
संसद के बजट सत्र के दौरान सोमवार से लोकसभा में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर विस्तृत चर्चा की शुरुआत हो गई है। यह चर्चा बजट सत्र का एक अहम हिस्सा मानी जाती है, क्योंकि इसमें सरकार अपने कामकाज, नीतियों और भविष्य की प्राथमिकताओं पर संसद के सामने जवाबदेह होती है, वहीं विपक्ष को सरकार की नीतियों की आलोचना और सवाल उठाने का अवसर मिलता है।
लोकसभा में यह बहस तीन दिनों—2, 3 और 4 फरवरी तक चलने की संभावना है। चर्चा के दौरान सत्तापक्ष के सांसद राष्ट्रपति के अभिभाषण में बताए गए सरकार के विजन और उपलब्धियों का समर्थन करेंगे, जबकि विपक्ष महंगाई, बेरोजगारी, अर्थव्यवस्था, किसानों की स्थिति, सामाजिक मुद्दों और हालिया बजट से जुड़े सवालों को उठाएगा। इस दौरान सदन में तीखी बहस और राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप देखने को मिल सकते हैं।
संसदीय कार्य मंत्रणा समिति (Business Advisory Committee) के फैसले के अनुसार, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 4 फरवरी को लोकसभा में धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा का जवाब देंगे। पीएम मोदी का यह भाषण बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि इसमें वह न सिर्फ विपक्ष के आरोपों का जवाब देंगे, बल्कि बजट 2026-27 और सरकार के आगामी रोडमैप को लेकर भी अपना पक्ष रख सकते हैं। आमतौर पर प्रधानमंत्री के इस जवाब के बाद ही धन्यवाद प्रस्ताव को सदन की मंजूरी मिलती है।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यह चर्चा आने वाले समय में सरकार और विपक्ष की रणनीति को भी दर्शाएगी। बजट सत्र के दौरान राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव की बहस को संसद की दिशा तय करने वाला चरण माना जाता है, क्योंकि इसी से यह साफ होता है कि सरकार अपने एजेंडे को लेकर कितनी मजबूती से आगे बढ़ेगी और विपक्ष किन मुद्दों को केंद्र में रखेगा।



