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अमेरिका की सरकारी नौकरी छोड़ी, UPSC क्रैक किया

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IPS निहारिका भट्ट की कहानी उन युवाओं के लिए प्रेरणा है, जो अच्छी नौकरी और विदेश में बेहतर करियर के बावजूद देश के लिए कुछ अलग करने का सपना देखते हैं। उत्तर प्रदेश की रहने वाली निहारिका ने अमेरिका में सरकारी नौकरी और डॉलर में मिलने वाली सैलरी छोड़कर भारत लौटने का फैसला किया। इसके बाद उन्होंने बिना किसी कोचिंग के UPSC सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी की और अपने पहले ही प्रयास में सफलता हासिल कर 146वीं रैंक प्राप्त की। वह 2015 बैच की AGMUT कैडर की IPS अधिकारी हैं।

निहारिका भट्ट ने बायोटेक्नोलॉजी में इंटीग्रेटेड B.Tech और M.Tech की पढ़ाई की। उन्होंने अमेरिका की मिशिगन यूनिवर्सिटी से M.Tech किया और इसके बाद अमेरिकी फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन में काम किया। वहां उन्होंने मानव शरीर पर नैनो पार्टिकल्स के प्रभाव को लेकर करीब डेढ़ साल तक रिसर्च की। अमेरिका में नौकरी के दौरान उन्हें चीन जाने का भी मौका मिला, जहां उन्होंने सरकारी व्यवस्था और प्रशासन के कामकाज को करीब से देखा। इसी अनुभव के बाद उनके मन में भारत लौटकर सिविल सेवा के जरिए देश और लोगों के लिए काम करने का विचार आया।

निहारिका ने अपने इस फैसले को सिर्फ सोच तक सीमित नहीं रखा। उन्होंने अमेरिका की नौकरी छोड़ी और भारत वापस आकर UPSC की तैयारी शुरू कर दी। दिल्ली में रहकर उन्होंने बिना कोचिंग के परीक्षा की तैयारी की और साल 2014 की सिविल सेवा परीक्षा अपने पहले प्रयास में पास कर ली। उन्हें ऑल इंडिया 146वीं रैंक मिली और इसके बाद उनका चयन भारतीय पुलिस सेवा में हुआ।

अब निहारिका भट्ट दिल्ली पुलिस में DCP नॉर्थ के तौर पर साइबर अपराध के खिलाफ कार्रवाई को लेकर चर्चा में हैं। पुलिस ने एक ऐसे आरोपी को गिरफ्तार किया है, जो दुकानदारों को UPI पेमेंट के नाम पर ठगी का शिकार बनाता था। आरोपी पहले दुकान से छोटी-मोटी खरीदारी करता और फिर दुकानदार को सफल UPI भुगतान का फर्जी स्क्रीनशॉट दिखाता था। इसके बाद वह दुकानदार से कहता कि अपने फोन में पेमेंट चेक कर लें।

आरोपी की असली चाल इसके बाद शुरू होती थी। पेमेंट की जांच के बहाने वह दुकानदार का फोन अपने हाथ में लेता और पहले से अनलॉक किए गए ऐप का फायदा उठाकर 1 लाख से 2 लाख रुपये तक अपने खाते या दूसरे म्यूल अकाउंट्स में ट्रांसफर कर देता था। कुछ मामलों में जब दुकानदार फोन देने से मना करते थे तो आरोपी कथित तौर पर झपट्टा मारकर फोन छीनकर भाग जाता था। जांच में इस तरह के 8 मामले सामने आए हैं। पुलिस ने आरोपी निखिल को गिरफ्तार कर लिया है और धोखाधड़ी में इस्तेमाल किए गए म्यूल अकाउंट्स के खाताधारकों पर भी कार्रवाई की गई है।

पुलिस के लिए इस आरोपी तक पहुंचना आसान नहीं था, क्योंकि वह रकम को कई स्तरों और अलग-अलग बैंक खातों के जरिए ट्रांसफर करता था। छोटी-छोटी रकम को कई खातों में भेजने की वजह से लेनदेन का पूरा नेटवर्क पकड़ना चुनौतीपूर्ण था। इस कार्रवाई ने यह भी दिखाया है कि साइबर अपराधी अब केवल ऑनलाइन लिंक या कॉल के जरिए ही नहीं, बल्कि आमने-सामने की ठगी और डिजिटल भुगतान की कमजोरियों का फायदा उठाकर भी लोगों को निशाना बना रहे हैं।

निहारिका भट्ट की कहानी का एक पहलू उनके करियर का संघर्ष और दूसरा साइबर अपराध के खिलाफ उनकी पुलिस कार्रवाई है। विदेश में सुरक्षित और अच्छी नौकरी छोड़कर देश लौटना, पहले प्रयास में UPSC पास करना और फिर पुलिस सेवा में रहकर अपराध के खिलाफ कार्रवाई करना उनकी यात्रा को खास बनाता है। उनकी कहानी उन युवाओं के लिए भी संदेश है कि करियर में एक मुकाम हासिल करने के बाद भी अगर लक्ष्य बड़ा हो तो नई शुरुआत करने का साहस किया जा सकता है।

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