
अभिनेत्री तनुश्री दत्ता ने बॉलीवुड की तथाकथित ‘वेटरन’ संस्कृति पर एक बार फिर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि किसी व्यक्ति को सिर्फ उसकी उम्र या इंडस्ट्री में लंबे समय तक काम करने के कारण सम्मान या भरोसा नहीं दिया जाना चाहिए। तनुश्री ने अपने अनुभवों का जिक्र करते हुए कहा कि अब वह किसी व्यक्ति का मूल्यांकन उसकी उम्र या प्रतिष्ठा से नहीं, बल्कि उसके चरित्र के आधार पर करती हैं।
तनुश्री ने हाल ही में सोशल मीडिया पर एक वीडियो साझा किया, जिसमें उन्होंने बॉलीवुड में अपने करियर और उससे मिली सीख के बारे में बात की। अभिनेत्री ने कहा कि अपने करियर के एक दौर में वह काफी बड़ी स्टार थीं। हालांकि उन्होंने खुद को इंडस्ट्री की नंबर 1 या सुपरस्टार नहीं बताया, लेकिन उनका कहना था कि उस समय वह एक बड़ी स्टार थीं। इसी दौरान उन्होंने इंडस्ट्री में वरिष्ठता को लेकर प्रचलित सोच पर सवाल उठाया।
अभिनेत्री के मुताबिक बॉलीवुड में केवल उम्र के आधार पर किसी को ‘सीनियर’ नहीं माना जाना चाहिए। उन्होंने अपने विचार रखते हुए कहा कि इंडस्ट्री में असली वरिष्ठता उस समय दिखती है जब किसी कलाकार की फिल्म सफल हो और उसका सितारा बुलंद हो। यानी उनके अनुसार उम्र से ज्यादा व्यक्ति की मौजूदा सफलता और प्रभाव मायने रखता है।
तनुश्री ने अपने करियर के एक पुराने अनुभव को भी याद किया। उन्होंने दावा किया कि एक फिल्म के सेट पर कई लोग उनके खिलाफ एकजुट हो गए थे और उन्हें ‘बलि का बकरा’ बना दिया गया। अभिनेत्री ने कहा कि उस समय वह इंडस्ट्री के अंदर चलने वाली राजनीति और लोगों के व्यवहार को समझने के मामले में उतनी समझदार नहीं थीं। उन्होंने स्वीकार किया कि वह ‘स्ट्रीट स्मार्ट’ नहीं थीं और उन्हें फिल्म इंडस्ट्री की चालों और रिश्तों की जटिलता को समझने में समय लगा।
इसके बाद तनुश्री ने ‘वेटरन’ शब्द की अपनी अलग व्याख्या सामने रखी। उन्होंने आरोप लगाया कि बॉलीवुड में कुछ उम्रदराज और अनुभवी लोगों को सिर्फ इसलिए सम्मान मिल जाता है क्योंकि उन्हें ‘वेटरन’ कहा जाता है, जबकि उनके अनुसार उम्र किसी व्यक्ति के अच्छे चरित्र की गारंटी नहीं है। उन्होंने युवाओं को सलाह दी कि वे किसी व्यक्ति पर केवल उसकी उम्र या प्रतिष्ठा देखकर भरोसा न करें।
तनुश्री ने अपनी पोस्ट में कुछ बेहद तीखे और विवादित शब्दों का इस्तेमाल किया। उन्होंने कहा कि कुछ ऐसे लोग भी ‘वेटरन’ की श्रेणी में आते हैं जिनके इरादे युवाओं के प्रति बेहद नकारात्मक हो सकते हैं। उन्होंने यह भी दावा किया कि कुछ वरिष्ठ लोग अपनी छवि और अनुभव का इस्तेमाल मीडिया तथा जनता की धारणा को प्रभावित करने के लिए कर सकते हैं। हालांकि, इस ताजा पोस्ट में उन्होंने किसी विशेष अभिनेता या अभिनेत्री का नाम नहीं लिया है।
अभिनेत्री ने अपने विचार को आगे बढ़ाते हुए ‘राक्षसों’ का उदाहरण दिया। उनका कहना था कि अगर केवल उम्र को वरिष्ठता का पैमाना माना जाए तो राक्षस भी ‘वेटरन’ कहे जा सकते हैं, क्योंकि उनकी कल्पना प्राचीन प्राणियों के रूप में की जाती है। इसी संदर्भ में उन्होंने कहा कि कुछ इंसानों का व्यवहार भी उन्हें राक्षसी प्रवृत्ति वाला लगता है। यह टिप्पणी सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बन गई है।
तनुश्री ने अंत में लोगों से अपील की कि किसी व्यक्ति को उसकी उम्र, शक्ल या सामाजिक पृष्ठभूमि के आधार पर नहीं, बल्कि उसके चरित्र के आधार पर परखा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि उनके जीवन के अनुभवों ने उन्हें यह महत्वपूर्ण सबक दिया है कि सम्मान उम्र के हिसाब से नहीं, बल्कि व्यक्ति के चरित्र के अनुसार दिया जाना चाहिए।
तनुश्री दत्ता इससे पहले भी बॉलीवुड में अपने अनुभवों और इंडस्ट्री की कार्यप्रणाली को लेकर सार्वजनिक रूप से अपनी बात रखती रही हैं। 2018 में उनके आरोपों के बाद बॉलीवुड में #MeToo बहस को देशभर में काफी चर्चा मिली थी। हालांकि, मौजूदा बयान में उन्होंने किसी खास व्यक्ति पर सीधे आरोप नहीं लगाया है और उनकी ताजा टिप्पणी मुख्य रूप से बॉलीवुड की वरिष्ठता की संस्कृति, व्यक्तिगत अनुभवों और चरित्र को लेकर उनके विचारों पर केंद्रित है।
तनुश्री की इस पोस्ट के बाद एक बार फिर बॉलीवुड में वरिष्ठ कलाकारों को मिलने वाले सम्मान, इंडस्ट्री की अंदरूनी राजनीति और युवा कलाकारों के साथ व्यवहार को लेकर बहस शुरू हो गई है। उनके बयान पर आने वाली प्रतिक्रियाओं पर भी नजर रहेगी, खासकर इसलिए क्योंकि अभिनेत्री ने अपने अनुभवों के आधार पर इंडस्ट्री में मौजूद कुछ लोगों के व्यवहार पर गंभीर सवाल उठाए हैं।



