
“SIR के बहाने जनता के आरक्षण और नौकरी-अधिकार छीने जा रहे हैं”
समाजवादी पार्टी (सपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने 28 नवंबर 2025 को कानपुर देहात के भोगनीपुर में एक जनसभा को संबोधित करते हुए केंद्र और राज्य सरकार पर कड़ा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि वर्तमान में चल रही वोटर-रोल पुनरीक्षण प्रक्रिया, जिसे SIR कहा जाता है, दरअसल जनता के संविधान से मिले आरक्षण, नौकरी और वोट ڈالने के अधिकार को छीनने का एक माध्यम है।
अखिलेश ने कहा कि SIR के बहाने दलित, पिछड़े और आदिवासी समुदायों को निशाना बनाया जा रहा है — उनके आरक्षण अधिकार और सामाजिक पहचान को मिटाने की साजिश की जा रही है। “बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर ने जो अधिकार दिए, उन्हें SIR के ज़रिए छीना जाएगा”, उन्होंने सभा में कहा।
सिर्फ आरक्षण ही नहीं, अखिलेश ने बेरोज़गारी और रोजगार की कमी को वर्तमान सरकार की विफलता बताया। उन्होंने कहा कि अगर सरकार ने नए रोजगार दिए होते, तो इतने युवा बेरोज़ार नहीं होते — लेकिन आज SIR, नौकरी-अधिकार और वोटर-लिस्ट दोनों पर सवाल खड़ा कर रही है।
उनका यह बयान इस पृष्ठभूमि में आया है कि SIR प्रक्रिया कुछ जिलों में विवादित भी रही है — सपा का कहना है कि कुछ मामलों में मतदाताओं के नाम बिना उचित वजह हटाए जा रहे हैं, फॉर्म वितरण व भराई में गड़बड़ियाँ हो रही हैं, और बूथ-स्तर के अधिकारियों (BLO) पर असहनीय दबाव बनाया जा रहा है।
सपा ने चुनाव आयोग से मांग की है कि SIR प्रक्रिया की समयसीमा बढ़ाई जाए, ताकि हर मतदाता को फॉर्म भरने और जमा करने का पर्याप्त मौका मिल सके। साथ ही, उनकी यह भी मांग है कि मतदाता-सूची निर्माण को पारदर्शी बनाया जाए, और किसी भी तरह की गड़बड़ी या हेरफेर को रोका जाए।
इस प्रकार, SIR विवाद राजनीतिक रूप से गरमाता जा रहा है — जहां एक ओर सरकार इसे मतदाता नामावली अपडेट का साधन बता रही है, वहीं दूसरी ओर विपक्ष इसे संविधानिक अधिकारों पर हमला बता रहा है।



