Advertisement
लाइव अपडेटसमाचार
Trending

उत्तर भारत गर्मी से नहीं, ठंड से जूझ रहा

Advertisement
Advertisement

उत्तर भारत इन दिनों मौसम की कठोर परिस्थितियों से जूझ रहा है, जहां व्यापक शीतलहर (cold wave) का असर लगातार बढ़ रहा है और दैनिक जीवन को प्रभावित कर रहा है। मौसम विभाग के नवीनतम आंकड़ों के अनुसार राजधानी दिल्ली में 2023 के बाद का सबसे ठंडा जनवरी रिकॉर्ड किया गया है, जहां न्यूनतम तापमान मात्र लगभग 3.2 डिग्री सेल्सियस रहा। इसके साथ ही पंजाब, हरियाणा और राजस्थान के कई हिस्सों में तापमान शून्य डिग्री के आसपास या उससे भी नीचे पहुंचा है, जिससे लोगों को सर्दी से बचाव के लिए अतिरिक्त सावधानियाँ बरतनी पड़ रही हैं।

विशेष रूप से हरियाणा के गुरुग्राम और पंजाब के बठिंडा में न्यूनतम तापमान लगभग 0.6 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जबकि राजस्थान के सीकर जिले के फतेहपुर में तापमान माइनस 0.4 डिग्री तक गिर गया। फरीदाबाद, रेवाड़ी और आसपास के इलाकों में पाला जमने की खबरों के साथ-साथ वाहनों और खेतों पर ठंड के प्रभाव को स्पष्ट रूप से देखा जा रहा है।

घने कोहरे (dense fog) ने भी जनजीवन की मुश्किलें और बढ़ा दी हैं। सुबह के समय दिल्ली-एनसीआर, पंजाब, हरियाणा और राजस्थान के कई इलाकों में दृश्यता कम होने के कारण सड़क और रेल यातायात प्रभावित हुआ है। इससे हर आने-जाने वाले नागरिक को सावधानी बरतनी पड़ रही है, जबकि विमान सेवाओं और ट्रेन शेड्यूल में भी देरी देखी गई है।

राजस्थान के कई शहरों और कस्बों में पारा रात के समय 8 डिग्री सेल्सियस से नीचे बना रहा, और घने कोहरे के कारण यातायात भी प्रभावित हुआ। लोग सुबह-शाम अपने गतिविधियों को तय करने में कठिनाई महसूस कर रहे हैं और घरों में अलाव जलाकर ठंड से बचने का प्रयास कर रहे हैं।

मौसम विभाग (India Meteorological Department — IMD) ने चेतावनी जारी की है कि आगामी 48 से 72 घंटों तक शीतलहर और कोहरे की स्थिति जारी रह सकती है, जिससे तापमान में अधिक गिरावट और ठंड का प्रभाव बढ़ने की संभावना है। विभाग ने विशेषकर बच्चों और बुजुर्गों से घर के अंदर रहकर सर्दी से बचाव के उपाय अपनाने की सलाह दी है।

कृषि के लिहाज से भी यह मौसम चिंता का विषय बन गया है। किसान सुबह-शाम खेतों पर पाले की चादर के संपर्क में आ रहे हैं, जिसकी वजह से गेहूं जैसी फसलों को लाभ मिलता है, लेकिन आलू, सरसों और सब्जी फसलों को नुकसान का खतरा बना हुआ है और कृषि वैज्ञानिक हल्की सिंचाई की सलाह दे रहे हैं।

आर्थिक और सामाजिक गतिविधियाँ भी ठंड के प्रभाव से प्रभावित हो रही हैं। बाजारों और सार्वजनिक स्थानों पर लोगों की संख्या कम देखने को मिल रही है और कार्यालयों तथा स्कूलों में उपस्थिति घट रही है। चिकित्सा विशेषज्ञों ने सर्दी से जुड़ी बीमारियों जैसे खोखला गला, खांसी और टांगों-हाथों में ठंड से बचने हेतु गर्म कपड़े, पौष्टिक भोजन और पर्याप्त मात्रा में पानी लेने का सुझाव दिया है।

इस प्रकार, उत्तर भारत में शीतलहर, कोहरा और गिरते तापमान की संयुक्त स्थिति से जनजीवन पर व्यापक प्रभाव पड़ा है और आने वाले दिनों में भी इन कठिन मौसम की चुनौतियों से निपटने के लिए सावधानियाँ बरतने की आवश्यकता बनी हुई है।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button
YouTube
LinkedIn
Share