
उत्तर प्रदेश के वाराणसी में मणिकर्णिका घाट के पुनर्विकास कार्य को लेकर सोशल मीडिया पर जारी विवाद अब गंभीर मोड़ पर पहुँच चुका है। पुलिस ने एआई (AI) तकनीक से बनाई गई कथित फ़र्जी तस्वीरों व वीडियो को फैलाने के आरोप के चलते आम आदमी पार्टी (AAP) के सांसद संजय सिंह, कांग्रेस नेता पप्पू यादव और अन्य सहित कुल 8 लोगों के खिलाफ अलग-अलग FIR दर्ज की है। इस कार्रवाई से राजनीतिक माहौल गरमा गया है और विवाद का राष्ट्रीय स्तर पर भी राजनीतिकरण होता दिख रहा है।
पुलिस के अनुसार, इन FIR में उन लोगों के नाम शामिल हैं जिनके खिलाफ सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म X (पूर्व में Twitter) पर मणिकर्णिका घाट के पुनर्विकास कार्य से जुड़े फ़र्ज़ी, भ्रामक और AI से संशोधित छवियाँ (images) व वीडियो साझा करने का आरोप है। इन पोस्टों में ऐसा दावा किया गया कि घाट के पुनर्निर्माण के दौरान हिंदू देवी-देवताओं की मूर्तियों तथा ऐतिहासिक तत्वों को नुकसान पहुँचाया गया, जिससे लोगों की धार्मिक भावनाओं को आघात पहुँचाने तथा सामाजिक अस्थिरता फैलाने का प्रयास हुआ।
वाराणसी के चौक थाने में दर्ज शिकायत में यह भी बताया गया कि एक व्यक्ति (नाम: Ashutosh Potnis) ने 16 जनवरी की रात को AI-जनित और भ्रामक छवियाँ शेयर कीं, जिनके कारण आमजन में गलत धारणा बनी और प्रतिक्रिया-आधारित टिप्पणियों की बाढ़ आ गई। पुलिस का दावा है कि इन तस्वीरों के मुताबिक़ पुनर्विकास कार्य को गलत रूप से प्रस्तुत किया गया, जबकि वास्तविकता में घाट पर चल रहे सौंदर्यीकरण व श्मशान सुविधाओं के सुदृढ़ीकरण का काम जारी है।
प्रशासन का मानना है कि इन फ़र्ज़ी पोस्टों का उद्देश्य न केवल धार्मिक भावनाओं को भड़काना था, बल्कि सरकारी कार्यों के प्रति नकारात्मक माहौल बनाकर सामाजिक सद्भाव को भी प्रभावित करना था। पुलिस ने बताया कि FIR उन लोगों के खिलाफ दर्ज की गई हैं जिन्होंने इन फ़र्ज़ी पोस्टों को पोस्ट, रिपोस्ट या उनमें टिप्पणी की।
इस मामले में AAP सांसद संजय सिंह ने कार्रवाई की निंदा करते हुए इसे राजनीतिक प्रतिशोध बताया है। उन्होंने कहा कि जब काशी के ऐतिहासिक परिसर और नागरिक कार्य चल रहे हैं, तब इस तरह की एफआईआर उनके खिलाफ दर्ज करना गलत संदेश देता है और इसे राजनीतिक रूप से उपयोग किया जा रहा है। वहीं कांग्रेस नेता पप्पू यादव सहित अन्य प्रतिवादियों ने भी सरकार द्वारा विरोध आवाज़ों को दबाने का आरोप लगाया है।
सामान्य जनता में इस विवाद को लेकर दो धड़ों में राय विभाजित है — कुछ का मानना है कि घाट का पुनर्विकास धार्मिक स्थल की पवित्रता और सुविधा को बढ़ाएगा, वहीं अन्य लोग यह कहते हैं कि भावनात्मक तथा ऐतिहासिक तत्वों को देखते हुए किसी भी कार्य में पारदर्शिता होनी चाहिए और फ़र्ज़ी दावों के कारण सामाजिक तनाव फैल सकता है।
यह विवाद ऐसे समय में उभरा है जब वाराणसी में ऐतिहासिक स्थलों के पुनर्विकास की प्रक्रिया चल रही है और इस पर पहले भी मतभेद उत्पन्न होते रहे हैं। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि कोई भी धार्मिक संरचना प्रभावित नहीं हुई है, और सभी कार्य धार्मिक तथा सांस्कृतिक मान्यताओं का सम्मान करते हुए किए जा रहे हैं। साथ ही पुलिस ने भविष्य में भी गलत सूचना फैलाने वालों के खिलाफ सख़्त कानूनी कार्रवाई की चेतावनी दी है।



