
उत्तराखंड में 2027 विधानसभा चुनाव से पहले सियासी हलचल तेज हो गई है। हल्द्वानी में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे की सभा के बाद हुए कथित ‘शुद्धिकरण’ को लेकर जारी विवाद के बीच बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन 9 और 10 सितंबर को उत्तराखंड के दौरे पर पहुंचेंगे। उनके दौरे की शुरुआत हल्द्वानी से होगी, जहां वह पार्टी की प्रदेश कोर कमेटी की बैठक में शामिल होकर संगठन की तैयारियों और आगामी विधानसभा चुनाव की रणनीति पर चर्चा करेंगे। इसके बाद वह रुद्रपुर जाएंगे और अलग-अलग सामाजिक वर्गों के साथ संवाद करेंगे।
नितिन नवीन का हल्द्वानी दौरा ऐसे समय हो रहा है जब ‘शुद्धिकरण’ विवाद लगातार राजनीतिक मुद्दा बनता जा रहा है। 8 अगस्त को हल्द्वानी के रामलीला मैदान में मल्लिकार्जुन खड़गे ने कांग्रेस की जनसभा को संबोधित किया था। इसके बाद उसी स्थान पर कथित तौर पर शुद्धिकरण अनुष्ठान किए जाने को लेकर कांग्रेस ने बीजेपी पर गंभीर आरोप लगाए। कांग्रेस का कहना है कि यह कार्रवाई खड़गे की जातिगत पहचान से जोड़कर की गई और इसे दलित समुदाय के अपमान के तौर पर देखा जाना चाहिए। बीजेपी और आयोजन से जुड़े लोगों ने इस आरोप को खारिज किया है। उनका कहना है कि आयोजन का उद्देश्य जातिगत भेदभाव नहीं था।
विवाद ने उस समय और जोर पकड़ लिया जब खड़गे ने राज्यसभा में इस मुद्दे को उठाया और बाद में बीजेपी अध्यक्ष जेपी नड्डा को पत्र लिखकर कार्रवाई की मांग की। खड़गे ने सवाल उठाया कि घटना के 24 दिन बाद भी संबंधित लोगों के खिलाफ FIR क्यों दर्ज नहीं की गई। उन्होंने नड्डा के उस आश्वासन का भी हवाला दिया जिसमें मामले की जांच और दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ कार्रवाई की बात कही गई थी।
अब इस मामले में एक बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। 5 सितंबर को बेंगलुरु पुलिस ने उत्तराखंड बीजेपी अध्यक्ष महेंद्र भट्ट और अन्य बीजेपी कार्यकर्ताओं के खिलाफ Zero FIR दर्ज की। शिकायत में आरोप लगाया गया कि हल्द्वानी में किया गया कथित शुद्धिकरण जातिगत भेदभाव को बढ़ावा देने वाला था। पुलिस ने शिकायत को संबंधित जांच के लिए उत्तराखंड भेजने की प्रक्रिया शुरू की है।
हालांकि बीजेपी और आयोजन से जुड़े लोगों का पक्ष अलग है। उनका कहना है कि रामलीला मैदान में सफाई या धार्मिक अनुष्ठान को गलत तरीके से ‘शुद्धिकरण’ विवाद का रूप दिया जा रहा है। उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और आयोजन से जुड़े लोगों ने भी जातिगत भेदभाव के आरोपों को खारिज किया है। उनका दावा है कि मंच पर गंदगी के कारण हवन कराया गया था।
इसी राजनीतिक तनाव के बीच नितिन नवीन का हल्द्वानी पहुंचना बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। उनके कार्यक्रम में सिर्फ संगठनात्मक बैठक ही नहीं, बल्कि आगामी चुनाव को ध्यान में रखते हुए सामाजिक और राजनीतिक समीकरणों पर भी फोकस रहेगा। पार्टी की प्रदेश कोर कमेटी की बैठक में बूथ स्तर की तैयारियों, संगठन को मजबूत करने और विधानसभा चुनाव की रणनीति पर चर्चा होने की संभावना है।
