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भारत-यूके FTA का बड़ा असर

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भारत और यूनाइटेड किंगडम (यूके) के बीच लागू हुए मुक्त व्यापार समझौते (Free Trade Agreement-FTA) का असर अब ऑटोमोबाइल सेक्टर में भी दिखाई देने लगा है। इस समझौते के लागू होने के बाद ब्रिटेन में निर्मित कई प्रीमियम और अल्ट्रा-लक्जरी कारों की कीमतों में बड़ी कमी आने की संभावना है। खास तौर पर रोल्स-रॉयस, रेंज रोवर, मैकलारेन और एस्टन मार्टिन जैसे प्रतिष्ठित ब्रिटिश ब्रांड भारतीय ग्राहकों के लिए पहले की तुलना में अधिक किफायती हो सकते हैं। उद्योग विशेषज्ञों का मानना है कि आयात शुल्क में कटौती का सीधा लाभ ग्राहकों तक पहुंचेगा, जिससे लग्जरी कार बाजार में नई तेजी देखने को मिल सकती है।

भारत-यूके एफटीए के तहत ब्रिटेन से आयात होने वाली पात्र पूरी तरह निर्मित (CBU) कारों पर सीमा शुल्क में बड़ी कमी की गई है। पहले इन वाहनों पर लगभग 110% तक आयात शुल्क लगता था, जिसे अब पहले चरण में घटाकर 30% कर दिया गया है। समझौते के अनुसार यह रियायती शुल्क शुरुआती चरण में निर्धारित कोटा के तहत आयात होने वाले वाहनों पर लागू होगा और आने वाले वर्षों में इसे क्रमिक रूप से और घटाकर 10% तक लाया जाएगा। इस बदलाव का उद्देश्य दोनों देशों के बीच व्यापार को बढ़ावा देना और प्रीमियम उत्पादों तक ग्राहकों की पहुंच आसान बनाना है।

इस फैसले का सबसे बड़ा लाभ ब्रिटिश लग्जरी कार निर्माताओं को मिलने की उम्मीद है। जगुआर लैंड रोवर (JLR) ने पहले ही अपने आयातित रेंज रोवर SV और रेंज रोवर स्पोर्ट SV मॉडल की कीमतों में उल्लेखनीय कटौती की घोषणा कर दी है। वहीं रोल्स-रॉयस भी नई मूल्य सूची जारी करने की तैयारी में है। रिपोर्टों के अनुसार, कंपनी की कारों की कीमतों में लगभग 20% तक कमी आ सकती है। इसके अलावा मैकलारेन और एस्टन मार्टिन जैसी कंपनियां भी अपने भारतीय ग्राहकों के लिए संशोधित कीमतों की घोषणा कर सकती हैं।

हालांकि सभी मॉडल इस छूट के दायरे में नहीं आएंगे। जिन वाहनों का निर्माण ब्रिटेन के बजाय अन्य यूरोपीय देशों में होता है या जिनका स्थानीय स्तर पर असेंबली या निर्माण किया जाता है, उनकी कीमतों में कोई बदलाव नहीं होगा। उदाहरण के तौर पर डिफेंडर और डिस्कवरी जैसे कुछ मॉडल, जिनका उत्पादन ब्रिटेन के बाहर होता है, मौजूदा कीमतों पर ही उपलब्ध रहेंगे। इसी तरह भारत में स्थानीय रूप से तैयार किए जाने वाले कुछ रेंज रोवर मॉडल भी इस शुल्क कटौती का लाभ नहीं उठा पाएंगे।

विशेषज्ञों का मानना है कि इस समझौते से केवल लग्जरी कार बाजार ही नहीं, बल्कि भारत और ब्रिटेन के बीच व्यापारिक संबंध भी मजबूत होंगे। आयात शुल्क कम होने से प्रीमियम कारों की मांग बढ़ सकती है, जिससे कंपनियों की बिक्री में इजाफा होने की संभावना है। दूसरी ओर भारतीय उपभोक्ताओं को अधिक विकल्प और प्रतिस्पर्धी कीमतों का लाभ मिलेगा। ऑटोमोबाइल उद्योग से जुड़े जानकारों का कहना है कि यह समझौता भविष्य में अन्य अंतरराष्ट्रीय वाहन निर्माताओं को भी भारतीय बाजार में निवेश और विस्तार के लिए प्रोत्साहित कर सकता है।

भारत-यूके एफटीए को दोनों देशों के आर्थिक संबंधों के लिए एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। इस समझौते से जहां भारतीय निर्यातकों को ब्रिटेन के बाजार में बेहतर पहुंच मिलेगी, वहीं भारतीय उपभोक्ताओं को कई ब्रिटिश उत्पाद, जिनमें लग्जरी कारें भी शामिल हैं, पहले की तुलना में कम कीमत पर उपलब्ध हो सकेंगे। आने वाले महीनों में विभिन्न ऑटोमोबाइल कंपनियों की नई मूल्य सूची सामने आने के बाद यह साफ होगा कि अलग-अलग मॉडलों की कीमतों में वास्तविक तौर पर कितनी कमी आती है, लेकिन फिलहाल यह तय माना जा रहा है कि प्रीमियम कार खरीदने की योजना बना रहे ग्राहकों के लिए यह समझौता बड़ी राहत लेकर आया है।

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