
लाल किला ही क्यों चुना? NIA की चार्जशीट में आतंकी साजिश का बड़ा खुलासा
दिल्ली के लाल किला के बाहर 10 नवंबर 2025 को हुए धमाके की जांच में राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने अपनी चार्जशीट में कई अहम खुलासे किए हैं। जांच एजेंसी के मुताबिक, इस हमले के लिए लाल किला को किसी सामान्य जगह की तरह नहीं चुना गया था, बल्कि आतंकियों की नजर में यह भारतीय लोकतंत्र का एक बड़ा प्रतीक था। चार्जशीट में दावा किया गया है कि इसी वजह से लाल किला और उसके आसपास के इलाके की कई बार रेकी की गई और हमले की योजना को धीरे-धीरे आगे बढ़ाया गया।
जांच के मुताबिक, धमाके वाली कार को डॉ. उमर उन नबी चला रहा था और NIA ने उसे इस हमले का मुख्य साजिशकर्ता तथा सुसाइड बॉम्बर बताया है। एजेंसी के अनुसार, 10 नवंबर 2025 को लाल किला के पास कार में हुए विस्फोट के पीछे एक संगठित आतंकी मॉड्यूल की भूमिका थी। जांच में उमर से जुड़े नेटवर्क, उसकी गतिविधियों और हमले की तैयारी को लेकर कई सबूत जुटाए जाने का दावा किया गया है।
चार्जशीट में बताया गया है कि उमर, मुजम्मिल शकील और डॉ. शाहीन सईद कई बार लाल किला और आसपास के इलाकों में पहुंचे थे। जांच एजेंसी के मुताबिक, इनकी मौजूदगी केवल घूमने या सामान्य आवाजाही तक सीमित नहीं थी। आरोप है कि इन लोगों ने हमले की तैयारी से जुड़े इलेक्ट्रॉनिक सामान की खरीदारी भी की थी। जांच में उनकी लोकेशन और गतिविधियों से जुड़े रिकॉर्ड को भी महत्वपूर्ण साक्ष्य के तौर पर देखा गया है।
चार्जशीट के अनुसार, आरोपियों की लाल किला इलाके में मौजूदगी कई अलग-अलग तारीखों पर दर्ज हुई। इनमें 20 दिसंबर 2023, 23 दिसंबर 2023, 26 मई 2024, 8 जून 2024, 14 जून 2024, 27 जून 2024, 11 जुलाई 2024, 17 जुलाई 2024, 9 अगस्त 2024, 4 दिसंबर 2024, 1 जनवरी 2025 और 10 मई 2025 शामिल हैं। NIA का दावा है कि इन लगातार गतिविधियों से आरोपियों के बीच संपर्क, आवाजाही और कथित साजिश के समन्वय की तस्वीर सामने आती है।
जांच में आरोपियों के मोबाइल इस्तेमाल करने के तरीके को भी अहम माना गया है। NIA के मुताबिक, जब शाहीन सईद उमर और मुजम्मिल के साथ होती थी, तब सर्चिंग और ब्राउजिंग के लिए उसका मोबाइल फोन इस्तेमाल किया जाता था, जबकि उमर और मुजम्मिल अपने मोबाइल फोन बंद कर देते थे। जांच एजेंसी ने इस पैटर्न को भी उनकी गतिविधियों और कथित साजिश की जांच में शामिल किया है।
सबसे बड़ा सवाल यही था कि आखिर हमले के लिए लाल किला को ही क्यों चुना गया। NIA की चार्जशीट के अनुसार, आरोपी लाल किला को भारतीय लोकतंत्र के प्रतीक के तौर पर देखते थे। जांच एजेंसी का आरोप है कि उमर के अल फलाह यूनिवर्सिटी परिसर से मिले कुछ हाथ से लिखे नोट्स में लोकतंत्र के खिलाफ विचार और भारत में शरिया कानून लागू करने की इच्छा से जुड़े कथित उल्लेख मिले। एजेंसी का कहना है कि इसी विचारधारा के तहत लाल किला के पास हमला करने को राज्य के खिलाफ युद्ध जैसी कार्रवाई के रूप में देखा गया।
NIA के अनुसार, आरोपियों की गतिविधियां बाद के चरण में और तेज हुईं। चार्जशीट में दावा किया गया है कि मुजम्मिल, शाहीन और इरफान अहमद की गिरफ्तारी तथा उनके खिलाफ कार्रवाई के बाद कथित साजिश के ऑपरेशनल हिस्से को आगे बढ़ाने की कोशिशें हुईं। एजेंसी के मुताबिक, AGuH से जुड़े ठिकानों से विस्फोटक सामग्री बरामद होने के बाद जांच में कई कड़ियां सामने आईं।
जांच एजेंसी का दावा है कि 10 नवंबर 2025 को उमर सुरक्षा और जांच एजेंसियों की नजर से बचते हुए लाल किला के पास पहुंचा और वहीं धमाका किया। NIA की चार्जशीट में लाल किला इलाके में पहले की गई कथित रेकी, इलेक्ट्रॉनिक सामान की खरीद, मोबाइल फोन बंद रखने की रणनीति और बाद की विस्फोटक तैयारी को एक ही बड़ी साजिश की अलग-अलग कड़ियों के तौर पर देखा गया है।
इस मामले में सामने आई चार्जशीट से यह संकेत मिलता है कि जांच एजेंसी केवल धमाके को अंजाम देने वाले व्यक्ति तक सीमित नहीं रहकर पूरे नेटवर्क, उसकी विचारधारा, संपर्कों, तैयारी और हमले के लिए जगह चुनने के पीछे के कथित मकसद की भी पड़ताल कर रही है। हालांकि, चार्जशीट में दर्ज आरोप जांच एजेंसी के दावे हैं और मामले में अंतिम कानूनी निष्कर्ष अदालत की कार्यवाही के बाद ही तय होंगे।



