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अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव एक बार फिर खतरनाक मोड़ पर पहुंचता दिखाई दे रहा है।

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अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव एक बार फिर खतरनाक मोड़ पर पहुंचता दिखाई दे रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के अत्यधिक सुरक्षित माने जाने वाले भूमिगत परमाणु परिसर ‘पिकऐक्स माउंटेन’ (Pickaxe Mountain) पर सैन्य कार्रवाई की चेतावनी देकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई चिंता पैदा कर दी है। ट्रंप ने संकेत दिया कि यदि ईरान अपनी परमाणु गतिविधियों को जारी रखता है और क्षेत्र में अमेरिकी हितों के लिए खतरा बना रहता है, तो अमेरिका इस ठिकाने को भी निशाना बनाने से पीछे नहीं हटेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि यह बयान केवल राजनीतिक दबाव बनाने तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे पश्चिम एशिया में सैन्य टकराव की आशंकाएं भी बढ़ गई हैं।

जिस ठिकाने को लेकर ट्रंप ने चेतावनी दी है, वह ईरान के नतांज (Natanz) परमाणु केंद्र के निकट पहाड़ के भीतर बनाया गया एक अत्यधिक सुरक्षित भूमिगत परिसर माना जाता है। इस परियोजना का निर्माण कई वर्षों से जारी है और उपग्रह तस्वीरों के आधार पर माना जाता है कि इसे इतनी गहराई में तैयार किया गया है कि पारंपरिक बमों से इसे नुकसान पहुंचाना बेहद कठिन होगा। विभिन्न अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा विश्लेषकों का मानना है कि ईरान इस परिसर का उपयोग उन्नत सेंट्रीफ्यूज, यूरेनियम संवर्धन या परमाणु कार्यक्रम से जुड़ी महत्वपूर्ण गतिविधियों के लिए कर सकता है, हालांकि ईरान लगातार यह दावा करता रहा है कि उसका परमाणु कार्यक्रम पूरी तरह शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए है।

रिपोर्टों के अनुसार ट्रंप ने कहा कि अमेरिका ईरान के किसी भी नए परमाणु ठिकाने को सुरक्षित नहीं रहने देगा और जरूरत पड़ने पर इस पहाड़ी परिसर पर भी हमला किया जा सकता है। हाल के महीनों में अमेरिका और ईरान के बीच समुद्री मार्गों, विशेषकर होरमुज जलडमरूमध्य को लेकर तनाव लगातार बढ़ा है। दोनों देशों के बीच सैन्य गतिविधियों और तीखे बयानों ने पहले ही पूरे क्षेत्र में अस्थिरता बढ़ा दी है। ऐसे में ट्रंप का यह नया बयान कूटनीतिक प्रयासों के बजाय सैन्य विकल्पों को प्राथमिकता देने का संकेत माना जा रहा है।

सुरक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि ‘पिकऐक्स माउंटेन’ जैसे भूमिगत परिसर पर हमला करना किसी भी सैन्य अभियान के लिए बड़ी चुनौती होगा। यह परिसर पहाड़ के भीतर काफी गहराई में स्थित बताया जाता है और इसकी सुरक्षा को इस तरह डिजाइन किया गया है कि सामान्य बमबारी से इसे गंभीर नुकसान पहुंचाना आसान नहीं होगा। विश्लेषकों का मानना है कि यदि अमेरिका इस प्रकार की कार्रवाई करता है तो उसे विशेष प्रकार के भारी बंकर-भेदी हथियारों और कई चरणों वाले अभियान की आवश्यकता पड़ सकती है। इसके बावजूद इस बात को लेकर मतभेद हैं कि ऐसा हमला वास्तव में इस परिसर को पूरी तरह निष्क्रिय कर पाएगा या नहीं।

ट्रंप की इस चेतावनी के बाद पश्चिम एशिया में सुरक्षा हालात को लेकर अंतरराष्ट्रीय समुदाय की चिंता और बढ़ गई है। कई देशों का मानना है कि यदि दोनों पक्षों के बीच तनाव और बढ़ा तो इसका असर केवल अमेरिका और ईरान तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति, तेल बाजार और क्षेत्रीय स्थिरता पर भी व्यापक प्रभाव पड़ सकता है। इसी कारण कई देश लगातार कूटनीतिक समाधान और वार्ता के जरिए संकट कम करने की अपील कर रहे हैं। हालांकि फिलहाल दोनों पक्ष अपने-अपने रुख पर कायम दिखाई दे रहे हैं, जिससे आने वाले दिनों में स्थिति और संवेदनशील हो सकती है।

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