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ईरान (Iran) में देश की युवा पीढ़ी यानी Gen‑Z (Gen‑Z youth, protests) के बड़े स्तर पर विरोध प्रदर्शन अचानक उभरे हैं, जो सामाजिक तथा राजनीतिक मायनों में भारी बगावत (massive rebellion) के रूप में सामने आ रहे हैं। जनता अब सिर्फ़ छोटी‑मोटी नाराज़गी तक सीमित नहीं है, बल्कि व्यापक स्तर पर सरकार और सुप्रीम लीडर अयातोल्लाह अली खामेनेई (Ali Khamenei) के खिलाफ आवाज़ उठा रही है।हुए हैं:
- आर्थिक दबाव (economic hardships): देश में महंगाई, मुद्रा गिरावट और रोज़मर्रा के खर्चों में बढ़ोतरी ने जनता विशेषकर युवाओं में गहरा असंतोष पैदा किया है। मौजूदा आर्थिक व्यस्था के चलते जनता को अपनी आज़ादीयों और रोज़गार के अवसरों को लेकर चिंता है।
- सामाजिक आज़ादी और हिजाब विरोध (social freedom, hijab resistance): पिछले कुछ समय से महिलाओं द्वारा अनिवार्य हिजाब कानून (compulsory hijab laws, dress code protests) के खिलाफ खुलकर विरोध जारी है और युवा वर्ग इसे व्यापक सामाजिक संघर्ष का हिस्सा मान रहा है।
- राजनीतिक असन्तोष और शासन विरोध (political discontent): लोगों ने ‘खामेनेई के खिलाफ नारे (anti‑Khamenei slogans)’ भी लगाए हैं, खासकर देशभर में फ़्रीडम और आज़ादी की मांग को लेकर जो शासन के नियंत्रण को चुनौती दे रहे हैं।
- व्यापक प्रदर्शन फैलना (protests spread): विरोध केवल एक शहर तक सीमित नहीं रहा — तेहरान के साथ‑साथ अन्य शहरों में भी लोग सड़कों पर निकल रहे हैं और अपनी आवाज़ बुलंद कर रहे हैं, जिससे सरकार के सामने आंतरिक दबाव (internal pressure) बढ़ा है।
विश्लेषकों के अनुसार यह आंदोलन सिर्फ़ एक मामूली विरोध नहीं है बल्कि देश के आर्थिक, सामाजिक और राजनीतिक समस्याओं के मिश्रित परिणाम का संकेत है, जो ईरानी युवाओं को शासन व्यवस्था के ख़िलाफ़ सड़कों पर ला रहा है।



