिल सकती है।

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