
ट्रंप की प्रेस सचिव का प्रैस वार रूम में विवाद
अमेरिका की व्हाइट हाउस प्रेस सचिव करोलाइन लेविट और एक वरिष्ठ पत्रकार के बीच एक बार फिर विवादित तकरार देखने को मिला है, जो अमेरिकी राजनीति और मीडिया के बीच बढ़ती तनातनी का संकेत है। 15 जनवरी 2026 को आयोजित एक प्रेस ब्रीफिंग के दौरान द हिल के रिपोर्टर नाय्ल स्टानाज ने ICE (Immigration and Customs Enforcement) एजेंसी के बारे में प्रशासन के रवैये पर सवाल उठाया और कहा कि हाल ही में मिनियापोलिस में एक नागरिक की हत्या से जुड़े गंभीर आरोपों पर सरकार को स्पष्ट करना चाहिए। इस सवाल के जवाब में लेविट ने तीखी प्रतिक्रिया दी और स्टानाज को “left-wing activist” यानी वाम-पंथी कार्यकर्ता कहते हुए पत्रकारिता की नैतिकता पर सवाल खड़े कर दिए। उनके इस जवाब ने प्रेस रूम में तल्ख माहौल पैदा कर दिया और अमेरिकी मीडिया तथा राजनीतिक गलियारों में नई बहस छेड़ दी है।
पत्रकार के सवाल में यह भी शामिल था कि ICE हिरासत में 32 लोगों के मौत के आंकड़े और नागरिकों के अनुचित गिरफ्तारी के मामलों पर प्रशासन क्या कदम उठा रहा है। इस तरह के संवेदनशील विषय पर पत्रकार का सवाल उठाते ही लेविट ने न केवल इसका प्रत्यक्ष उत्तर देने से इंकार किया, बल्कि मीडिया की विश्वसनीयता पर भी प्रश्न खड़ा कर दिया और पत्रकार को “फेक पत्रकार” और वाम-पंथी एजेंडा वाला बता दिया। इस दौरान उन्होंने संवाददाता को कहा कि वह सीधी तथ्यों की रिपोर्टिंग करे और “क्रॉकेड और पक्षपाती” रुख न अपनाए।
यह विवाद ऐसे समय में आया है जब अमेरिकी सरकार की प्रवक्ता करोलाइन लेविट ने कई मौक़ों पर मीडिया के सवालों पर तीखी प्रतिक्रियाएँ दी हैं और अक्सर संवाददाताओं की सवालों की पृष्ठभूमि को राजनीतिक रूप से पक्षपाती बताने की कोशिश की है। लेविट व्हाइट हाउस की सबसे कम उम्र की प्रेस सचिव हैं और उनके तेज-तर्रार अंदाज़ की वजह से अक्सर आलोचना और समर्थन दोनों का सामना करना पड़ा है।
विश्लेषकों के अनुसार, अमेरिका में संवाददाता कक्ष में चल रही यह तकरार आज की राजनीतिक भावनाओं की एक झलक है, जहाँ सरकार और मीडिया के बीच अक्सर “मायने रखती रिपोर्टिंग” और “पक्षपात” के आरोप-प्रत्यारोप की राजनीति चलती रहती है। इसके पीछे यह गहरा प्रश्न है कि लोकतांत्रिक देशों में प्रेस की भूमिका क्या होनी चाहिए और सार्वजनिक हित के विषयों पर सवाल पूछने की जवाबदेही किस तरह निभाई जानी चाहिए।
इस घटना ने अमेरिकी पत्रकारिता के भीतर विचार-व्यवस्था को भी चुनौती दी है, जहाँ प्रेस सचिव जैसे उच्च प्रशासनिक अधिकारियों का रवैया और संवाददाताओं की आज़ादी दोनों की सीमाएँ बार-बार सार्वजनिक बहस का विषय बन रही हैं। अमेरिकन और अंतरराष्ट्रीय मीडिया दोनों ही इस मामले का विश्लेषण कर रहे हैं कि क्या यह सिर्फ एक व्यक्तिगत भड़की हुई प्रतिक्रिया थी या व्हाइट हाउस की तीव्र घोषणात्मक शैली का प्रतिबिंब।



