
पिता का दावा: कोरिया-कोरिया ही चलता था, ‘K-Pop’ और कोरिया जाना चाहती थीं बहनें
उत्तर प्रदेश के गाज़ियाबाद में एक अति दुखद घटना सामने आई है जिसमें तीन सगी नाबालिग बहनों — 12, 14 और 16 वर्ष — ने मंगलवार रात अपने घर के नौवीं मंज़िल से कूदकर आत्महत्या कर ली. इस मामले ने पूरे देश को झकझोर दिया है और परिवार तथा पुलिस दोनों अलग-अलग कोणों से जांच कर रहे हैं.
घटना के बारे में पिता चेतन कुमार ने बताया कि उनकी बेटियों का पूरी तरह Korean culture, K-Pop, Korean डांस, ड्रामा और कोरिया के प्रति एक जबरदस्त लगाव था, इतना कि उनके मन में सिर्फ कोरिया ही चलता रहता था और वे बार-बार कोरिया जाने की ज़िद करती थीं. पिता के अनुसार, बेटियाँ ‘इंडियन’ नाम से गुस्सा करती थीं, और कोरिया न मिलने पर उन्होंने कहा था कि अगर उन्हें कोरिया नहीं मिलता तो वे मर जाएँगीं.
पिता ने आगे बताया कि रात को उन्होंने बेटियों से मोबाइल फोन ले लिया था क्योंकि वे लगातार कोरियन वीडियो, ड्रामे और गेम्स देख रही थीं. हालांकि बाद में फोन फिर से मिला, लेकिन जैसे ही फोन वापस लिया गया, बेटियाँ अपने कमरे में चली गईं, दरवाज़ा अंदर से बंद कर लिया और फिर वे नीचे कूद गईं.
उन्होंने बताया कि बेटियों ने मोबाइल पर कोरियन वीडियो और डांस ड्रामे खूब देखे, अपने नामों को कोरियन-style में बदल लिया था और वे कोरिया जाकर वही जीवन जीना चाहती थीं, जिस वजह से उनकी पढ़ाई भी प्रभावित हुई थी. पिता ने कहा कि सरकार को कोरियन ड्रामा और ऐसी सामग्री पर नियंत्रण रखना चाहिए, ताकि और बच्चों को ऐसे नुकसान से बचाया जा सके.
पुलिस की प्रारंभिक जांच में एक आठ पेज की सुसाइड नोट भी बरामद हुई है, जिसमें बताया गया कि बहनों का Korean संस्कृति के प्रति अत्यधिक जुनून था और वे महसूस करती थीं कि उन्हें इससे दूर किया जा रहा है. पुलिस ने कहा है कि इस नोट से पता चलता है कि वे खुद को “Korean” महसूस करती थीं और उनका उद्देश्य कोरिया जाना था.
हालाँकि पुलिस ने यह भी स्पष्ट किया है कि इस मामले में किसी “टास्क-बेस्ड गेम” से जुड़े खतरनाक चैलेंज या कंटेंट का कोई पुख़्ता सबूत नहीं मिला है, लेकिन बहनों की ऑनलाइन गतिविधियों, मनोरंजन सामग्री और कोरियन पॉप संस्कृति के संपर्क ने उनकी मानसिक स्थिति पर गहरा प्रभाव डाला हो सकता है.
यह मामला मोडर्न डिजिटल संस्कृति, बच्चों के मनोरंजन के चुनाव, मानसिक स्वास्थ्य, और बाल पालन-पोषण के विषय पर एक गंभीर बहस को जन्म दे रहा है, क्योंकि यह दिखाता है कि छोटे बच्चों पर डिजिटल सामग्री का अत्यधिक प्रभाव परिवारों के लिए कितना विनाशकारी हो सकता है



