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इटली में देशव्यापी हड़ताल से मचा हड़कंप

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इटली में 30 अक्टूबर को देशव्यापी हड़ताल और विरोध प्रदर्शनों के चलते कई शहरों में तनाव की स्थिति बन गई। हजारों की संख्या में छात्र, कर्मचारी, मजदूर और ट्रेड यूनियन से जुड़े लोग सड़कों पर उतर आए। प्रदर्शनकारियों ने बढ़ती महंगाई, कम वेतन, शिक्षा और सार्वजनिक सेवाओं के लिए पर्याप्त बजट नहीं मिलने तथा सैन्य खर्च बढ़ाने के खिलाफ आवाज उठाई। कुछ जगहों पर प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच झड़पें हुईं, जिसके बाद पुलिस को भीड़ को नियंत्रित करने के लिए वाटर कैनन का इस्तेमाल करना पड़ा।

यह देशव्यापी आंदोलन Unione Sindacale di Base (USB) ट्रेड यूनियन की ओर से बुलाई गई 24 घंटे की आम हड़ताल का हिस्सा था। इसके तहत इटली के 40 से अधिक शहरों में प्रदर्शन आयोजित किए गए। आंदोलन में छात्र संगठनों के साथ शिक्षक, परिवहन कर्मचारी, किसान, टैक्सी चालक और बंदरगाहों पर काम करने वाले मजदूर भी शामिल हुए। प्रदर्शनकारियों की मांग थी कि महंगाई के अनुपात में वेतन बढ़ाया जाए और आम लोगों को रोजमर्रा के खर्चों से राहत देने के लिए ठोस कदम उठाए जाएं।

ट्यूरिन में प्रदर्शन के दौरान स्थिति उस समय तनावपूर्ण हो गई, जब कुछ छात्र और वामपंथी कार्यकर्ता प्रीफेक्चर भवन की सुरक्षा के लिए लगाए गए पुलिस बैरिकेड के करीब पहुंच गए। उन्हें पीछे हटाने के लिए पुलिस ने वाटर कैनन का इस्तेमाल किया। इस दौरान प्रदर्शनकारियों और सुरक्षा बलों के बीच धक्का-मुक्की और झड़प की खबरें सामने आईं। पुलिस ने संवेदनशील सरकारी इमारतों के आसपास सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर रखी थी।

राजधानी रोम में भी हजारों लोगों ने मार्च निकाला। प्रदर्शनकारी टर्मिनी रेलवे स्टेशन से आगे बढ़ते हुए कोलोसियम के आसपास पहुंचे। कुछ लोगों ने सड़कों पर कूड़ेदान रखकर आग लगा दी। बाद में प्रदर्शनकारियों का एक समूह संसद की ओर बढ़ने की कोशिश करने लगा, जिसे पुलिस ने वाटर कैनन और बैरिकेड की मदद से रोकने का प्रयास किया। इस घटनाक्रम में आठ लोगों को हिरासत में लिए जाने की खबर है।

मिलान में भी प्रदर्शनकारियों ने शहर की रिंग रोड पर मार्च किया और यातायात प्रभावित किया। कुछ प्रदर्शनकारियों ने फ्लेयर्स जलाए और वस्तुओं में आग लगा दी। शहर में पहले भी हिंसक प्रदर्शनों और तोड़फोड़ की घटनाएं सामने आ चुकी थीं, इसलिए प्रशासन ने अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया था। अधिकारियों को आशंका थी कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन के बीच कुछ समूह हिंसा या सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने की कोशिश कर सकते हैं।

जेनोआ में आंदोलन का बड़ा केंद्र बंदरगाह बना, जहां करीब 15 हजार बंदरगाह कर्मचारी, छात्र और अन्य प्रदर्शनकारी पहुंचे। उनका विरोध बंदरगाहों के जरिए युद्धग्रस्त क्षेत्रों में हथियारों की ढुलाई के खिलाफ था। प्रदर्शनकारियों ने संघर्ष वाले इलाकों में नाविकों की मौतों और समुद्री व्यापारिक मार्गों के सैन्य इस्तेमाल पर भी चिंता जताई। इस विरोध का संबंध यूरोप और दुनिया के दूसरे हिस्सों में चल रहे बंदरगाह मजदूरों के आंदोलन से भी था।

प्रदर्शनकारियों की एक प्रमुख मांग सरकार की खर्च प्राथमिकताओं में बदलाव की भी रही। उनका कहना था कि सैन्य और रक्षा खर्च बढ़ाने के बजाय शिक्षा, स्वास्थ्य, आवास और सार्वजनिक सुविधाओं पर अधिक पैसा लगाया जाना चाहिए। छात्रों ने महंगी पढ़ाई और किराये को लेकर चिंता जताई, जबकि मजदूर संगठनों ने वेतन बढ़ाने और बिजली, गैस तथा जरूरी सामान की कीमतों में राहत देने की मांग की।

इटली में हुए ये प्रदर्शन यूरोप के कई अन्य देशों में चल रहे आंदोलनों से भी जुड़े हुए हैं। फ्रांस, स्पेन, बेल्जियम और अल्बानिया में भी महंगाई, जीवन-यापन की बढ़ती लागत और सरकारी नीतियों को लेकर विरोध प्रदर्शन हुए हैं। वहीं, हथियारों की ढुलाई के खिलाफ बंदरगाह मजदूरों की हड़ताल में कई देशों के श्रमिक संगठनों ने हिस्सा लिया।

कुल मिलाकर, इटली की देशव्यापी हड़ताल ने सरकार के सामने महंगाई, वेतन, शिक्षा और सैन्य खर्च जैसे मुद्दों पर लोगों की नाराजगी को सामने ला दिया है। ज्यादातर शहरों में प्रदर्शन शांतिपूर्ण रहे, लेकिन कुछ स्थानों पर पुलिस के साथ टकराव और आगजनी की घटनाएं भी हुईं। प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था कड़ी रखी है, जबकि मजदूर और छात्र संगठन अपनी मांगों को लेकर आंदोलन जारी रखने के संकेत दे रहे हैं।

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