
INDIA Bloc March: संसद से चुनाव आयोग तक विपक्ष का मार्च आज
दिल्ली में मंगलवार 6 अक्टूबर को चुनाव आयोग और Special Intensive Revision यानी SIR को लेकर सियासी घमासान और तेज होने वाला है। INDIA ब्लॉक के सांसद संसद भवन से निर्वाचन आयोग के दफ्तर तक विरोध मार्च निकालने की तैयारी में हैं। विपक्षी दलों का यह प्रदर्शन मतदाता सूची में कथित गड़बड़ियों और SIR की प्रक्रिया को लेकर है। इस मार्च के जरिए विपक्ष मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ भी अपना विरोध दर्ज कराने वाला है।
कार्यक्रम के मुताबिक विपक्षी सांसद सुबह करीब 10:30 बजे संसद के मकर द्वार पर इकट्ठा होंगे और इसके बाद 11 बजे निर्वाचन सदन की ओर मार्च करेंगे। विपक्ष ने इसे शांतिपूर्ण मार्च बताया है। सुरक्षा व्यवस्था को देखते हुए पुलिस ने संसद से निर्वाचन आयोग तक के रास्ते पर व्यापक इंतजाम किए हैं और यह भी महत्वपूर्ण होगा कि पुलिस सांसदों को किस स्थान तक आगे बढ़ने की अनुमति देती है।
इस विरोध प्रदर्शन में कांग्रेस के अलावा समाजवादी पार्टी समेत कई विपक्षी दलों के सांसदों के शामिल होने की बात कही गई है। सपा प्रमुख अखिलेश यादव के भी दिल्ली पहुंचकर मार्च में शामिल होने की संभावना जताई गई है। विपक्षी खेमे की ओर से 140 से ज्यादा सांसदों के मार्च में शामिल होने का दावा किया गया है। हालांकि आम आदमी पार्टी और डीएमके ने इस प्रदर्शन से दूरी बना ली है। AAP का कहना है कि वह SIR से जुड़े अपने मुद्दों को लेकर अलग लड़ाई लड़ रही है।
विपक्ष का मुख्य आरोप SIR के दौरान मतदाता सूची और मतदाता पंजीकरण की प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं से जुड़ा है। विपक्षी दलों का कहना है कि इस प्रक्रिया के जरिए बड़ी संख्या में पात्र मतदाताओं के नाम प्रभावित हो सकते हैं और चुनाव आयोग को पूरी प्रक्रिया में अधिक पारदर्शिता बरतनी चाहिए। इसी मुद्दे को लेकर विपक्ष मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग भी उठा रहा है।
SIR विवाद के बीच Form 6 को लेकर भी मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच चुका है। अदालत ने सोमवार को स्पष्ट किया कि उसने Form 6 के किसी संशोधित संस्करण को मंजूरी नहीं दी है और रिकॉर्ड सामने आने पर यह देखना चाहती है कि इसमें बदलाव किसने किया। दूसरी ओर चुनाव आयोग का कहना है कि Form 6 में बदलाव नहीं किया गया है, बल्कि SIR की प्रक्रिया के तहत उसके साथ एक अतिरिक्त घोषणा पत्र जोड़ा गया है।
इस पूरे विवाद में चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। विपक्ष की ओर से आरोप लगाया गया है कि SIR से जुड़े कुछ फैसले आयोग के सभी सदस्यों की सहमति के बिना लिए गए। चुनाव आयोग ने इस तरह के मतभेद या विभाजन के संकेतों को खारिज किया है और कहा है कि SIR से जुड़े फैसले नियमानुसार और सर्वसम्मति से लिए गए। इस मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट ने भी आयोग से संबंधित फैसलों की प्रक्रिया को लेकर स्पष्टीकरण मांगा है।
INDIA ब्लॉक ने केवल आज के मार्च तक ही अपना विरोध सीमित नहीं रखा है। विपक्ष की ओर से आने वाले दिनों में भी SIR और चुनाव आयोग से जुड़े मुद्दे को लेकर कार्यक्रम चलाने की योजना बनाई गई है। कांग्रेस ने अक्टूबर में जमीनी स्तर पर अभियान चलाने, नवंबर में दिल्ली में बड़ी रैली करने और संविधान दिवस के आसपास व्यापक कार्यक्रम आयोजित करने की रणनीति तैयार की है। हालांकि इन कार्यक्रमों में विभिन्न विपक्षी दलों की भागीदारी एक जैसी नहीं है।
वहीं, 6 अक्टूबर को देश के कुछ हिस्सों में उपचुनाव भी हो रहे हैं, जिससे आज का दिन राजनीतिक रूप से और अहम हो गया है। पश्चिम बंगाल की नंदीग्राम और रेजीनगर, तमिलनाडु की मदुरांतकम और धारापुरम, पुडुचेरी की थट्टानचावडी विधानसभा सीट और असम की नगांव लोकसभा सीट पर मतदान हो रहा है। इन छह सीटों के नतीजे 9 अक्टूबर को घोषित किए जाएंगे।
इन उपचुनावों को अलग-अलग राजनीतिक दल अपने-अपने स्तर पर महत्वपूर्ण मान रहे हैं। पश्चिम बंगाल में नंदीग्राम और रेजीनगर, तमिलनाडु में मदुरांतकम और धारापुरम तथा असम की नगांव सीट पर मुकाबले पर खास नजर है। वहीं पुडुचेरी की थट्टानचावडी सीट भी राजनीतिक समीकरणों के लिहाज से अहम मानी जा रही है। हालांकि इन उपचुनावों के नतीजों को पूरे देश की राजनीतिक स्थिति का सीधा पैमाना मानना उचित नहीं होगा।
फिलहाल दिल्ली में INDIA ब्लॉक के मार्च और SIR विवाद पर सबकी नजर है। विपक्ष इसे मतदाता अधिकार और चुनावी पारदर्शिता का मुद्दा बता रहा है, जबकि चुनाव आयोग अपने स्तर पर उठाए गए कदमों को नियमों के तहत बता रहा है। ऐसे में संसद से निर्वाचन सदन तक होने वाला आज का मार्च इस राजनीतिक टकराव को कितना नया मोड़ देता है, यह आगे की घटनाओं और सुप्रीम कोर्ट में चल रही सुनवाई से भी तय होगा।



