
'दो दिन के अनशन में ही समझ आ गया दर्द', अभिजीत दीपके बोले
दिल्ली के जंतर-मंतर पर जारी आंदोलन के बीच सोनम वांगचुक के अस्पताल में भर्ती होने के बाद प्रदर्शन का नेतृत्व संभाल रहे सीजेपी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दीपके ने भूख हड़ताल को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि अनशन पर बैठने के महज दो दिन के भीतर ही उन्हें एहसास हो गया कि बिना भोजन के लगातार आंदोलन करना कितना कठिन होता है। दीपके ने कहा कि अब उन्हें समझ में आ रहा है कि पिछले कई दिनों तक भूख हड़ताल पर बैठे सोनम वांगचुक किस तरह की शारीरिक और मानसिक चुनौतियों का सामना कर रहे होंगे। उन्होंने कहा कि उनकी अपनी तबीयत भी दूसरे दिन से बिगड़ने लगी है, जिससे उन्हें लंबे अनशन की गंभीरता का वास्तविक अनुभव हुआ है।
जंतर-मंतर पर प्रदर्शनकारियों को संबोधित करते हुए अभिजीत दीपके ने कहा कि सोनम वांगचुक का संघर्ष केवल एक व्यक्ति का आंदोलन नहीं है, बल्कि लाखों छात्रों और युवाओं की आवाज है। उन्होंने कहा कि वांगचुक की तबीयत खराब होने के कारण उन्हें अस्पताल ले जाया गया, लेकिन इससे आंदोलन कमजोर नहीं पड़ेगा। उनके अनुसार, आंदोलन से जुड़े कार्यकर्ता और छात्र पूरी प्रतिबद्धता के साथ अपनी मांगों को लेकर डटे रहेंगे। दीपके ने यह भी स्पष्ट किया कि आंदोलन का उद्देश्य शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीके से अपनी बात सरकार तक पहुंचाना है तथा इसके लिए निर्धारित कार्यक्रमों में कोई बदलाव नहीं किया जाएगा।
इस आंदोलन में वामपंथी छात्र संगठन ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA) के कई छात्र भी समर्थन में भूख हड़ताल पर बैठे हुए हैं। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि शिक्षा व्यवस्था से जुड़े मुद्दों और छात्रों की मांगों को लेकर यह अभियान आगे भी जारी रहेगा। उनका दावा है कि देशभर के विभिन्न विश्वविद्यालयों और छात्र संगठनों से लगातार समर्थन मिल रहा है। इसी क्रम में 20 जुलाई को प्रस्तावित संसद मार्च की तैयारियां भी तेज कर दी गई हैं और बड़ी संख्या में छात्रों एवं समर्थकों के इसमें शामिल होने की संभावना जताई जा रही है।
उधर, संसद मार्च को देखते हुए दिल्ली पुलिस ने राजधानी में सुरक्षा व्यवस्था और कड़ी कर दी है। संवेदनशील इलाकों में अतिरिक्त पुलिस बल की तैनाती, बैरिकेडिंग, वाहनों की जांच और चौबीसों घंटे निगरानी की व्यवस्था की गई है ताकि किसी भी तरह की अप्रिय स्थिति से बचा जा सके। प्रशासन का कहना है कि कानून-व्यवस्था बनाए रखना उसकी प्राथमिक जिम्मेदारी है, जबकि प्रदर्शनकारी शांतिपूर्ण तरीके से मार्च निकालने की बात दोहरा रहे हैं। सुरक्षा एजेंसियां पूरे घटनाक्रम पर लगातार नजर बनाए हुए हैं।
सोनम वांगचुक को स्वास्थ्य बिगड़ने के बाद अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहां उनका उपचार जारी है। इस बीच उनके समर्थकों का कहना है कि अस्पताल में भर्ती होने के बावजूद आंदोलन समाप्त नहीं हुआ है और उनकी अपील के अनुसार लोकतांत्रिक तरीके से विरोध जारी रहेगा। दूसरी ओर, आंदोलन को लेकर राजनीतिक बहस भी तेज हो गई है और विभिन्न सामाजिक संगठनों के साथ कई राजनीतिक नेताओं ने भी इस पूरे घटनाक्रम पर अपनी प्रतिक्रिया दी है। आने वाले दिनों में अदालत की कार्यवाही, वांगचुक के स्वास्थ्य और संसद मार्च के घटनाक्रम पर सभी की नजरें टिकी रहेंगी, क्योंकि इन्हीं के आधार पर आंदोलन की अगली रणनीति तय होगी।



