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रान-अमेरिका युद्ध पर ट्रंप का बड़ा बयान

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मिडिल ईस्ट में चल रहे ईरान-अमेरिका युद्ध के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने साफ कर दिया है कि फिलहाल वह ईरान के साथ युद्ध खत्म करने के लिए किसी भी तरह का समझौता करने के पक्ष में नहीं हैं। ट्रंप का कहना है कि ईरान बातचीत के जरिए युद्ध समाप्त करना चाहता है, लेकिन अभी तक जो शर्तें सामने आई हैं वे अमेरिका के लिए पर्याप्त नहीं हैं। उन्होंने संकेत दिया कि अगर कोई समझौता होता भी है तो उसमें ईरान को अपने परमाणु कार्यक्रम को पूरी तरह छोड़ना होगा, तभी अमेरिका युद्ध रोकने पर विचार करेगा।

डोनाल्ड ट्रंप ने एक इंटरव्यू में कहा कि ईरान समझौते की इच्छा जता रहा है, लेकिन अमेरिका किसी कमजोर या अधूरे समझौते को स्वीकार नहीं करेगा। उनके अनुसार अमेरिका का मुख्य लक्ष्य यह सुनिश्चित करना है कि ईरान भविष्य में परमाणु हथियार विकसित न कर सके। ट्रंप ने यह भी दावा किया कि हालिया अमेरिकी और इजरायली हमलों में ईरान की सैन्य क्षमता को भारी नुकसान पहुंचा है और कई मिसाइल तथा ड्रोन सिस्टम नष्ट हो चुके हैं।

युद्ध के दौरान अमेरिका ने ईरान के महत्वपूर्ण तेल निर्यात केंद्र खर्ग द्वीप पर भी हमला किया है। ट्रंप ने कहा कि इस हमले में द्वीप के कई हिस्से तबाह हो गए, हालांकि ऊर्जा ढांचे को पूरी तरह नष्ट नहीं किया गया ताकि भविष्य में उसे फिर से बनाया जा सके। यह संघर्ष 28 फरवरी को तब शुरू हुआ जब अमेरिका और इजरायल ने संयुक्त सैन्य कार्रवाई करते हुए ईरान के कई ठिकानों को निशाना बनाया। इसके बाद ईरान ने भी अमेरिका और इजरायल से जुड़े ठिकानों पर मिसाइल और ड्रोन हमले शुरू कर दिए।

इस युद्ध का असर वैश्विक स्तर पर भी दिखाई देने लगा है। फारस की खाड़ी का अहम समुद्री मार्ग स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज तनाव का केंद्र बन गया है, जहां से दुनिया के बड़े हिस्से का तेल गुजरता है। युद्ध के कारण इस रास्ते पर खतरा बढ़ने से अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतों में तेज उछाल आया है। ट्रंप ने कहा कि अमेरिका इस जलमार्ग की सुरक्षा के लिए अन्य देशों के साथ मिलकर काम करने की योजना बना रहा है और कई देशों से युद्धपोत भेजने की अपील की गई है।

हालांकि ट्रंप के सख्त रुख के बावजूद युद्ध को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता बढ़ती जा रही है। कई देशों और कूटनीतिक संगठनों ने दोनों पक्षों से संयम बरतने और बातचीत के जरिए समाधान निकालने की अपील की है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि जल्द ही कूटनीतिक रास्ता नहीं निकला तो यह संघर्ष पूरे मिडिल ईस्ट में बड़े क्षेत्रीय संकट का रूप ले सकता है।

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