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फर्रुखाबाद लिंक एक्सप्रेसवे से बदलेगा यूपी का नक्शा

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फर्रुखाबाद लिंक एक्सप्रेसवे को लेकर उत्तर प्रदेश में काम तेजी से आगे बढ़ रहा है। यह नया सिक्सलेन एक्सप्रेसवे इटावा से हरदोई के बीच बेहतर कनेक्टिविटी देने के साथ आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे को गंगा एक्सप्रेसवे से जोड़ने का काम करेगा। करीब 125 किलोमीटर लंबे इस लिंक एक्सप्रेसवे के लिए जमीन अधिग्रहण का बचा हुआ काम जल्द पूरा किए जाने की तैयारी है।

इस परियोजना के लिए मैनपुरी जिले की भोगांव और किशनी तहसील के 27 गांवों की करीब 24 हेक्टेयर जमीन का अभी अधिग्रहण किया जाना बाकी है। प्रशासन की ओर से इसके लिए प्रस्ताव तैयार किया जा चुका है और जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया अक्टूबर में शुरू होने की संभावना जताई गई है। बाकी जमीन की करीब 92% खरीद पहले ही पूरी हो चुकी है।

जिन 27 गांवों की जमीन अधिग्रहित की जानी है, उनमें किशनी तहसील के 15 और भोगांव तहसील के 12 गांव शामिल हैं। भोगांव क्षेत्र में बहरामऊ, मुड़ई, हाजीपुर बरा, हुसैनपुर, कमालपुर महमूदिया, अकबरपुर बिकू, बहदीनपुर, रामनगरिया, दुर्जनपुर, चनेपुर, छबीलेपुर और घूमसपुर जैसे गांव शामिल हैं। वहीं किशनी तहसील में सींगपुर, नगला पांडेय, नगला कले, कैथपुर, नगला बले, धमियापुर, टोडरपुर, अहमलपुर, महोली शमशेरगंज, नगला गवे, शिवसिंहपुर, रठेह, तरिहा और ख्वाजापुर की जमीन ली जानी है।

इस लिंक एक्सप्रेसवे का सबसे बड़ा फायदा उत्तर प्रदेश के एक्सप्रेसवे नेटवर्क को मिलने वाली कनेक्टिविटी के रूप में देखा जा रहा है। इसके तैयार होने के बाद आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे और गंगा एक्सप्रेसवे के बीच सीधा संपर्क बेहतर होगा। इससे इटावा, मैनपुरी, फर्रुखाबाद और हरदोई समेत आसपास के इलाकों में आने-जाने वाले लोगों को तेज और सुगम सड़क संपर्क मिलने की उम्मीद है।

परियोजना को भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखकर तैयार करने की योजना है। मौजूदा प्रस्ताव के अनुसार एक्सप्रेसवे 6 लेन का होगा, लेकिन इसे भविष्य में 8 लेन तक विस्तारित किया जा सकेगा। इसके अलावा एक्सप्रेसवे के किनारे सर्विस रोड और अंडरपास बनाए जाने का भी प्रस्ताव है। इससे आसपास के गांवों के लोगों और किसानों को स्थानीय आवागमन में सुविधा मिलने की उम्मीद है।

उत्तर प्रदेश में लगातार बढ़ रहे एक्सप्रेसवे नेटवर्क का मकसद अलग-अलग हिस्सों को तेज सड़क कनेक्टिविटी से जोड़ना है। गंगा एक्सप्रेसवे खुद मेरठ से प्रयागराज तक करीब 594 किलोमीटर लंबा एक्सेस-कंट्रोल्ड कॉरिडोर है। ऐसे में फर्रुखाबाद लिंक एक्सप्रेसवे के जरिए इस नेटवर्क को आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे की दिशा से जोड़ना राज्य के सड़क परिवहन ढांचे को और मजबूत कर सकता है।

फिलहाल इस परियोजना के लिए सबसे अहम चरण जमीन अधिग्रहण का बचा हुआ काम है। 27 गांवों की 24 हेक्टेयर जमीन के लिए प्रक्रिया आगे बढ़ने के बाद परियोजना को निर्माण की दिशा में आगे ले जाने का रास्ता साफ होगा। हालांकि, एक्सप्रेसवे कब पूरी तरह बनकर यातायात के लिए खुलेगा, इसकी अंतिम समयसीमा अभी स्पष्ट नहीं है।

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