
संसद के मानसून सत्र के दौरान केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने राज्यसभा में राष्ट्रीय सम्मान अपमान निवारण (संशोधन) विधेयक, 2026 पेश किया। इस विधेयक का उद्देश्य राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम्’ के गायन का अपमान करने, उसे बाधित करने या जानबूझकर उसमें व्यवधान उत्पन्न करने जैसी गतिविधियों को दंडनीय अपराध की श्रेणी में शामिल करना है। सरकार का कहना है कि राष्ट्रीय प्रतीकों और राष्ट्रीय गीत के सम्मान को कानूनी रूप से और अधिक मजबूत बनाने के लिए यह संशोधन आवश्यक है। इससे पहले केंद्रीय मंत्रिमंडल भी इस विधेयक को मंजूरी दे चुका था।
प्रस्तावित संशोधन के अनुसार यदि कोई व्यक्ति जानबूझकर ‘वंदे मातरम्’ के गायन का अपमान करता है, उसे रोकने की कोशिश करता है या कार्यक्रम में व्यवधान पैदा करता है, तो उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जा सकेगी। ऐसे मामलों में सजा और जुर्माने का भी प्रावधान किया गया है। सरकार का कहना है कि यह कानून किसी की अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को सीमित करने के लिए नहीं, बल्कि राष्ट्रीय सम्मान की रक्षा सुनिश्चित करने के उद्देश्य से लाया गया है।
गृह मंत्री अमित शाह ने सदन में कहा कि ‘वंदे मातरम्’ केवल एक गीत नहीं बल्कि देश के स्वतंत्रता संग्राम की प्रेरणा और राष्ट्रीय चेतना का प्रतीक रहा है। उन्होंने कहा कि आजादी की लड़ाई के दौरान हजारों स्वतंत्रता सेनानियों ने इसी गीत से प्रेरणा लेकर देश के लिए संघर्ष किया था। सरकार का मानना है कि राष्ट्रीय ध्वज, राष्ट्रगान और राष्ट्रीय गीत के प्रति सम्मान बनाए रखना प्रत्येक नागरिक की जिम्मेदारी है और इस दिशा में कानूनी प्रावधानों को और स्पष्ट करने की आवश्यकता महसूस की गई।
विधेयक पेश होने के बाद संसद के भीतर और बाहर राजनीतिक बहस भी तेज हो गई है। सत्तापक्ष का कहना है कि राष्ट्रीय प्रतीकों के सम्मान को लेकर किसी प्रकार का समझौता नहीं किया जा सकता और यह कानून देश की एकता एवं अखंडता की भावना को मजबूत करेगा। वहीं विपक्ष के कुछ नेताओं ने इस प्रस्तावित कानून के कुछ प्रावधानों पर सवाल उठाते हुए कहा कि इसके क्रियान्वयन में संतुलन और स्पष्टता बनाए रखना जरूरी होगा, ताकि किसी प्रकार की अनावश्यक कानूनी जटिलता पैदा न हो।
सरकार के अनुसार विधेयक में यह भी स्पष्ट किया गया है कि किसी मामले में कार्रवाई से पहले तथ्यों और परिस्थितियों की जांच की जाएगी तथा संबंधित प्रावधानों के तहत ही निर्णय लिया जाएगा। विधेयक अब संसदीय प्रक्रिया के तहत आगे बढ़ेगा, जहां इस पर विस्तृत चर्चा होने के बाद इसे पारित करने की प्रक्रिया पूरी की जाएगी। यदि संसद से मंजूरी मिलती है, तो राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम्’ के अपमान या उसके गायन में बाधा डालने से जुड़े मामलों के लिए नया कानूनी ढांचा लागू हो जाएगा।
राष्ट्रीय गीत से जुड़े इस प्रस्तावित कानून को सरकार राष्ट्र सम्मान से जुड़ा महत्वपूर्ण कदम बता रही है। आने वाले दिनों में संसद में इस पर विस्तृत बहस होने की संभावना है, जहां विभिन्न राजनीतिक दल अपने-अपने विचार और सुझाव रखेंगे। इस कारण यह विधेयक मानसून सत्र के प्रमुख विधायी प्रस्तावों में से एक माना जा रहा है।



