
बांग्लादेश की राजनीति में आज एक बड़ा मोड़ आया है क्योंकि बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) के कार्यवाहक अध्यक्ष तारिक रहमान 17 साल के निर्वासन के बाद अपने देश वापस लौट आए हैं। वह पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया के बेटे हैं और लंबे समय से BNP की सक्रिय राजनीति से बाहर थे। उनकी यह वापसी राजनीतिक रूप से बेहद संवेदनशील समय में हुई है, जब फरवरी 2026 के आम चुनाव का समय नज़दीक है और देश का राजनीतिक माहौल काफी तनावपूर्ण है।
तारिक रहमान का स्वदेश लौटना BNP के लिए ऊर्जा और नेतृत्व को नई दिशा देने जैसा माना जा रहा है, क्योंकि वे पार्टी के प्रमुख चेहरों में से एक हैं और आगामी चुनाव में प्रधानमंत्री पद के संभावित दावेदार के रूप में उभर रहे हैं। उनके समर्थकों ने ढाका एयरपोर्ट पर भी भारी संख्या में भीड़ जुटाई थी, जो उनके राजनीतिक प्रभाव का संकेत है।
भारत के लिए क्यों है यह अच्छी खबर?
विशेषज्ञों का मानना है कि रहमान की वापसी भारत-बांग्लादेश संबंधों के लिए सकारात्मक संकेत दे सकती है, खासकर तब जब मौजूदा राजनीति में देश की सबसे अधिक समर्थित पार्टी अवामी लीग को चुनाव लड़ने से रोका गया है और बांग्लादेश में कुछ कट्टरपंथी गुटों के उदय को लेकर भारत चिंतित है। BNP को भारत अधिक लोकतांत्रिक और उदार विकल्प के तौर पर देख रहा है, जिससे नई सरकार बनने पर दोनों देशों के बीच संबंधों में सुधार की संभावना बनी रह सकती है।
हालाँकि, बांग्लादेश में राजनीतिक तनाव और हिंसा की खबरें भी हैं, और यह स्पष्ट नहीं है कि चुनाव का परिणाम किस ओर जाएगा। भारत क्षेत्रीय सुरक्षा, स्थिरता और लोकतांत्रिक प्रक्रिया की रक्षा की दृष्टि से इस स्थिति पर करीबी नजर रखे हुए है।