9 सितंबर को नितिन नवीन हल्द्वानी में पार्टी नेताओं के साथ बैठक करेंगे। इसके बाद 10 सितंबर को वह रुद्रपुर पहुंचेंगे, जहां पूर्व सैनिकों की सभा को संबोधित करने के साथ सिख समुदाय के लोगों से संवाद करेंगे। इस कार्यक्रम से साफ संकेत मिलता है कि बीजेपी चुनाव से काफी पहले अलग-अलग सामाजिक समूहों के बीच अपनी राजनीतिक पकड़ मजबूत करने की कोशिश कर रही है।
दरअसल, उत्तराखंड की राजनीति में सामाजिक समीकरण चुनावी नतीजों पर महत्वपूर्ण असर डाल सकते हैं। ऐसे में हल्द्वानी के विवाद को कांग्रेस जहां सामाजिक न्याय और दलित सम्मान के मुद्दे के रूप में उठा रही है, वहीं बीजेपी इसे राजनीतिक रूप से बढ़ा-चढ़ाकर पेश किए जाने का आरोप लगा रही है। दोनों दलों के बीच यह टकराव आने वाले महीनों में और तेज होने की संभावना है।
कांग्रेस ने इस मुद्दे को केवल हल्द्वानी तक सीमित नहीं रखा है। पार्टी ने 7 सितंबर को देहरादून में मुख्यमंत्री आवास की ओर मार्च निकालने का ऐलान किया है। इसके अलावा कांग्रेस सांसद राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मुलाकात कर इस मामले में हस्तक्षेप की मांग करने की तैयारी में भी हैं।
बीजेपी की ओर से भी इस विवाद का जवाब राजनीतिक और प्रतीकात्मक तरीके से दिया गया है। बीजेपी के अनुसूचित जाति मोर्चा ने राहुल गांधी के लिए ‘बुद्धि-शुद्धि’ अनुष्ठान किया था। इसके बाद विवाद और ज्यादा राजनीतिक हो गया और दोनों पार्टियां एक-दूसरे पर निशाना साधने लगीं।
ऐसे माहौल में नितिन नवीन का हल्द्वानी दौरा बीजेपी के लिए सिर्फ एक संगठनात्मक कार्यक्रम नहीं माना जा रहा। पार्टी राष्ट्रीय अध्यक्ष के जरिए यह संदेश देने की कोशिश कर सकती है कि विवाद के बावजूद संगठन पूरी तरह सक्रिय है और 2027 के चुनाव की तैयारी में कोई ढिलाई नहीं बरती जाएगी। साथ ही अलग-अलग सामाजिक वर्गों के साथ संवाद के जरिए पार्टी चुनाव से पहले अपना जनाधार मजबूत करने की कोशिश करेगी।
दूसरी ओर कांग्रेस के लिए यह विवाद बीजेपी को घेरने का एक अहम मुद्दा बन गया है। खड़गे के साथ कथित शुद्धिकरण को जोड़कर कांग्रेस सामाजिक सम्मान, संविधान और दलित अधिकारों का मुद्दा उठा रही है। अब बेंगलुरु में Zero FIR दर्ज होने के बाद कांग्रेस को बीजेपी पर राजनीतिक दबाव बनाने का एक और आधार मिल गया है।
कुल मिलाकर, उत्तराखंड में विधानसभा चुनाव से करीब एक साल पहले ही सियासी तापमान बढ़ता दिखाई दे रहा है। हल्द्वानी का ‘शुद्धिकरण’ विवाद अब सड़क से संसद और राजनीतिक मंचों से कानूनी प्रक्रिया तक पहुंच चुका है। इसी बीच बीजेपी अध्यक्ष नितिन नवीन का हल्द्वानी दौरा यह संकेत दे रहा है कि पार्टी विवाद के बीच अपने संगठन और चुनावी रणनीति को मजबूत करने में जुट गई है। आने वाले दिनों में यह मुद्दा उत्तराखंड की राजनीति में कितना बड़ा चुनावी हथियार बनता है, इस पर सभी की नजर रहेगी।



