
फ्रैंकफर्ट से दिल्ली आ रही एअर इंडिया फ्लाइट में हाइजैक अलर्ट! कुछ सेकंड के लिए एक्टिव हुआ ‘7500’ कोड
फ्रैंकफर्ट से दिल्ली आ रही एअर इंडिया की अंतरराष्ट्रीय फ्लाइट में बुधवार, 14 अक्टूबर को हाइजैक अलर्ट मिलने से हड़कंप मच गया। विमान को सुरक्षा कारणों से दिल्ली ले जाने के बजाय जयपुर एयरपोर्ट की ओर मोड़ दिया गया। बोइंग 787-9 विमान ने सुबह करीब 9:35 बजे जयपुर में सुरक्षित लैंडिंग की। विमान में सवार सभी 306 यात्री सुरक्षित बताए गए हैं। घटना के बाद सुरक्षा एजेंसियों ने विमान की जांच शुरू कर दी।
यह विमान एअर इंडिया की फ्लाइट AI2030 थी। शुरुआती जानकारी के अनुसार, अहमदाबाद एयर ट्रैफिक कंट्रोल (ATC) को विमान से कुछ सेकंड के लिए ऐसा संकेत मिला, जिसे संभावित हाइजैक या विमान में अवैध हस्तक्षेप से जुड़ा अलर्ट माना जाता है। इसके बाद एयर ट्रैफिक कंट्रोल और सुरक्षा एजेंसियां सतर्क हो गईं और एहतियात के तौर पर विमान को जयपुर में उतारने का फैसला किया गया।
क्या होता है ‘स्क्वॉक 7500’ कोड?
विमानन क्षेत्र में स्क्वॉक 7500 एक अंतरराष्ट्रीय ट्रांसपॉन्डर कोड है, जिसका इस्तेमाल विमान के अपहरण या उसमें अवैध हस्तक्षेप की स्थिति का संकेत देने के लिए किया जाता है। पायलट इस कोड के जरिए एयर ट्रैफिक कंट्रोल को सतर्क कर सकता है। इस तरह का संकेत मिलने पर अधिकारी संभावित खतरे को गंभीरता से लेते हैं और विमान की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए निर्धारित प्रक्रियाएं शुरू कर देते हैं।
क्या पायलट से गलती से दब गया था बटन?
शुरुआती रिपोर्टों में आशंका जताई गई है कि हाइजैक अलर्ट गलती से सक्रिय हो गया हो सकता है। कुछ अधिकारियों के हवाले से सामने आई जानकारी के मुताबिक, पायलट की ओर से गलती से कोड सक्रिय किए जाने की संभावना की भी जांच की जा रही है। हालांकि, अलर्ट किस वजह से जारी हुआ, इसकी अंतिम पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगी। फिलहाल उपलब्ध जानकारी से यह साबित नहीं होता कि विमान वास्तव में हाईजैक हुआ था।
जयपुर एयरपोर्ट पर उतरने के बाद क्या हुआ?
जयपुर में सुरक्षित लैंडिंग के बाद विमान को सामान्य पार्किंग क्षेत्र से अलग आइसोलेशन बे में ले जाया गया, जहां सुरक्षा एजेंसियों ने जांच की। यात्रियों को सुरक्षा निगरानी में विमान से उतारकर टर्मिनल तक पहुंचाया गया। शुरुआती जानकारी के अनुसार, सभी यात्री सुरक्षित थे और उन्हें आगे उनके गंतव्य तक पहुंचाने की व्यवस्था की जा रही थी। अधिकारियों ने स्थिति नियंत्रण में होने की बात कही।
DGCA की जांच में किन सवालों के जवाब तलाशे जाएंगे?
इस घटना में जांच का मुख्य सवाल यह है कि विमान से हाइजैक अलर्ट जैसा संकेत क्यों भेजा गया। जांच में यह पता लगाने की जरूरत होगी कि कोड जानबूझकर सक्रिय किया गया था, गलती से दब गया था या किसी तकनीकी अथवा संचार संबंधी समस्या के कारण अलर्ट जारी हुआ। विमान के ट्रांसपॉन्डर रिकॉर्ड, एयर ट्रैफिक कंट्रोल के साथ हुए संचार और उड़ान के दौरान दर्ज जानकारी से घटना की वजह स्पष्ट करने में मदद मिल सकती है। फिलहाल जांच के अंतिम निष्कर्ष सार्वजनिक नहीं हुए हैं।
इस घटना ने एक बार फिर दिखाया है कि विमानन सुरक्षा में किसी भी संभावित खतरे के संकेत को गंभीरता से लिया जाता है। भले ही बाद में अलर्ट गलत साबित हो, सुरक्षा एजेंसियों के लिए पहले यात्रियों और चालक दल की सुरक्षा सुनिश्चित करना जरूरी होता है। अब सबकी नजर जांच के नतीजों पर है, जिससे स्पष्ट हो सकेगा कि फ्रैंकफर्ट-दिल्ली फ्लाइट में स्क्वॉक 7500 कोड सक्रिय होने के पीछे वास्तविक कारण क्या था।



