
Ola-Uber से बस सेवा चलाने के प्रस्ताव पर दिल्ली सरकार का मंथन
दिल्ली में लगातार बिगड़ती हवा की गुणवत्ता और दिन-प्रतिदिन बढ़ते ट्रैफिक जाम की समस्या को लेकर दिल्ली सरकार अब नए और व्यावहारिक समाधान तलाशने में जुट गई है। इसी क्रम में मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता की अध्यक्षता में हुई एक उच्चस्तरीय बैठक में Ola और Uber जैसी निजी कैब कंपनियों को राजधानी में बस सेवाएं चलाने की अनुमति देने के विचार पर विस्तार से चर्चा की गई। सरकार का मानना है कि यदि निजी कंपनियों की तकनीकी क्षमता, डिजिटल प्लेटफॉर्म और संचालन अनुभव का इस्तेमाल सार्वजनिक परिवहन को मजबूत करने में किया जाए, तो लोग निजी कारों और दोपहिया वाहनों की जगह साझा परिवहन को प्राथमिकता देंगे।
इससे सड़कों पर वाहनों का दबाव कम होगा, ट्रैफिक जाम की समस्या से राहत मिलेगी और वाहन उत्सर्जन घटने से वायु प्रदूषण पर भी सकारात्मक असर पड़ेगा। बैठक में यह भी कहा गया कि यह मॉडल मेट्रो और डीटीसी बस सेवाओं के साथ एक सहायक व्यवस्था के रूप में काम कर सकता है, जिससे अंतिम मील कनेक्टिविटी बेहतर होगी। इसके अलावा, सरकार ने प्रदूषण नियंत्रण के लिए नियमों में सख्ती लाने पर भी विचार किया, जिसमें बिना पीयूसी (Pollution Under Control) सर्टिफिकेट के चलने वाले वाहनों पर 10 हजार रुपये तक का भारी जुर्माना लगाने का प्रस्ताव शामिल है।
अधिकारियों का मानना है कि सख्त निगरानी और दंडात्मक कार्रवाई से लोग नियमों का पालन करने को मजबूर होंगे। हालांकि सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि Ola-Uber बस सेवा से जुड़ा यह प्रस्ताव फिलहाल केवल चर्चा और अध्ययन के चरण में है और अभी इसे लागू करने को लेकर कोई अंतिम फैसला नहीं लिया गया है। आने वाले दिनों में इस योजना के कानूनी ढांचे, आर्थिक व्यवहार्यता और आम जनता पर पड़ने वाले प्रभावों का गहराई से आकलन करने के बाद ही कोई ठोस निर्णय किया जाएगा।
कुल मिलाकर, यह पहल दिल्ली को प्रदूषण और ट्रैफिक की गंभीर समस्या से राहत दिलाने की दिशा में सरकार की व्यापक और दीर्घकालिक रणनीति का हिस्सा मानी जा रही है।



