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बैंक क्यों ग्राहकों को क्रेडिट कार्ड लेने के लिए प्रेरित करते हैं और इससे उन्हें कितना मुनाफा होता है?

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आज के वित्तीय परिदृश्य में बैंक अपने ग्राहकों को क्रेडिट कार्ड लेने के लिए लगातार प्रोत्साहित करते नजर आते हैं। मॉल, शॉपिंग सेंटर और डिजिटल प्लेटफॉर्म पर आप अक्सर बैंक एजेंटों को क्रेडिट कार्ड के फायदे गिनाते हुए देखते हैं। यह सिर्फ इसलिए नहीं है कि बैंक ग्राहकों को सुविधाएँ देना चाहते हैं, बल्कि यह उनके व्यवसाय मॉडल का एक महत्वपूर्ण हिस्सा भी है। वास्तव में, क्रेडिट कार्ड बैंकों के लिए एक स्थिर और लाभदायक आय स्रोत बन चुके हैं।

भारत में क्रेडिट कार्ड का उपयोग तेजी से बढ़ रहा है और रिज़र्व बैंक ऑफ इंडिया के आंकड़ों के अनुसार 2025 की शुरुआत तक देश में सक्रिय क्रेडिट कार्ड की संख्या 11 करोड़ से अधिक हो चुकी है। इस बढ़ोतरी का मुख्य कारण यह है कि कार्डधारकों को लगभग 45 दिनों का बिना ब्याज भुगतान समय मिलता है, साथ ही कैशबैक, रिवॉर्ड पॉइंट्स, ट्रैवल बोनस जैसी आकर्षक सुविधाएँ भी उपलब्ध होती हैं, जिससे ग्राहक कार्ड का अधिक उपयोग करते हैं।

लेकिन बैंक इससे कैसे कमाई करते हैं? क्रेडिट कार्ड से होने वाली आमदनी कई स्रोतों से आती है। जब ग्राहक समय पर अपने बिल का भुगतान नहीं करते हैं तो बकाया राशि पर 15% से 40% तक का ब्याज वसूला जाता है, जो बैंक के लिए एक बड़ा मुनाफा है। इसके अलावा, एनुअल रिन्यूअल फीस, लेट फीस, कैश एडवांस फीस, बैलेंस ट्रांसफर चार्ज और EMI कन्वर्ज़न फीस जैसी कई अतिरिक्त चार्ज भी बैंक को नियमित रूप से इनकम प्रदान करते हैं।

एक और महत्वपूर्ण आय स्रोत है इंटरचेंज फीस, जो बैंक मर्चेंट या दुकानदार से प्रत्येक कार्ड भुगतान पर 1% से 3% के बीच कमीशन के रूप में लेते हैं। यह फीस हर बार तब लागू होती है जब कार्डधारक किसी दुकान या सेवा प्रदाता के पास भुगतान करता है। इससे भी बैंक को अच्छी खासी कमाई होती है, क्योंकि कार्ड का उपयोग बढ़ने पर यह राशि भी बढ़ती जाती है।

क्रेडिट कार्ड के प्रचार में बैंकों के द्वारा दिए जाने वाले उत्साहवर्धक ऑफ़र्स भी एक रणनीति है। इन ऑफ़र्स में रिवॉर्ड पॉइंट्स, कैशबैक, लॉयल्टी पॉइंट्स और कभी-कभी बिना वार्षिक शुल्क वाले कार्ड शामिल होते हैं, जिससे ग्राहक कार्ड के लिए आकर्षित होते हैं और खर्च बढ़ाते हैं। इसी खर्च से बैंक को इंटरचेंज और अन्य फीस से लाभ होता है।

वित्तीय विशेषज्ञों का मानना है कि जबकि ग्राहक इन सुविधाओं से लाभान्वित होते हैं, उन्हें अपने खर्च और भुगतान अनुसूची पर नियंत्रण रखना बहुत ज़रूरी है। समय पर भुगतान न होने पर ब्याज और शुल्कों का भार बढ़ सकता है, जिससे वित्तीय बोझ भी बनने का खतरा रहता है। इसी कारण RBI और बैंक समय-समय पर नियमों को सख्त करते रहते हैं ताकि यह बिजनेस मॉडल संतुलित तरीके से चलता रहे।

कुल मिलाकर, बैंकों द्वारा क्रेडिट कार्ड के प्रचार का उद्देश्य केवल ग्राहक सेवा नहीं है, बल्कि यह एक फायदे का सौदा भी है—जहाँ बैंक को विविध शुल्कों और व्याज के माध्यम से कमाई होती है, और उपभोक्ताओं को सुविधाएँ और वित्तीय लचीलापन मिलता है। हालांकि, सही जानकारी और समझ के बिना इसका उपयोग करना कभी-कभी ग्राहकों के लिए महंगा भी साबित हो सकता है।

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